erer | Source: ererनई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने छात्र आंदोलनों से जुड़े युवाओं से मुलाकात के बाद केंद्र सरकार, पुलिस प्रशासन और शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे छात्रों के साथ मारपीट की गई, उन्हें धमकाया गया और उनके परिवारों पर भी दबाव बनाया गया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि एक 15 वर्षीय बच्ची से कथित तौर पर जबरन माफी भी मंगवाई गई। उनके इन बयानों के बाद राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है।

छात्र आंदोलन के प्रतिनिधियों से की खुली बातचीत

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विभिन्न छात्र संगठनों के हालिया प्रदर्शनों के बाद राहुल गांधी ने देश के अलग-अलग राज्यों से आए युवा प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान छात्रों ने अपने अनुभव साझा किए। इसके बाद राहुल गांधी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि इन युवाओं ने जिस साहस के साथ अपनी बात रखी, वह सराहनीय है।

उन्होंने कहा कि उन्हें इन छात्रों और ऐसे हजारों युवाओं पर गर्व है, जो संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और देश के भविष्य की रक्षा के लिए अपनी आवाज उठा रहे हैं।

शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक को लेकर सरकार पर निशाना

राहुल गांधी ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है और पेपर लीक जैसी घटनाओं ने छात्रों का भविष्य प्रभावित किया है। उनका कहना था कि यदि छात्र इन समस्याओं के खिलाफ आवाज उठाते हैं तो इसे अपराध नहीं माना जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, "एक ऐसी शिक्षा प्रणाली की शिकायत करना जो दोषपूर्ण है, ढह रही है और पूरी तरह निकम्मी साबित हो चुकी है, कोई अपराध नहीं है। अगर कुछ बदलने की जरूरत है, तो वह यह सिस्टम है। युवा केवल सुधार की मांग कर रहे हैं।"

छात्रों के साथ मारपीट और धमकी के लगाए आरोप

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों को पुलिस और असामाजिक तत्वों की ओर से प्रताड़ित किया गया। उन्होंने कहा कि कई छात्रों ने उन्हें बताया कि उनके साथ मारपीट की गई, उन्हें धमकियां दी गईं और उनके परिवारों पर भी दबाव बनाया गया।

उन्होंने कहा कि छात्र किसी प्रकार की हिंसा नहीं कर रहे थे, फिर भी उनके खिलाफ लाठियां चलाई गईं। राहुल गांधी के अनुसार, यह लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है।

'15 साल की बच्ची से जबरन माफी मंगवाना पूरी तरह बकवास'

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन में शामिल एक 15 वर्षीय बच्ची से कथित तौर पर जबरन माफी मंगवाई गई। उन्होंने कहा कि पहले छात्रों पर दबाव बनाया गया, फिर उनके घरों पर गुंडे भेजे गए और बाद में नाबालिग बच्ची से माफी मांगने के लिए मजबूर किया गया।

उन्होंने कहा, "पहले छात्रों पर दबाव बनाना, उनके घरों पर गुंडे भेजना, 15 साल की एक बच्ची से जबरन माफी की मांग करना और फिर उस माफी को स्वीकार करना पूरी तरह बकवास है। हम इसे बिल्कुल स्वीकार नहीं करते।"

रिया अहिर भी रहीं मौजूद

राहुल गांधी की इस मुलाकात में कुछ प्रदर्शनकारी छात्र भी मौजूद रहे। इनमें रिया अहिर भी शामिल थीं, जो मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रदर्शन के दौरान पुलिस वैन के सामने खड़ी हो गई थीं। उस दौरान उनकी तस्वीर सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर भी साधा निशाना

राहुल गांधी ने मीडिया से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो युवा आज मीडिया के सामने खड़े होकर अपनी बात रख रहे हैं, वे साहस का परिचय दे रहे हैं।

उन्होंने कहा, "ये युवा लोग भारत की प्रेस के सामने यहां खड़े हैं। लेकिन अमित शाह और प्रधानमंत्री में यहां खड़े होने का साहस नहीं है।"

राहुल गांधी ने आगे कहा कि इन युवाओं के लिए सार्वजनिक रूप से सामने आना आसान नहीं है, क्योंकि वे उत्पीड़न, हिंसा और दबाव का सामना कर रहे हैं। इसके बावजूद वे अपने विचार स्पष्ट रूप से रख रहे हैं और यही देश की सबसे बड़ी ताकत है।

पेलेट गन को लेकर भी लगाए गंभीर आरोप

कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन के दौरान एक युवती पर पेलेट गन से गोली चलाई गई। उन्होंने इस घटना के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि इस मामले में केवल दो संभावनाएं हैं।

राहुल गांधी ने कहा कि यदि गृह मंत्री को इस कार्रवाई की जानकारी नहीं थी तो यह प्रशासनिक विफलता है, और यदि उनकी जानकारी में यह कार्रवाई हुई है तो इसकी जिम्मेदारी भी उन्हीं की बनती है। उन्होंने कहा कि दोनों ही स्थितियों में जवाबदेही तय होनी चाहिए।

राजनीतिक बहस हुई तेज

राहुल गांधी के इन आरोपों के बाद छात्र आंदोलन, शिक्षा व्यवस्था, कानून-व्यवस्था और सरकार की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। पेपर लीक, शिक्षा सुधार और छात्रों के विरोध प्रदर्शनों को लेकर पहले से जारी राजनीतिक टकराव के बीच उनके बयान ने इस मुद्दे को फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है।