erer | Source: ereउच्च शिक्षा हासिल करने की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए योग्य विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को एक वर्षीय पोस्टग्रेजुएट (PG) कार्यक्रम शुरू करने की अनुमति दे दी है। इस फैसले के बाद अब चार वर्षीय स्नातक (Bachelor's Degree) पूरा करने वाले पात्र छात्र केवल एक वर्ष में पोस्टग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी कर सकेंगे। हालांकि यह सुविधा सभी विश्वविद्यालयों और सभी छात्रों के लिए उपलब्ध नहीं होगी। इसके लिए UGC ने स्पष्ट पात्रता और संस्थागत शर्तें भी निर्धारित की हैं।

28 जुलाई 2026 को जारी किया गया नया सर्कुलर

UGC ने 28 जुलाई 2026 को जारी अपने आधिकारिक सर्कुलर में बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के अनुरूप अब योग्य विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षण संस्थान ऑनलाइन तथा Open and Distance Learning (ODL) माध्यम से भी एक वर्षीय पोस्टग्रेजुएट कार्यक्रम संचालित कर सकेंगे।

हालांकि, यह अनुमति केवल उन्हीं संस्थानों को मिलेगी जो पहले से उसी विषय में दो वर्षीय PG कार्यक्रम संचालित करने के लिए UGC से मान्यता प्राप्त कर चुके हैं।

किन छात्रों को मिलेगा एक वर्षीय PG कोर्स में प्रवेश?

UGC ने इस नए कार्यक्रम के लिए पात्रता भी स्पष्ट कर दी है। एक वर्षीय PG कार्यक्रम में केवल वही छात्र प्रवेश ले सकेंगे जिन्होंने चार वर्षीय बैचलर डिग्री पूरी की हो।

इसके अलावा अभ्यर्थी को संबंधित पाठ्यक्रम की सभी निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करना होगा।

यदि छात्र MBA, MCA, PGDM जैसे व्यावसायिक (Professional) पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेना चाहते हैं तो उन्हें संबंधित नियामक संस्था द्वारा निर्धारित अतिरिक्त योग्यताओं को भी पूरा करना होगा।

सभी विश्वविद्यालय नहीं चला सकेंगे यह कोर्स

UGC ने स्पष्ट किया है कि देश का प्रत्येक विश्वविद्यालय यह कार्यक्रम शुरू नहीं कर सकेगा। केवल वही उच्च शिक्षण संस्थान (Higher Education Institutions - HEIs) इस सुविधा का लाभ उठा पाएंगे जिन्हें पहले से ऑनलाइन या ODL माध्यम में दो वर्षीय PG कार्यक्रम संचालित करने की अनुमति प्राप्त है।

इसके साथ ही संस्थान को NEP 2020 तथा UGC के सभी शैक्षणिक नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।

शैक्षणिक निकायों की मंजूरी भी होगी जरूरी

एक वर्षीय PG कार्यक्रम शुरू करने से पहले संबंधित विश्वविद्यालय को अपने सभी सक्षम शैक्षणिक निकायों की स्वीकृति प्राप्त करनी होगी।

इनमें Board of Studies (BoS), Academic Council, Executive Council सहित अन्य संबंधित निकाय शामिल हैं। इनकी मंजूरी मिलने के बाद ही विश्वविद्यालय इस कार्यक्रम को लागू कर सकेंगे।

UGC ने तय कीं महत्वपूर्ण शर्तें

UGC ने एक वर्षीय पोस्टग्रेजुएट कार्यक्रम के संचालन के लिए कई महत्वपूर्ण शर्तें भी निर्धारित की हैं।

इनके अनुसार—

  • कार्यक्रम पूरी तरह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और UGC की गाइडलाइन के अनुरूप होना चाहिए।
  • ऑनलाइन अथवा ODL माध्यम से वही विषय पढ़ाया जा सकेगा जिसमें पहले से मान्यता प्राप्त दो वर्षीय PG कार्यक्रम संचालित हो रहा हो।
  • प्रवेश केवल चार वर्षीय ऑनर्स बैचलर डिग्री प्राप्त छात्रों को मिलेगा।
  • व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में संबंधित नियामक संस्थाओं के नियम लागू रहेंगे।
  • पाठ्यक्रम, क्रेडिट प्रणाली, मूल्यांकन और अन्य सभी शैक्षणिक मानकों का पालन UGC के निर्धारित नियमों के अनुसार करना होगा।

नौकरी करने वाले छात्रों को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ

UGC के इस निर्णय से विशेष रूप से उन छात्रों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है जो नौकरी के साथ अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहते हैं या किसी कारणवश नियमित कक्षाओं में शामिल नहीं हो पाते।

ऑनलाइन और Open and Distance Learning (ODL) माध्यम से एक वर्षीय PG कार्यक्रम उपलब्ध होने से उच्च शिक्षा तक छात्रों की पहुंच और अधिक आसान हो सकेगी।

गुणवत्ता बनाए रखने पर रहेगा विशेष जोर

UGC ने स्पष्ट किया है कि एक वर्षीय PG कार्यक्रम शुरू करने का उद्देश्य केवल पढ़ाई की अवधि कम करना नहीं है, बल्कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखना भी है।

इसी कारण पाठ्यक्रम की संरचना, क्रेडिट प्रणाली, मूल्यांकन प्रक्रिया और अन्य शैक्षणिक मानकों की निगरानी UGC के निर्धारित नियमों के अनुसार की जाएगी, ताकि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों को मिलेगा बढ़ावा

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उस उद्देश्य को आगे बढ़ाएगा, जिसमें उच्च शिक्षा को अधिक लचीला, सुलभ और विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने पर जोर दिया गया है।

इस व्यवस्था से विशेष रूप से कामकाजी युवाओं, दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले छात्रों और नियमित कॉलेज नहीं जा पाने वाले विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सुविधा मिल सकती है।