erere | Source: erereकाठमांडू: नेपाल में 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। कई इलाकों में मलबे के ढेर के बीच राहत और बचाव अभियान जारी है। जैसे-जैसे समय बीत रहा है, मलबे के नीचे दबे लोगों के जिंदा मिलने की उम्मीद भी कमजोर होती जा रही है। ऐसे कठिन हालात के बीच रसुवा जिले से सामने आई एक घटना ने हर किसी को हैरान कर दिया। स्याब्रूबेसी के पास तलाशी अभियान के दौरान बचावकर्मियों को मलबे के भीतर कुछ दबा हुआ नजर आया। शुरुआत में उन्हें लगा कि वहां कोई बिल्ली का बच्चा फंसा हुआ है, लेकिन जब मलबा हटाया गया तो उसके अंदर से पांच साल की बच्ची जिंदा निकली।

मलबे में मिली जिंदगी की उम्मीद

बचावकर्मियों ने जिस जगह कुछ दबा हुआ देखा, वहां सावधानी से मलबा हटाने का काम शुरू किया। टीम को शुरुआती तौर पर लगा था कि मलबे के नीचे कोई बिल्ली का बच्चा हो सकता है। हालांकि, जैसे-जैसे मिट्टी और कीचड़ हटाया गया, वहां एक बच्ची के होने का पता चला। यह देखकर बचावकर्मियों की चिंता के साथ राहत भी बढ़ गई। बच्ची जिंदा थी और उसे बाहर निकालने के लिए टीम ने तत्काल रेस्क्यू अभियान शुरू कर दिया।

जानकारी के मुताबिक बच्ची का नाम मानसी है। वह रसुवा जिले में स्याब्रूबेसी के पास मलबे में दबी मिली। उसके शरीर पर मिट्टी और कीचड़ जमा था और वह बेहद बदहाल हालत में थी। इसके बावजूद उसके जिंदा होने की खबर ने पूरे बचाव अभियान के बीच उम्मीद की एक किरण पैदा कर दी।

करीब दो घंटे तक चला बचाव अभियान

नेपाल के आर्म्ड पुलिस फोर्स की अधिकारी संजू खत्री ने इस रेस्क्यू अभियान के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इलाके में बचाव टीमों ने तलाशी अभियान शुरू किया था। इसी दौरान मलबे को हटाते समय टीम की नजर बच्ची पर पड़ी। बच्ची को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बेहद सावधानी से मलबा हटाया गया।

मानसी को मलबे से बाहर निकालने में करीब दो घंटे का समय लगा। रेस्क्यू के दौरान सामने आया कि बच्ची मिट्टी और कीचड़ से पूरी तरह सनी हुई थी। उसकी हालत बेहद खराब दिखाई दे रही थी, लेकिन वह जिंदा थी। बचावकर्मियों के लिए यह किसी बड़ी राहत से कम नहीं था।

खराब मौसम ने हेलीकॉप्टर से अस्पताल पहुंचाने में डाली बाधा

मलबे से बच्ची को बाहर निकालने के बाद बचाव टीम ने उसे जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर की मांग की। टीम की कोशिश थी कि बच्ची को हवाई मार्ग से तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। हालांकि, खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर से उसे एयरलिफ्ट करना संभव नहीं हो सका।

इसके बाद बचावकर्मियों ने मानसी को सेना के रेस्क्यू कैंप पहुंचाया। वहां उसे प्राथमिक उपचार दिया गया। बच्ची को पानी आदि दिया गया और उसकी स्थिति पर निगरानी रखी गई। कुछ देर बाद उसे होश आया। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, बच्ची के स्वास्थ्य में सुधार के लिए उसे उबले हुए चावल का पानी दिया जा रहा था।

हादसे के सदमे में थी बच्ची

बाढ़ और मलबे में फंसने की घटना ने पांच साल की मानसी को गहरे सदमे में डाल दिया था। बचावकर्मियों ने उसकी देखभाल की और उसकी स्थिति को संभालने के बाद उसे काठमांडू भेजने की व्यवस्था की गई। बाद में मानसी को काठमांडू के टीचिंग हॉस्पिटल के पीडियाट्रिक इमरजेंसी डिपार्टमेंट में ले जाया गया।

अस्पताल के एक अधिकारी ने बताया कि बच्ची की स्थिति फिलहाल स्थिर है। रविवार को अस्पताल की ओर से यह भी बताया गया कि मानसी तेजी से ठीक हो रही है। गंभीर प्राकृतिक आपदा के बीच बच्ची का जिंदा बचना उसके परिवार के लिए बड़ी राहत है।

