ere | Source: erreGold-Silver Price Crash: सोमवार, 12 अक्टूबर को वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। सोना 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के अहम स्तर से नीचे फिसल गया, जबकि चांदी भी गिरकर करीब 2.23 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। बाजार में इस गिरावट के पीछे खुदरा महंगाई दर में बढ़ोतरी और ब्याज दरों को लेकर बनी चिंता को प्रमुख वजह बताया जा रहा है।

सोने की कीमत में एक दिन में करीब 2,000/- की गिरावट

सोमवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने की कीमतों में गिरावट का सिलसिला शाम तक तेज हो गया। कारोबार के दौरान सोना एक प्रतिशत से अधिक टूटकर करीब 1,49,159 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इस तरह पिछले बंद भाव के मुकाबले सोने की कीमत में करीब 2,000 रुपये तक की कमी दर्ज की गई। कारोबार की शुरुआत में भी सोने का भाव कमजोर रहा था। सोमवार सुबह सोना करीब 1,443 रुपये गिरकर 1,50,056 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला था। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में इसका भाव 1,51,499 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। सोने की कीमतों में आई इस गिरावट से उन खरीदारों को राहत मिल सकती है, जो त्योहारों और शादी-विवाह के मौसम में आभूषण खरीदने की योजना बना रहे हैं। हालांकि, वायदा बाजार के भाव और स्थानीय सर्राफा दुकानों पर मिलने वाली कीमतों में अंतर हो सकता है। अंतिम कीमत में शुद्धता, मेकिंग चार्ज, जीएसटी और स्थानीय बाजार की स्थितियों का भी असर पड़ता है।

चांदी भी फिसली, एक किलो का भाव 2.23 लाख के आसपास

सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी दबाव देखने को मिला। सोमवार देर शाम चांदी का वायदा भाव करीब 2,500 रुपये प्रति किलोग्राम तक गिरकर लगभग 2,23,000 रुपये के स्तर पर आ गया। कारोबार की शुरुआत में चांदी की कीमत में करीब 1,400 रुपये की गिरावट दर्ज की गई थी। चांदी के बाजार में आई यह कमजोरी इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि इसी साल जनवरी में इसके वायदा भाव ने 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम का ऐतिहासिक उच्च स्तर छुआ था। सोमवार के भाव के हिसाब से चांदी अपने उस रिकॉर्ड स्तर से करीब 1.97 लाख रुपये नीचे आ चुकी थी। चांदी की कीमतों पर निवेशकों की मांग के साथ-साथ औद्योगिक खपत का भी प्रभाव पड़ता है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर ऊर्जा और दूसरे औद्योगिक क्षेत्रों में चांदी का इस्तेमाल होता है। ऐसे में औद्योगिक मांग को लेकर चिंता बढ़ने पर इसकी कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।

महंगाई के आंकड़ों ने क्यों बढ़ाई सोने-चांदी की चिंता?

सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट के पीछे खुदरा महंगाई दर में बढ़ोतरी को एक प्रमुख कारण बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर में भारत की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि अगस्त में यह 4.82 प्रतिशत दर्ज की गई थी। सितंबर का आंकड़ा बाजार के अनुमानों से अधिक बताया गया है। महंगाई बढ़ने पर केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती को टाल सकते हैं या दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकते हैं। ऐसी स्थिति में बॉन्ड और बैंक जमा जैसे ब्याज देने वाले निवेश विकल्प निवेशकों को अधिक आकर्षक लग सकते हैं। सोना और चांदी नियमित ब्याज या लाभांश नहीं देते। इसलिए जब ब्याज देने वाले विकल्पों पर बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ती है, तो कुछ निवेशक कीमती धातुओं से पैसा निकालकर दूसरे साधनों में लगा सकते हैं। इससे सोने-चांदी की मांग और कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। हालांकि, केवल महंगाई के आंकड़े ही इन धातुओं की कीमत तय नहीं करते। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, केंद्रीय बैंकों की नीतियां, निवेशकों की मांग और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी भाव में उतार-चढ़ाव ला सकती हैं।

डेढ़ महीने से सोने में जारी है उतार-चढ़ाव

पिछले करीब डेढ़ महीने के दौरान सोने की कीमतों में लगातार बदलाव देखने को मिला है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 31 अगस्त को एमसीएक्स पर 10 ग्राम सोने का भाव 1,55,484 रुपये था। इसके बाद 30 सितंबर तक यह गिरकर 1,49,036 रुपये पर आ गया। अक्टूबर की शुरुआत में त्योहारों से पहले कीमतों में कुछ सुधार देखने को मिला था। लेकिन सोमवार को महंगाई के ताजा आंकड़ों के बाद सोने पर फिर दबाव बढ़ गया और इसका भाव 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे चला गया। इस उतार-चढ़ाव से खरीदारों और निवेशकों के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या मौजूदा गिरावट आगे भी जारी रहेगी या कीमतों में दोबारा तेजी आएगी। इसका जवाब महंगाई के अगले आंकड़ों, ब्याज दरों को लेकर केंद्रीय बैंकों के संकेतों और वैश्विक बाजार की दिशा पर निर्भर करेगा।

त्योहारों और शादी के मौसम में खरीदार क्या करें?

सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट के बावजूद खरीदारी का फैसला केवल एक दिन के भाव को देखकर करना सही नहीं होगा। आभूषण खरीदने वालों को अपने बजट, जरूरत और स्थानीय बाजार में उपलब्ध कीमतों की तुलना करनी चाहिए। अलग-अलग दुकानों पर मेकिंग चार्ज और अन्य शुल्क भी अलग हो सकते हैं। यदि खरीदारी जरूरी है, तो खरीदार कुल खर्च का हिसाब लगाकर फैसला कर सकते हैं। वहीं, निवेश के उद्देश्य से सोना या चांदी खरीदने वाले लोगों के लिए एक साथ पूरी रकम लगाने के बजाय चरणबद्ध खरीदारी पर विचार करना एक विकल्प हो सकता है। लेकिन इसमें भी कीमतों में आगे गिरावट की संभावना और निवेश से जुड़े जोखिम बने रहते हैं। ध्यान रखें कि कीमतों में गिरावट भविष्य में तेजी आने की गारंटी नहीं होती। इसी तरह, मौजूदा कमजोरी का मतलब यह भी नहीं है कि भाव लगातार गिरते ही रहेंगे।

आगे सोने-चांदी के भाव किस दिशा में जा सकते हैं?

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यदि महंगाई ऊंचे स्तर पर बनी रहती है और केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में राहत देने के स्पष्ट संकेत नहीं देते, तो सोने-चांदी की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। दूसरी ओर, वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने या निवेशकों की सुरक्षित निवेश विकल्पों में दिलचस्पी बढ़ने पर इन धातुओं को सहारा भी मिल सकता है। फिलहाल सोमवार की गिरावट ने कीमती धातुओं के बाजार में हलचल बढ़ा दी है। सोना करीब 1,49,159 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी लगभग 2.23 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गई। आने वाले कारोबारी सत्रों में महंगाई, ब्याज दरों और अंतरराष्ट्रीय बाजार की चाल पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।