
राज्यसभा में मनुस्मृति पर बयान के बाद मल्लिकार्जुन खरगे।Source : Chrome
राज्यसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे की मनुस्मृति से जुड़ी टिप्पणी पर जोरदार विवाद खड़ा हो गया। भाजपा सांसदों ने इसका कड़ा विरोध किया, जबकि सदन के नेता जेपी नड्डा ने इसे रिकॉर्ड से हटाने और बयान के समर्थन में मूल स्रोत प्रस्तुत करने की मांग की।
पेपर लीक बिल की बहस के बीच गरमाया सदन
गुरुवार (30 जुलाई) को राज्यसभा में पेपर लीक रोकने से जुड़े विधेयक पर चर्चा चल रही थी। इसी दौरान कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने शिक्षा और पाठ्यक्रम का जिक्र करते हुए मनुस्मृति पर टिप्पणी की। उनके बयान के बाद सदन में माहौल अचानक गर्म हो गया और भाजपा सांसदों ने विरोध शुरू कर दिया।
खरगे ने मनुस्मृति को लेकर क्या कहा?
बहस के दौरान खरगे ने कहा कि नए पाठ्यक्रम में मनुस्मृति से जुड़ी बातें शामिल किए जाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने दावा किया कि मनुस्मृति में वेदों के उच्चारण और अध्ययन को लेकर कठोर दंड का उल्लेख है। उनके इस बयान के तुरंत बाद सत्ता पक्ष के सांसदों ने आपत्ति जताई और सदन में शोर-शराबा शुरू हो गया।
सभापति ने भी उठाया सवाल
हंगामे के बीच सभापति ने मल्लिकार्जुन खरगे से पूछा कि पेपर लीक विधेयक पर चर्चा के दौरान मनुस्मृति का उल्लेख किस संदर्भ में किया जा रहा है। इसके बाद सदन में कुछ देर तक तीखी नोकझोंक जारी रही।
जेपी नड्डा ने रिकॉर्ड से हटाने की मांग की
भाजपा की ओर से सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने खरगे की टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह की बातें समाज में अनावश्यक तनाव पैदा कर सकती हैं। नड्डा ने सभापति से अनुरोध किया कि विवादित टिप्पणी को सदन की कार्यवाही से हटाया जाए।
'मूल पाठ से प्रमाण दें'
जेपी नड्डा ने यह भी कहा कि यदि मनुस्मृति के बारे में कोई दावा किया जा रहा है तो उसे मूल ग्रंथ के आधार पर प्रमाणित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मनुस्मृति एक प्राचीन हिंदू धर्मग्रंथ है, जिसकी विभिन्न सामाजिक प्रावधानों को लेकर लंबे समय से बहस और आलोचना होती रही है।
पुराना राजनीतिक विवाद फिर चर्चा में
भाजपा और कांग्रेस के बीच मनुस्मृति को लेकर पहले भी कई बार राजनीतिक टकराव देखने को मिला है। कांग्रेस लगातार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर संविधान की जगह मनुस्मृति को बढ़ावा देने का आरोप लगाती रही है, जबकि भाजपा इन आरोपों को खारिज करती रही है। राज्यसभा में हुई यह बहस एक बार फिर इसी पुराने विवाद को राजनीतिक केंद्र में ले आई।
