प्रभाकर मिश्रा
आप हिन्दू मुस्लिम करिए, उधर अरावली की पहाड़ियों को सरकार कटवाने जा रही है काहे? काहे कि धन्नासेठों का हुक्म है।अरावली की पहाड़ियां भारत की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है, जो चार राज्यों राजस्थान, हरियाणा, गुजरात और दिल्ली तक फैली हुई है। यह पूरा क्षेत्र खनिज संसाधनों से बहुत समृद्ध है और यहां कई कीमती चीजें पाई जाती हैं। उसी पर देश के धन्नासेठों की नजर है। दरअसल अरावली की पहाड़ियों में सोने के भंडार मौजूद हैं, जावर जैसे क्षेत्रों में लेड-जिंक के साथ चांदी के पाए जाते हैं तांबा का तो प्राचीन काल से खनन होता रहा है।
जिंक और लेड बड़े पैमाने पर उपलब्ध हैं इसीलिए जावर माइंस प्रसिद्ध हैं। टंगस्टन ,ग्रेफाइट, लिथियम और रेयर अर्थ एलिमेंट्स के साथ साथ विश्व प्रसिद्ध मकराना मार्बल , चूना पत्थर , बलुआ पत्थर ,और ग्रेनाइट के साथ साथ थोरियम, यूरेनियम जैसे रेडियोएक्टिव खनिज भी हैं।
विज्ञापन

अरावली की पहाड़ियों में 70 से अधिक प्रकार के खनिज पाए जाते हैं, जिनमें से कई का व्यावसायिक खनन होता है और इसी कारण इसके अवैध खनन और पर्यावरण क्षति के कारण सुप्रीम कोर्ट ने कई क्षेत्रों में खनन पर प्रतिबंध लगाया हुआ है, ताकि यह संरक्षित रहे। मगर अब नियम बदल कर उच्चतम न्यायालय से आदेश भी ले लिया गया है और चारों राज्यों में मौजूद 692 किमी की पर्वत श्रृंखला के लिए नया नियम बनाया गया है और अब केवल वह भू-आकृतियां जो स्थानीय सतह से 100 मीटर या अधिक ऊंची हों उसे ही "अरावली हिल" माना जाएगा।
विज्ञापन

इस नियम से लगभग 96% पहाड़ खनन के बाद ग़ायब हो जाएंगे जिस पर हज़ारों मंदिर मौजूद हैं जो खत्म कर दिए जाएंगे और धन्नासेठों के जेब भरे जाएंगे...। ध्यान दीजिए कि पहाड़ों को देवस्थान माना जाता है, लेकिन हिन्दू मंदिरों या देवी देवताओं का जितना अपमान मोदी सरकार ने पिछले ग्यारह सालों में किया है उतना शायद औरंगजेब ने भी नहीं किया था...।
(डिस्क्लेमर : यह लेखक के अपने विचार हैं इस लेख से कलम लोक संस्था का सहमत होना ज़रूरी है)
