नेताजी की अस्थियां भारत आएंगी? SC ने लिया बड़ा संज्ञान, केंद्र को नोटिस; जापान से वापसी पर अब होगी सुनवाई | Source: Abp news.comसुभाष चंद्र बोस की बेटी अनीता बोस फाफ ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की याचिका, रेंकोजी मंदिर में रखी अस्थियों को भारत लाने के लिए केंद्र से स्पष्ट कार्ययोजना बनाने की मांग

नेताजी की अस्थियां भारत आएंगी? SC ने लिया बड़ा संज्ञान, केंद्र को नोटिस; जापान से वापसी पर अब होगी सुनवाईSource : Abp news.com

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अस्थियों को जापान से भारत लाने की मांग अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई के लिए सहमति जताते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। यह याचिका नेताजी की बेटी अनीता बोस फाफ की ओर से दाखिल की गई है। इसमें जापान के टोक्यो स्थित रेंकोजी मंदिर में रखी नेताजी की अस्थियों को सम्मानपूर्वक भारत लाने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की गई है।

अनीता बोस की याचिका पर SC ने लिया संज्ञान

मंगलवार, 11 अगस्त को अनीता बोस फाफ की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच को बताया गया कि इस बार याचिका नेताजी की बेटी ने खुद दाखिल की है। इसके बाद अदालत ने याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया और विदेश मंत्रालय तथा गृह मंत्रालय से जवाब मांगा।

सितंबर 1945 से रेंकोजी मंदिर में रखी हैं अस्थियां

याचिका में कहा गया है कि सितंबर 1945 से नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अस्थियां टोक्यो के रेंकोजी मंदिर में रखी हुई हैं। अनीता बोस फाफ ने दावा किया है कि लंबे समय से इन अस्थियों को भारत लाने के लिए सरकार की ओर से पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए हैं।

याचिका में नेताजी की स्थिति को एक तरह का “मरणोपरांत वनवास” बताते हुए कहा गया है कि वह उनकी एकमात्र जीवित सीधी वंशज हैं और उन्हें अपने पिता के अंतिम संस्कार का अधिकार मिलना चाहिए।

पहले भी सामने आया था यही मामला

इसी मुद्दे पर इस साल मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने नेताजी के पौत्र आशीष रे की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। उस समय आशीष रे की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत को बताया था कि उनकी याचिका को नेताजी की बेटी अनीता बोस का भी समर्थन प्राप्त है।

हालांकि, उस समय अदालत ने कहा था कि यदि नेताजी की बेटी स्वयं याचिका दाखिल करती हैं, तो इस मांग पर सुनवाई की जा सकती है। अब अनीता बोस फाफ की ओर से स्वयं याचिका दाखिल किए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है।

केंद्र से क्या मांग की गई है?

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा गया है कि विदेश मंत्रालय को जापान सरकार से बातचीत कर रेंकोजी मंदिर में रखी नेताजी की अस्थियों और कलश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया जाए।

इसके अलावा केंद्र सरकार से अस्थियों को भारत वापस लाने के लिए विभिन्न मंत्रालयों की एक समिति गठित करने और इस पूरी प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट कार्ययोजना तैयार कर उसे अदालत के सामने रखने का अनुरोध किया गया है।अब इस मामले में केंद्र सरकार के जवाब और सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई पर नजर रहेगी।