ere | Source: ereपटना। गंडक नदी में आए अभूतपूर्व जलस्राव के दौरान तटबंधों की सुरक्षा और आपात स्थिति से निपटने में कथित लापरवाही अब इंजीनियरों पर भारी पड़ गई है। बिहार के जल संसाधन विभाग ने मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए कुल आठ अभियंताओं के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई शुरू करने का फैसला किया है। इनमें सात अभियंताओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि मुजफ्फरपुर के मुख्य अभियंता के खिलाफ भी विभागीय कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया गया है।

गंडक में पानी ने तोड़े पुराने रिकॉर्ड, कई जगह तटबंध हुए क्षतिग्रस्त

जल संसाधन विभाग के अनुसार नेपाल और उत्तर प्रदेश में हुई भारी बारिश के बाद गंडक नदी में असाधारण मात्रा में पानी आया। नेपाल के देवघाट में गंडक का जलस्तर अपने पुराने सर्वोच्च स्तर को पार करते हुए नए रिकॉर्ड तक पहुंच गया। बिहार में भी बगहा, डुमरियाघाट, रेवाघाट और लालगंज में नदी का जलस्तर पुराने उच्चतम स्तर से ऊपर चला गया।

इस दौरान गंडक के तटबंधों पर पानी का दबाव बढ़ा और कई स्थानों पर तटबंध क्षतिग्रस्त हुए। ऐसे हालात में विभाग ने तटबंधों की तत्काल सुरक्षा और क्षतिग्रस्त हिस्सों को सुरक्षित करने के लिए आकस्मिक कार्य योजना के तहत कार्रवाई शुरू की थी।

बाढ़ का पानी घटा, लेकिन लापरवाही पर शुरू हुआ बड़ा एक्शन

अब गंडक नदी का जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है, लेकिन बाढ़ के दौरान तटबंधों की सुरक्षा में बरती गई कथित लापरवाही को लेकर विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभागीय आकलन में सामने आया कि कुछ स्थानीय अभियंताओं ने आकस्मिक स्थिति में अपेक्षित तेजी से काम नहीं किया।

जांच में यह भी पाया गया कि तटबंध क्षतिग्रस्त होने के बाद ब्रीच स्थल पर मौजूद रहकर उपलब्ध सामग्री और श्रमबल की मदद से कटाव वाले हिस्से को सुरक्षित करने के बजाय कुछ अभियंता वहां से हट गए। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों को तत्काल जुटाने में भी कमी पाई गई।

सामग्री और अतिरिक्त इंजीनियर भेजे गए, फिर भी काम में रही सुस्ती

विभाग के मुताबिक, पटना स्थित मुख्यालय के गोदाम और दूसरे जिलों से बाढ़ नियंत्रण के लिए जरूरी सामग्री भेजी गई थी। इसके साथ ही अतिरिक्त अभियंताओं की भी प्रतिनियुक्ति की गई थी। इसके बावजूद आकस्मिक कार्य योजना को मौके पर प्रभावी तरीके से लागू करने में शिथिलता बरते जाने की बात सामने आई।

विभागीय जांच में इसे गंभीरता से लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, बाढ़ जैसी आपदाजन्य स्थिति में तटबंधों की सुरक्षा और क्षतिग्रस्त हिस्सों को तत्काल सुरक्षित करना बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे समय में प्रतिक्रिया में देरी से स्थिति और गंभीर हो सकती है।

स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों से समन्वय की भी कमी

विभागीय आकलन में स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों के साथ आवश्यक समन्वय का अभाव भी सामने आया। तटबंधों की स्थिति और राहत-बचाव से जुड़े काम को लेकर स्थानीय स्तर पर पर्याप्त तालमेल नहीं होने की बात कही गई।

इसको लेकर कुछ अभियंताओं के खिलाफ स्थानीय स्तर पर भारी जनाक्रोश की स्थिति भी बनी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि आपदाजन्य परिस्थितियों में अधिकारियों और अभियंताओं की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में कार्य के प्रति लापरवाही को गंभीर माना जाएगा।

