
फ्रांस की 11 वर्षीय बच्ची लियाना हत्याकांडSource : Social media
फ्रांस में 11 साल की बच्ची लियाना की हत्या के मामले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस मामले में सामने आई एक जांच रिपोर्ट ने न केवल हत्या की घटना, बल्कि पुलिस और न्यायिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य आरोपी के खिलाफ पहले से एक नाबालिग बच्ची के यौन शोषण की शिकायत दर्ज थी और उस पर दर्जनों बार दुष्कर्म करने के आरोप लगाए गए थे। हैरानी की बात यह है कि पीड़िता की मां बार-बार अधिकारियों से कार्रवाई की मांग करती रही, लेकिन मामले में समय पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अब बच्ची की हत्या के बाद सामने आए इन खुलासों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है, जबकि पुलिस और न्यायिक तंत्र की कथित लापरवाही को लेकर लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
रिपोर्ट में क्या हुआ खुलासा?
फ्रांस सरकार को सौंपी गई प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि इस पूरे मामले में कई स्तरों पर गंभीर चूक हुई। रिपोर्ट तैयार करने वाले न्याय मंत्रालय यानी IGJ और राष्ट्रीय जेंडरमेरी IGGN के निरीक्षकों ने पाया कि शिकायत दर्ज होने के बाद मामले को जिस तरह संभाला गया, उसमें कई प्रक्रियात्मक खामियां थीं। रिपोर्ट में इसे गलतियों, लापरवाही, निष्क्रियता और खराब निर्णयों की श्रृंखला बताया गया है।
पहले भी दर्ज हुई थी शिकायत
रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2025 में एक 11 वर्षीय बच्ची की मां ने आरोपी जेरोम बरेला के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। बच्ची ने उस पर यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए थे। इसके बावजूद जांच और कानूनी प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ी। अधिकारियों के बीच समन्वय की कमी और देरी के कारण मामला लंबे समय तक अधर में लटका रहा।
प्रधानमंत्री ने माना सिस्टम की विफलता
फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह मामला प्रशासनिक और संस्थागत विफलता का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटेगी और यह तय किया जाएगा कि कहां-कहां चूक हुई तथा इसके लिए कौन जिम्मेदार है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरे न्यायिक या पुलिस तंत्र को दोषी ठहराने के बजाय व्यक्तिगत जिम्मेदारियां तय की जाएंगी।
लोगों में बढ़ा आक्रोश
रिपोर्ट सामने आने के बाद पूरे फ्रांस में इस मामले को लेकर नाराजगी बढ़ गई है। कई सामाजिक संगठनों और बाल अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि शुरुआती शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई की जाती, तो शायद इस दुखद घटना को रोका जा सकता था। अब लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर शिकायत दर्ज होने के बावजूद आरोपी के खिलाफ सख्त कदम क्यों नहीं उठाए गए।
अभी आनी है अंतिम रिपोर्ट
सरकार को सौंपी गई यह केवल प्रारंभिक रिपोर्ट है। मामले की अंतिम और विस्तृत जांच रिपोर्ट 5 सितंबर को आने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि अंतिम रिपोर्ट में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका और प्रशासनिक चूक के बारे में और अधिक जानकारी सामने आ सकती है।
