मुंबई एक बार फिर राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों की जांच के केंद्र में है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा हाल ही में एक कथित आतंकी साजिश का पर्दाफाश किए जाने के बाद ऐसे संकेत मिले हैं कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और भारत विरोधी अंडरवर्ल्ड नेटवर्क एक बार फिर सक्रिय होने की कोशिश कर रहे थे। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस नेटवर्क का मकसद सिर्फ हथियार जुटाना या लोगों को उकसाना नहीं था, बल्कि देश के भीतर अस्थिरता पैदा करने और हाई-प्रोफाइल लक्ष्यों को निशाना बनाने की तैयारी भी की जा रही थी। शुरुआती जांच में सामने आया है कि स्थानीय स्तर पर भर्ती किए गए लोगों को साजिश की असली मंशा नहीं बताई गई थी, बल्कि उन्हें भावनात्मक और धार्मिक मुद्दों के नाम पर भड़काया जा रहा था।
बांद्रा मस्जिद विवाद को बनाया गया ‘टूल’, असली मकसद कुछ और था
जांच एजेंसियों के मुताबिक, मुंबई के कुछ युवकों और स्थानीय संपर्कों को यह बताया गया था कि वे बांद्रा के गरीब नगर इलाके में कथित तौर पर हुई बुलडोजर कार्रवाई का बदला लेने के लिए जुटाए जा रहे हैं। लेकिन जांच आगे बढ़ने पर पता चला कि यह केवल एक बहाना था। एजेंसियों का मानना है कि स्थानीय नाराजगी और संवेदनशील मुद्दों का इस्तेमाल कर लोगों को अपने नेटवर्क में शामिल करने की कोशिश की गई। सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, यह तरीका लंबे समय से आतंकी और संगठित अपराध गिरोहों द्वारा अपनाया जाता रहा है, जहां वास्तविक उद्देश्य छिपाकर भावनात्मक मुद्दों के जरिए लोगों को प्रभावित किया जाता है। इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सोशल मीडिया और स्थानीय विवादों का इस्तेमाल किस तरह बड़े सुरक्षा खतरों में बदला जा सकता है।
‘डी कंपनी’ की घटती पकड़ और वजूद बचाने की कोशिश
खुफिया सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में डी कंपनी का प्रभाव पहले की तुलना में काफी कमजोर हुआ है। भारत में सुरक्षा एजेंसियों की लगातार कार्रवाई, हवाला नेटवर्क पर शिकंजा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती निगरानी के कारण अंडरवर्ल्ड की आर्थिक और संगठनात्मक ताकत प्रभावित हुई है। ऐसे में एजेंसियों को आशंका है कि दाऊद इब्राहिम का नेटवर्क अपनी मौजूदगी और प्रभाव दिखाने के लिए नए तरीकों की तलाश कर रहा है। जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि मुंबई में ग्राउंड नेटवर्क को फिर से सक्रिय करने की कोशिशें की जा रही थीं, जिसमें पुराने गैंग संपर्कों और नए युवाओं को जोड़ने का प्रयास शामिल था। सुरक्षा एजेंसियां इसे केवल आपराधिक गतिविधि नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला मानकर देख रही हैं।
फिल्म ‘धुरंधर’ और अंडरवर्ल्ड की कथित नाराजगी
जांच से जुड़े कुछ सूत्रों का दावा है कि हाल ही में चर्चा में रही फिल्म ‘धुरंधर’ को लेकर भी अंडरवर्ल्ड नेटवर्क में नाराजगी देखी गई। बताया जा रहा है कि फिल्म में दिखाए गए कुछ किरदारों और घटनाओं को लेकर डी कंपनी के भीतर असंतोष था। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं कि कहीं यह नाराजगी नेटवर्क को फिर से सक्रिय करने के लिए मनोवैज्ञानिक या प्रचारात्मक कारण तो नहीं बनी। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अंडरवर्ल्ड संगठनों के लिए भय और प्रभाव की छवि बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण होता है, इसलिए वे अपने कमजोर पड़ते प्रभाव को लेकर संवेदनशील रहते हैं।
समय रहते नाकाम हुई साजिश, लेकिन खतरा अभी खत्म नहीं
दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और विभिन्न एजेंसियों के समन्वय से यह कथित साजिश शुरुआती चरण में ही विफल कर दी गई। लेकिन इस पूरे मामले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत विरोधी नेटवर्क लगातार नए रास्ते तलाश रहे हैं। ISI, संगठित अपराध गिरोहों और स्थानीय मॉड्यूल के बीच संभावित गठजोड़ सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। यही कारण है कि जांच अब केवल गिरफ्तार लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके वित्तीय स्रोतों, डिजिटल संपर्कों और अंतरराष्ट्रीय लिंक की भी पड़ताल की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि समय रहते मिली यह सफलता भविष्य में और बड़े खतरे को टालने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
