झारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC की परीक्षा में कथित धांधली का मामला अब और बड़ा होता दिखाई दे रहा है। लंबे समय से विवादों में रहे JPSC-2 मामले में अब प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की एंट्री हो गई है। एजेंसी ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में जांच शुरू कर दी है। इस खबर के सामने आने के बाद झारखंड के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है।

मामला JPSC की दूसरी सिविल सेवा परीक्षा से जुड़ा है। आरोप है कि परीक्षा और इंटरव्यू की प्रक्रिया में गड़बड़ी करके कुछ ऐसे उम्मीदवारों को भी सफल बनाया गया, जो कथित तौर पर योग्य नहीं थे। इस मामले में पहले से ही CBI की जांच चल रही थी। अब ED ने उसी मामले से जुड़े पैसों के लेन-देन की जांच शुरू की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ED ने इस मामले में ECIR यानी Enforcement Case Information Report दर्ज की है। यह रिपोर्ट मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में ED की जांच की शुरुआत का एक अहम कदम होती है।

ED की जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि अगर परीक्षा में किसी तरह की गड़बड़ी करके लोगों को फायदा पहुंचाया गया था, तो क्या इसके बदले पैसे का लेन-देन भी हुआ था।

रिपोर्ट के अनुसार, CBI ने पहले इस मामले में 60 लोगों को आरोपी बनाया था। इनमें JPSC के कुछ अधिकारी, चयनित उम्मीदवार, परीक्षक और परीक्षा से जुड़ी एक निजी कंपनी के अधिकारी शामिल बताए गए हैं। ED ने इन सभी नामों को अपनी जांच में शामिल किया है।

जांच एजेंसियों के सामने आरोप यह है कि JPSC-2 परीक्षा में लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के नंबरों में कथित तौर पर हेरफेर किया गया। आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए कुछ अयोग्य उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाया गया और वे सरकारी अधिकारी बन गए।

अगर जांच में पैसों के लेन-देन से जुड़े आरोप साबित होते हैं, तो मामला केवल परीक्षा में गड़बड़ी तक सीमित नहीं रहेगा। इसी वजह से ED की जांच को इस मामले में काफी अहम माना जा रहा है।

हालांकि, यहां यह साफ करना जरूरी है कि जांच शुरू होना किसी व्यक्ति को दोषी साबित नहीं करता। आरोपों की सच्चाई जांच और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।

JPSC से जुड़े विवाद का यह पहला मामला नहीं है। हाल के दिनों में 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा को लेकर भी गड़बड़ी और अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। इस मामले में झारखंड CID ने JPSC कार्यालय में छापेमारी की थी। इसके बाद परीक्षा से जुड़े कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी हुई।

इन घटनाओं के बीच छात्रों और नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं की चिंता भी बढ़ी है। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले उम्मीदवार कई महीनों और कई बार सालों तक मेहनत करते हैं। ऐसे में अगर परीक्षा की प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं, तो इसका सीधा असर छात्रों के भरोसे पर पड़ता है।

JPSC से जुड़े पुराने मामलों की वजह से भी आयोग की कार्यप्रणाली और परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठते रहे हैं। हाल की घटनाओं ने इस बहस को फिर से तेज कर दिया है कि सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता कैसे सुनिश्चित की जाए।

फिलहाल ED की जांच आगे बढ़ने के साथ यह पता लगाने की कोशिश होगी कि परीक्षा में कथित गड़बड़ी के पीछे सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही थी या इसके पीछे पैसों का कोई बड़ा खेल भी था। जांच पूरी होने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ हो पाएगी।

इस मामले में सबसे ज्यादा नजर अब ED और दूसरी जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर है। साथ ही छात्रों को उम्मीद है कि जांच के जरिए सच सामने आएगा और अगर कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।