माता-पिता से मिलाया गया बच्ची को

मलबे से सुरक्षित निकाले जाने के बाद मानसी को उसके माता-पिता से मिला दिया गया। इसके बाद बेहतर इलाज के लिए उसे काठमांडू लाया गया। अस्पताल में उसका उपचार जारी है और उसकी हालत स्थिर बताई गई है।

मानसी के बचाव की घटना ऐसे समय में सामने आई है जब नेपाल के कई प्रभावित इलाकों में बचाव दल मलबे और बाढ़ के बीच लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं। लगातार सामने आ रही मौतों और लापता लोगों की खबरों के बीच पांच साल की बच्ची का जिंदा मिलना बेहद राहत देने वाली घटना बन गई है।

अस्पतालों में घायलों के साथ अपनों को तलाश रहे परिवार

26 अगस्त को उत्तरी और मध्य नेपाल में आई अचानक बाढ़ के चार दिन बाद भी राहत और बचाव कार्य जारी है। अस्पतालों में घायलों का इलाज किया जा रहा है, जबकि बड़ी संख्या में शव भी रखे गए हैं। ऐसे में अस्पताल अब केवल इलाज की जगह नहीं रह गए हैं। बड़ी संख्या में परिवार अपने लापता रिश्तेदारों की तलाश के लिए भी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं।

त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में लापता लोगों के परिजन अपने रिश्तेदारों की तस्वीरें और उनसे जुड़ी दूसरी जानकारी लेकर पहुंच रहे हैं। परिवारों को उम्मीद है कि इन जानकारियों के आधार पर उनके लापता परिजनों के बारे में कोई सुराग मिल सकेगा।

शवों की पहचान में जुटी फॉरेंसिक टीमें

बाढ़ के बाद अलग-अलग इलाकों से बहकर आए शवों की पहचान करना भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। फॉरेंसिक टीमें शवों की पहचान करने के प्रयास में जुटी हैं। इस काम में परिवारों की ओर से उपलब्ध कराई जा रही तस्वीरों और अन्य जानकारी का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

नेपाल में बाढ़ की स्थिति ने बड़ी मानवीय त्रासदी का रूप ले लिया है। राहत शिविरों, अस्पतालों और प्रभावित इलाकों में लोग अपने परिजनों की जानकारी पाने के लिए परेशान हैं। इसी बीच बचाव दल लगातार मलबे को हटाकर लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं।

नेपाल बाढ़ में 700 से ज्यादा लोगों की मौत

रविवार तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार नेपाल में आई बाढ़ में मरने वालों की संख्या 700 के पार पहुंच गई थी। वहीं करीब 2,500 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने के कारण बचाव और खोज अभियान लगातार जारी है।

बाढ़ के कारण प्रभावित इलाकों में मलबा जमा है और राहतकर्मियों के सामने लोगों को तलाशने के साथ-साथ शवों की पहचान करने की भी चुनौती है। खराब मौसम भी बचाव कार्य में बाधा बन रहा है। इसके बावजूद विभिन्न टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार अभियान चला रही हैं।

तबाही के बीच मानसी की कहानी ने जगाई उम्मीद

नेपाल में जारी इस भीषण त्रासदी के बीच पांच साल की मानसी का मलबे से जिंदा मिलना बेहद भावुक और चौंकाने वाली घटना है। जिस जगह बचावकर्मियों को शुरुआत में एक बिल्ली के बच्चे के दबे होने का अंदेशा हुआ था, उसी मलबे के भीतर एक मासूम बच्ची जिंदगी के लिए जूझती मिली। करीब दो घंटे की मेहनत के बाद उसे बाहर निकालना राहत अभियान के बीच उम्मीद की बड़ी खबर बन गया।

मानसी को उसके माता-पिता से मिलाया जा चुका है और काठमांडू के टीचिंग हॉस्पिटल में उसका इलाज चल रहा है। अस्पताल के अनुसार उसकी स्थिति स्थिर है और वह तेजी से ठीक हो रही है। नेपाल में बाढ़ से हुई भारी तबाही और बड़ी संख्या में लापता लोगों के बीच मानसी का सुरक्षित बचना इस त्रासदी के बीच जिंदगी की एक ऐसी खबर है, जिसने राहत और बचाव अभियान से जुड़े लोगों को नई उम्मीद दी है।