नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत के आर्थिक आँकड़ों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर चिंता जताई है। IMF की ताज़ा डेटा एडीक्वेसी असेसमेंट रिपोर्ट में भारत को राष्ट्रीय खातों और सरकारी वित्तीय आँकड़ों के मामले में ‘C’ ग्रेड दिया गया है। इस रेटिंग के बाद भारत के GDP और अन्य प्रमुख आर्थिक आँकड़ों की विश्वसनीयता को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

IMF का कहना है कि भारत में GDP की गणना में इस्तेमाल की जा रही पद्धति, आधार वर्ष और डेटा कवरेज में कई तकनीकी कमियां हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि अनौपचारिक क्षेत्र के सही और व्यापक आँकड़े शामिल न होने से वास्तविक आर्थिक स्थिति का पूरा आकलन करना कठिन हो जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस रिपोर्ट से वैश्विक निवेशकों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के बीच भारत के आर्थिक डेटा को लेकर संदेह बढ़ सकता है। हालांकि, IMF ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह टिप्पणी भारत की आर्थिक वृद्धि पर नहीं, बल्कि आँकड़ों की गुणवत्ता और पद्धति पर है।

दिलचस्प बात यह है कि इसी रिपोर्ट में IMF ने भारत की आर्थिक विकास दर के अनुमान को सकारात्मक बनाए रखा है, जिससे संकेत मिलता है कि अर्थव्यवस्था की गति मजबूत है, लेकिन आँकड़ों की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को और बेहतर करने की जरूरत है।

वहीं, सरकार की ओर से कहा गया है कि IMF की आपत्तियाँ तकनीकी प्रकृति की हैं और भारत जल्द ही नए आधार वर्ष के साथ GDP श्रृंखला को अपडेट करने की दिशा में काम कर रहा है। इसके बावजूद, IMF की यह टिप्पणी मोदी सरकार के लिए राजनीतिक और आर्थिक रूप से एक बड़ा झटका मानी जा रही है।