देश की शिक्षा व्यवस्था इन दिनों लगातार विवादों के केंद्र में है। NEET पेपर लीक, विभिन्न भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं तथा CBSE की नई मूल्यांकन प्रक्रियाओं को लेकर पहले से ही सवाल उठ रहे थे। इसी बीच नई दिल्ली के ITO स्थित स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (SPA) परिसर में शिक्षा मंत्रालय के कार्यालय में लगी आग ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। हालांकि शुरुआती जानकारी के अनुसार आग पर समय रहते काबू पा लिया गया और किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन घटना के समय और उसके राजनीतिक संदर्भ ने इसे सामान्य हादसे से कहीं अधिक चर्चा का विषय बना दिया है। विपक्ष ने इसे शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विवादों के बीच हुई घटना बताते हुए सरकार से जवाब मांगा है, जबकि प्रशासनिक स्तर पर आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है।
NEET-CBSE विवादों के बीच उठे नए सवाल
पिछले कुछ वर्षों में देश की कई प्रमुख परीक्षाएं विवादों में रही हैं। NEET पेपर लीक से लेकर CUET, JEE Main, BPSC और अन्य परीक्षाओं में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही खामियों ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। इसी पृष्ठभूमि में शिक्षा मंत्रालय की इमारत में आग लगने की घटना सामने आई, जिसके बाद विपक्ष ने इसे लेकर तीखे सवाल उठाए। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूछा कि क्या यह महज संयोग है या फिर ऐसे समय में हुई घटना है, जब शिक्षा व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक संकेत नहीं है जो आग और परीक्षा विवादों के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि करता हो।
CBSE की OSM प्रक्रिया पर कांग्रेस का हमला
कांग्रेस ने इस मौके पर CBSE की OSM (On-Screen Marking) प्रक्रिया को भी निशाने पर लिया। पार्टी का दावा है कि पारंपरिक मूल्यांकन प्रणाली को बदलकर उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटलीकरण और ऑनलाइन मूल्यांकन की प्रक्रिया में कई खामियां सामने आई हैं। पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि एक युवा एथिकल हैकर ने उन तकनीकी कमजोरियों की ओर ध्यान दिलाया, जिन्हें सिस्टम संचालित करने वाले संस्थान समय रहते नहीं पहचान सके। कांग्रेस का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में तकनीक का इस्तेमाल स्वागतयोग्य है, लेकिन पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना लागू की गई प्रक्रियाएं छात्रों के हितों को प्रभावित कर सकती हैं। दूसरी ओर, शिक्षा बोर्ड और सरकार की ओर से इस प्रक्रिया को अधिक दक्ष और आधुनिक बनाने की दिशा में उठाया गया कदम बताया जाता रहा है।
युवाओं की नाराजगी और बढ़ती राजनीतिक लड़ाई
कांग्रेस ने इस पूरे मुद्दे को युवाओं की आकांक्षाओं और रोजगार संकट से जोड़ते हुए सरकार पर हमला तेज कर दिया है। पार्टी का आरोप है कि लगातार पेपर लीक, परीक्षा विवाद और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी ने छात्रों और अभ्यर्थियों के बीच असंतोष बढ़ाया है। विपक्ष का कहना है कि शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर सरकार पर्याप्त जवाबदेही नहीं दिखा रही, जबकि सरकार का पक्ष रहा है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं। ऐसे में शिक्षा मंत्रालय में लगी आग एक प्रशासनिक घटना से आगे बढ़कर राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गई है, जहां शिक्षा व्यवस्था, युवाओं का भविष्य और सरकारी जवाबदेही जैसे मुद्दे केंद्र में आ गए हैं।
जांच के नतीजों पर टिकी निगाहें
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल आग लगने के वास्तविक कारणों का है, जिसका जवाब केवल आधिकारिक जांच के बाद ही सामने आएगा। दमकल विभाग और संबंधित एजेंसियां घटना की पड़ताल कर रही हैं। वहीं राजनीतिक दल अपने-अपने दृष्टिकोण से इस घटना को देख रहे हैं। एक ओर विपक्ष इसे शिक्षा व्यवस्था से जुड़े व्यापक संकट का प्रतीक बता रहा है, तो दूसरी ओर सरकार और प्रशासन इसे एक तकनीकी या आकस्मिक घटना मानते हुए जांच पूरी होने का इंतजार करने की बात कह रहे हैं। लेकिन इतना तय है कि शिक्षा मंत्रालय में लगी यह आग ऐसे समय में हुई है जब देश में शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली को लेकर पहले से ही असाधारण स्तर की सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चा चल रही है।
