JPSC के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते की गिरफ्तारी। | Source: Chrome

JPSC के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते की गिरफ्तारी।Source : Chrome

झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच जांच एजेंसी CID ने JPSC के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते को गिरफ्तार किया है। उनकी गिरफ्तारी 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच के बीच हुई है। खियांग्ते इससे पहले झारखंड के मुख्य सचिव रह चुके हैं और मार्च 2025 में JPSC की कमान संभाली थी। गिरफ्तारी के बाद अब उनके प्रशासनिक कार्यकाल और परीक्षा विवाद में उनकी भूमिका को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं।

कौन हैं एल. खियांग्ते?

एल. खियांग्ते का पूरा नाम लालबिआकतलुआंगा खियांग्ते बताया जाता है। वह 1988 बैच के IAS अधिकारी और झारखंड कैडर के अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी रहे हैं। उनका जन्म 26 अक्टूबर 1964 को हुआ था। मूल रूप से मिजोरम से आने वाले खियांग्ते ने इतिहास विषय से स्नातक की पढ़ाई की और इसके बाद भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल हुए।अपने लंबे प्रशासनिक करियर के दौरान उन्होंने जिला प्रशासन से लेकर राज्य सरकार के शीर्ष पदों तक जिम्मेदारियां संभालीं। वह एकीकृत बिहार के बक्सर जिले में जिलाधिकारी भी रह चुके हैं। बाद में अंतर-कैडर प्रतिनियुक्ति के जरिए वर्ष 2008 में झारखंड कैडर में आए।

झारखंड के मुख्य सचिव भी रहे

खियांग्ते ने झारखंड सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। इनमें अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, परीक्षा नियंत्रक, आदिवासी कल्याण आयुक्त, उप विकास आयुक्त और प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थान के महानिदेशक जैसे पद शामिल हैं।वह 6 दिसंबर 2023 से 31 अक्टूबर 2024 तक झारखंड के मुख्य सचिव रहे। 31 अक्टूबर 2024 को सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें फरवरी 2025 में JPSC का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। राज्यपाल की मंजूरी के बाद उन्होंने मार्च 2025 में आयोग की जिम्मेदारी संभाली।

JPSC की कमान संभालने के बाद क्या हुआ?

जब खियांग्ते ने JPSC अध्यक्ष का पद संभाला, उस समय आयोग के सामने कई लंबित भर्ती प्रक्रियाओं को पूरा कराने की चुनौती थी। लेकिन उनके कार्यकाल में हुई कुछ परीक्षाएं बाद में विवादों में आ गईं।इनमें सबसे बड़ा मामला 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा से जुड़ा रहा। 19 अप्रैल 2026 को आयोजित इस परीक्षा के बाद अभ्यर्थियों ने परीक्षा संचालन, OMR शीट, मूल्यांकन और परिणाम प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। इसके बाद छात्रों का विरोध तेज हुआ और मामला जांच एजेंसी तक पहुंच गया।

14वीं JPSC परीक्षा में क्या आरोप लगे?

अभ्यर्थियों की ओर से परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के आरोप लगाए गए। जांच के दौरान CID ने JPSC कार्यालय और मामले से जुड़े अन्य ठिकानों पर कार्रवाई की। एजेंसी ने परीक्षा से संबंधित दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की।मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ कई लोगों पर कार्रवाई हुई और गिरफ्तारी भी की गई। इसी जांच के दायरे में तत्कालीन JPSC चेयरमैन एल. खियांग्ते भी आए।

CID की कार्रवाई के बाद इस्तीफा

जुलाई 2026 में CID की छापेमारी और जांच के बीच खियांग्ते ने JPSC अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने उस समय निष्पक्ष जांच का हवाला देते हुए पद छोड़ने की बात कही थी। उनका तर्क था कि पद पर रहते हुए जांच जारी रहने से निष्पक्षता और साक्ष्यों को लेकर सवाल उठ सकते हैं।

उनका इस्तीफा स्वीकार होने के बाद वह JPSC के पूर्व चेयरमैन हो गए। अब इसी मामले में CID ने उन्हें गिरफ्तार किया है।

किन-किन परीक्षाओं पर उठे सवाल?

खियांग्ते के कार्यकाल के दौरान सिर्फ 14वीं सिविल सेवा परीक्षा ही विवाद में नहीं रही। विभिन्न भर्ती परीक्षाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए। इनमें फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर भर्ती,असिस्टेंट कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट्स, झारखंड पात्रता परीक्षा,प्रोजेक्ट मैनेजर भर्ती,सिविल जज जूनियर डिवीजन,मेडिकल कॉलेज असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती,असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर भर्ती जैसी परीक्षाएं शामिल बताई गई हैं।

गिरफ्तारी के बाद क्यों बढ़ी राजनीतिक हलचल?

एल. खियांग्ते की गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है जब झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं को लेकर छात्र आंदोलन कर रहे हैं। रांची में बड़ी संख्या में छात्र विधानसभा घेराव के लिए मार्च कर चुके हैं और परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की जांच तथा जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।ऐसे में पूर्व JPSC चेयरमैन की गिरफ्तारी ने पूरे विवाद को नया मोड़ दे दिया है। हालांकि, जांच अभी जारी है और किसी भी आरोपी की अंतिम कानूनी जिम्मेदारी अदालत में आरोप साबित होने के बाद ही तय होगी।