कंगना रनौत स्टारर फिल्म भारत भाग्य विधाता शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। 26/11 मुंबई आतंकी हमले की सच्ची घटनाओं पर आधारित इस फिल्म में कंगना ने कामा अस्पताल की एक नर्स का किरदार निभाया है, जो अपनी जान की परवाह किए बिना अस्पताल में मौजूद मरीजों की सुरक्षा के लिए आतंकियों का सामना करती है। फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है और कंगना के अभिनय की भी खूब सराहना हो रही है। इसी बीच एक खास बातचीत में कंगना ने फिल्म के नाम, इसकी कहानी और अपने जीवन के भाग्य विधाता को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति की जिंदगी में एक ऐसा इंसान जरूर होता है, जो उसके जीवन की दिशा बदल देता है। कंगना के मुताबिक, राजनीति और जीवन के उनके ऐसे ही भाग्य विधाता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं।
जॉन अब्राहम की वजह से मिला ‘भारत भाग्य विधाता’ नाम
कंगना रनौत ने बातचीत के दौरान खुलासा किया कि फिल्म का नाम शुरुआत में नर्सेज ऑफ कामा रखा गया था। हालांकि बाद में इसे बदलकर भारत भाग्य विधाता कर दिया गया। कंगना ने बताया कि इस नाम के अधिकार अभिनेता जॉन अब्राहम के पास थे। जब उन्हें इस टाइटल की जरूरत पड़ी तो जॉन अब्राहम ने बिना किसी शर्त और बिना किसी विवाद के यह नाम उनकी फिल्म को दे दिया। कंगना ने इसके लिए जॉन का विशेष रूप से धन्यवाद भी किया।
उन्होंने कहा कि यह फिल्म सिर्फ एक नाम की वजह से खास नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा भाव छिपा हुआ है। भारत भाग्य विधाता शीर्षक उन लोगों को समर्पित है जो देश और समाज के लिए बिना किसी पहचान या सम्मान की अपेक्षा के अपना कर्तव्य निभाते हैं। कंगना के अनुसार, ऐसे लोग ही वास्तव में देश के भाग्य विधाता होते हैं।
26/11 हमले की वह रात जिसने पूरे देश को झकझोर दिया
26 नवंबर 2008 की रात भारत के इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक मानी जाती है। उस दिन मुंबई पर हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। आतंकियों ने एक साथ शहर के कई महत्वपूर्ण स्थानों को निशाना बनाया था। इनमें ताज महल पैलेस होटल, ओबेरॉय-ट्राइडेंट होटल, छत्रपति शिवाजी टर्मिनस रेलवे स्टेशन, लियोपोल्ड कैफे, नरीमन हाउस और कामा अस्पताल शामिल थे।
हालांकि 26/11 हमले पर पहले भी कई फिल्में और वेब सीरीज बनाई जा चुकी हैं, लेकिन कामा अस्पताल की नर्सों और कर्मचारियों की बहादुरी पर केंद्रित कहानी शायद ही कभी बड़े पर्दे पर दिखाई गई हो। भारत भाग्य विधाता इसी अनकही कहानी को दर्शकों के सामने लाती है।
कंगना ने बताया कि जिस तरह सेना, पुलिस और सुरक्षा बलों ने आतंकियों का डटकर सामना किया था, उसी तरह कामा अस्पताल की नर्सों और कर्मचारियों ने भी असाधारण साहस का परिचय दिया। अस्पताल में मौजूद स्टाफ ने अपनी जान जोखिम में डालकर करीब 400 लोगों की जान बचाई थी। इनमें कई गर्भवती महिलाएं भी शामिल थीं। फिल्म इन्हीं नायकों की बहादुरी और समर्पण को श्रद्धांजलि देती है।
हम इंपोर्टेंट नहीं हैं, लेकिन हमारा काम इंपोर्टेंट है
फिल्म की पूरी कहानी कामा अस्पताल के उन डॉक्टरों, नर्सों और कर्मचारियों के इर्द-गिर्द घूमती है, जिन्होंने आतंक के माहौल में भी अपना फर्ज निभाना नहीं छोड़ा। फिल्म का एक डायलॉग हम इंपोर्टेंट नहीं हैं, लेकिन हम जो करते हैं वो इंपोर्टेंट है, इसकी पूरी भावना को दर्शाता है।
यह संवाद सिर्फ फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि उन हजारों गुमनाम लोगों की सोच को भी सामने लाता है जो देश और समाज के लिए चुपचाप अपना योगदान देते हैं। फिल्म देशभक्ति को केवल हथियार उठाने या युद्ध लड़ने तक सीमित नहीं रखती, बल्कि यह दिखाती है कि अपने कर्तव्य को ईमानदारी से निभाना भी देश सेवा का एक बड़ा रूप है।
कंगना का मानना है कि समाज में कई ऐसे नायक मौजूद हैं, जिनकी कहानियां कभी सुर्खियां नहीं बन पातीं। भारत भाग्य विधाता उन लोगों को सम्मान देने का प्रयास है जिन्होंने संकट की घड़ी में दूसरों की जिंदगी बचाने को अपनी जिम्मेदारी समझा।
फिल्म को क्रिटिक्स से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है और कंगना के अभिनय की भी जमकर तारीफ हो रही है। अब देखना दिलचस्प होगा कि दर्शक इस भावनात्मक और प्रेरणादायक कहानी को बॉक्स ऑफिस पर कितना प्यार देते हैं। यह फिल्म न केवल 26/11 के दर्द को याद दिलाती है, बल्कि उन गुमनाम नायकों को भी सामने लाती है जिनकी बहादुरी ने उस भयावह रात में सैकड़ों जिंदगियां बचाई थीं।