रेवाघाट में पानी 177 सेंटीमीटर नीचे, लालगंज में अभी खतरे से ऊपर

गंडक के जलस्तर में अब तेजी से गिरावट दर्ज की जा रही है। सारण के रेवाघाट में नदी का जलस्तर अपने उच्चतम स्तर से 177 सेंटीमीटर नीचे आ चुका है और खतरे के निशान से 50 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया है। इसके साथ ही यहां स्थिति सामान्य होने लगी है।

वहीं वैशाली के लालगंज में नदी का जलस्तर अपने नए उच्चतम स्तर से 130 सेंटीमीटर नीचे आया है, लेकिन अभी भी यह खतरे के निशान से 52 सेंटीमीटर ऊपर है। विभाग के अनुसार लालगंज में भी पानी तेजी से घट रहा है और अगले 24 घंटे में जलस्तर के खतरे के निशान से नीचे आने की संभावना है।

तटबंधों पर फिलहाल पानी का दबाव नहीं

जल संसाधन विभाग के अनुसार वर्तमान में तटबंधों पर नदी के जलस्तर का दबाव नहीं है। तटबंधों में सीपेज और पाइपिंग की समस्या भी फिलहाल नहीं बताई गई है। जिन स्थानों पर तटबंध क्षतिग्रस्त हुए हैं, वहां बाढ़ नियंत्रण से जुड़ी आवश्यक सामग्री पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराई गई है।

विभाग के अनुसार ब्रीच स्थलों पर कट-एंड को सुरक्षित करने और टैगिंग का काम जारी है। अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने क्षतिग्रस्त तटबंधों का तत्काल स्थल निरीक्षण कर स्थिति का आकलन भी किया था।

जांच के बाद सात अभियंता निलंबित

विभागीय कार्रवाई के तहत सात अभियंताओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। इनमें छपरा और गोपालगंज में तैनात कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता और कनीय अभियंता शामिल हैं।

निलंबित अभियंताओं में संतोष कुमार प्रभाकर, कार्यपालक अभियंता, छपरा; मो. साजिद इकबाल, कार्यपालक अभियंता, गोपालगंज; सुनील कुमार, सहायक अभियंता, छपरा; विनोद कुमार, सहायक अभियंता, छपरा; मो. जावेद अंसारी, सहायक अभियंता, गोपालगंज; चंद्रशेखर कुमार, कनीय अभियंता, छपरा; और विकास कुमार, कनीय अभियंता, गोपालगंज शामिल हैं।

इन सभी के खिलाफ निलंबन के साथ विभागीय कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया गया है।

मुख्य अभियंता पर भी विभागीय कार्रवाई का निर्देश

मामले में मुजफ्फरपुर के मुख्य अभियंता कुमार मनोज गुप्ता के खिलाफ भी विभागीय कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया गया है। उन पर चंपारण तटबंध के क्षतिग्रस्त होने और उसके बाद आपात स्थिति में की जाने वाली कार्रवाई में शिथिलता एवं लापरवाही बरतने के आरोप हैं।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि आपदाजन्य परिस्थितियों में काम के प्रति किसी भी प्रकार की लापरवाही को स्वीकार नहीं किया जाएगा। तटबंधों की सुरक्षा, बाढ़ नियंत्रण और आकस्मिक परिस्थितियों में तत्काल प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना विभागीय अधिकारियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

बाढ़ के बाद अब जिम्मेदारी तय करने की कवायद

गंडक में रिकॉर्ड जलस्राव के बाद पैदा हुई स्थिति से निपटने के दौरान जिन स्तरों पर लापरवाही सामने आई है, विभाग ने उन पर कार्रवाई शुरू कर दी है। एक ओर नदी का जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है और क्षतिग्रस्त तटबंधों को सुरक्षित करने का काम जारी है, वहीं दूसरी ओर विभागीय कार्रवाई के जरिए जिम्मेदारी तय की जा रही है।