सानिया खातून:

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में ब्लड प्रेशर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। कुछ लोगों का ब्लड प्रेशर जरूरत से ज्यादा बढ़ जाता है, जिसे हाई बीपी (High Blood Pressure) कहा जाता है, जबकि कुछ लोगों का ब्लड प्रेशर सामान्य से कम हो जाता है, जिसे लो बीपी (Low Blood Pressure) कहते हैं। दोनों ही स्थितियां स्वास्थ्य के लिए परेशानी का कारण बन सकती हैं। ऐसे में इनके लक्षण, कारण और बचाव के तरीकों को जानना बेहद जरूरी है।

हाई बीपी की स्थिति तब होती है जब धमनियों में रक्त का दबाव सामान्य से अधिक हो जाता है। आमतौर पर 140/90 mmHg या इससे अधिक ब्लड प्रेशर को हाई बीपी माना जाता है। इसके लक्षणों में सिरदर्द, चक्कर आना, बेचैनी, सांस फूलना, सीने में दर्द और धुंधला दिखाई देना शामिल हो सकता है। हालांकि कई बार हाई बीपी के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते, इसलिए इसे "साइलेंट किलर" भी कहा जाता है।

वहीं लो बीपी तब होता है जब ब्लड प्रेशर 90/60 mmHg से कम हो जाता है। लो बीपी होने पर व्यक्ति को कमजोरी, चक्कर आना, थकान, धुंधला दिखना, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी और कभी-कभी बेहोशी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गर्मी के मौसम में या शरीर में पानी की कमी होने पर लो बीपी की समस्या ज्यादा देखने को मिलती है।

हाई और लो बीपी की पहचान करने का सबसे आसान तरीका नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच कराना है। अगर बार-बार सिरदर्द, चक्कर या कमजोरी महसूस हो रही है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच कराने से समस्या का पता चल सकता है और सही इलाज शुरू किया जा सकता है।

हाई बीपी के मरीजों को नमक कम खाना चाहिए, नियमित व्यायाम करना चाहिए और तनाव से दूर रहने की कोशिश करनी चाहिए। धूम्रपान और शराब का सेवन भी सीमित या बंद करना फायदेमंद माना जाता है। वहीं लो बीपी वाले लोगों को पर्याप्त पानी पीना चाहिए, संतुलित आहार लेना चाहिए और लंबे समय तक खाली पेट नहीं रहना चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना सबसे जरूरी है। नियमित जांच, संतुलित खानपान और डॉक्टर की सलाह का पालन करके हाई और लो बीपी दोनों समस्याओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।