सोशल मीडिया के दौर में चुनाव सिर्फ वोटों की लड़ाई नहीं, बल्कि सूचनाओं की विश्वसनीयता की भी परीक्षा बन चुके हैं। फेक न्यूज, भ्रामक वीडियो, एडिटेड तस्वीरें और अफवाहें चुनावी माहौल को प्रभावित करने की बड़ी चुनौती बन गई हैं। इसी खतरे को देखते हुए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने बड़ा कदम उठाया है। आयोग अब देशभर के 500 से अधिक अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण देगा, ताकि चुनाव से जुड़ी गलत सूचनाओं का तुरंत जवाब दिया जा सके और मतदाताओं तक सही एवं प्रमाणिक जानकारी समय पर पहुंचे। यह पहल आगामी विधानसभा चुनावों और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।फेक न्यूज पर चुनाव आयोग की सख्ती | फोटो: IANS

फेक न्यूज पर चुनाव आयोग की सख्ती | फोटो: IANS

फेक न्यूज से मुकाबले के लिए पहली बार इतने बड़े स्तर पर प्रशिक्षण

भारत निर्वाचन आयोग पहली बार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 500 से अधिक अधिकारियों के लिए विशेष क्षमता निर्माण (Capacity Building) कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। यह प्रशिक्षण नई दिल्ली में 3 और 8 जुलाई को आयोजित होगा, जिसमें मीडिया नोडल अधिकारी (MNO), सोशल मीडिया नोडल अधिकारी (SMNO), जिला जनसंपर्क अधिकारी तथा चुनावी संचार से जुड़े अन्य अधिकारी भाग लेंगे। इन अधिकारियों को यह सिखाया जाएगा कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों, भ्रामक खबरों और गलत सूचनाओं की पहचान कैसे की जाए और उनका तथ्यात्मक एवं कानूनी आधार पर तुरंत जवाब कैसे दिया जाए। आयोग का मानना है कि चुनाव के दौरान सही सूचना का समय पर प्रसार लोकतंत्र की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है।

SIR अभियान और आगामी चुनावों को लेकर बढ़ी जिम्मेदारी

चुनाव आयोग इस समय 16 राज्यों और दिल्ली, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, पंजाब, तेलंगाना तथा ओडिशा समेत कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) अभियान चला रहा है। इस अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना है, ताकि कोई भी पात्र मतदाता मतदान के अधिकार से वंचित न रहे। आयोग का मानना है कि इस प्रक्रिया के दौरान सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलने की आशंका अधिक रहती है। इसलिए प्रशिक्षित अधिकारी मतदाताओं की शंकाओं का समाधान करेंगे और किसी भी भ्रामक सूचना का तत्काल खंडन कर सही जानकारी उपलब्ध कराएंगे।

कानून, सोशल मीडिया और संचार कौशल पर होगा विशेष फोकस

प्रशिक्षण कार्यक्रम में अधिकारियों को केवल सोशल मीडिया प्रबंधन ही नहीं, बल्कि चुनावी कानूनों की भी विस्तृत जानकारी दी जाएगी। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of the People Act), निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देश, चुनावी आचार संहिता और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सूचना प्रबंधन जैसे विषय प्रशिक्षण का अहम हिस्सा होंगे। अधिकारियों को यह भी बताया जाएगा कि जनता के साथ संवाद करते समय भाषा सरल, स्पष्ट और तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए, ताकि किसी प्रकार का भ्रम पैदा न हो। आयोग का उद्देश्य ऐसे संचार तंत्र का निर्माण करना है, जो चुनावी प्रक्रिया के दौरान पारदर्शिता और भरोसा दोनों को मजबूत करे।

मुख्य चुनाव आयुक्त का संदेश-तथ्यों पर आधारित हो हर संवाद

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए स्पष्ट कहा कि चुनाव आयोग से जुड़ी हर जानकारी समय पर, तथ्यात्मक और कानून के अनुरूप जनता तक पहुंचनी चाहिए। वहीं चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने अधिकारियों की भूमिका को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि आयोग के नियमों और निर्देशों को आम लोगों तक बेहद सरल भाषा में पहुंचाना उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डिजिटल युग में चुनावों को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए केवल मतदान प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि सूचना तंत्र की विश्वसनीयता भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे में चुनाव आयोग की यह पहल आगामी चुनावों में फेक न्यूज और डिजिटल दुष्प्रचार पर प्रभावी नियंत्रण की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।