NEET पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों के जोरदार प्रदर्शन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने वाले धर्मेंद्र प्रधान अब नई राजनीतिक चर्चा के केंद्र में हैं। उनके इस्तीफे के बाद भारतीय जनता पार्टी में उनकी अगली जिम्मेदारी को लेकर अटकलों का दौर तेज हो गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और चुनावी रणनीतिकार माने जाने वाले प्रधान ने इस बीच कांग्रेस नेता जयराम रमेश से हुई बातचीत में अपने इरादे भी साफ कर दिए। उन्होंने कहा कि वह "स्ट्रीट फाइटर" हैं और संघर्ष से पीछे हटने वालों में नहीं हैं। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर है कि बीजेपी उन्हें आगे कौन-सी अहम जिम्मेदारी सौंपती है।
Dharmendra Pradhan: 'स्ट्रीट फाइटर हूं, एसी रूम का एक्टिविस्ट नहीं', इस्तीफे के बाद बीजेपी में धर्मेंद्र प्रधान की क्या होगी नई भूमिका?Source : Ndtv.com
संसद के गलियारे में हुई दिलचस्प बातचीत
शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे के बाद संसद भवन के गलियारे में कांग्रेस नेता जयराम रमेश उनसे मुलाकात करने पहुंचे। रमेश ने उनसे कहा, "इट हैपन्स" (ऐसा होता है)। इस पर धर्मेंद्र प्रधान ने तुरंत जवाब दिया, "नथिंग हैपन्ड" (कुछ नहीं हुआ)। इसके बाद उन्होंने कहा, "आई एम ए स्ट्रीट फाइटर, नॉट एन एसी रूम एक्टिविस्ट" यानी "मैं सड़क पर संघर्ष करने वाला नेता हूं, एसी कमरे में बैठने वाला एक्टिविस्ट नहीं।" प्रधान का यह बयान साफ संकेत देता है कि वह आगे भी सक्रिय राजनीति में बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।
संसद पहुंचने पर हुआ जोरदार स्वागत
शिक्षा मंत्री पद छोड़ने के बाद जब धर्मेंद्र प्रधान पहली बार संसद भवन पहुंचे तो एनडीए सांसदों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। किसी सांसद ने उन्हें पगड़ी पहनाई तो किसी ने अंगवस्त्र भेंट किया। पूरे समय प्रधान के चेहरे पर मुस्कान दिखाई दी। इस दौरान एक सांसद ने कहा कि यह शायद पहली बार है जब किसी केंद्रीय मंत्री ने अपने ऊपर व्यक्तिगत आरोप न होने के बावजूद पद से इस्तीफा दिया है।
चुनावी रणनीतिकार के रूप में मजबूत पहचान
धर्मेंद्र प्रधान लंबे समय से बीजेपी के सबसे भरोसेमंद चुनावी रणनीतिकारों में गिने जाते हैं। ओडिशा की राजनीति में उनकी मजबूत पकड़ के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी उन्होंने पार्टी के लिए कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं। हाल ही में बिहार विधानसभा चुनाव में उन्होंने प्रभारी के तौर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की भवानीपुर सीट पर शुभेंदु अधिकारी की जीत की रणनीति तैयार करने में भी उनकी अहम भूमिका मानी जाती है।
कई राज्यों में दिलाई चुनावी सफलता
2024 के लोकसभा चुनाव के बाद हरियाणा विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत में भी धर्मेंद्र प्रधान की अहम भूमिका रही। प्रभारी के तौर पर उन्होंने पार्टी को लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी दिलाने में योगदान दिया। इससे पहले उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और कर्नाटक समेत कई राज्यों में भी वह चुनाव प्रभारी रह चुके हैं और संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।
अब बीजेपी क्या फैसला करेगी?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि बीजेपी उन्हें आगे कौन-सी जिम्मेदारी देती है। संगठन और चुनाव प्रबंधन में उनके लंबे अनुभव को देखते हुए माना जा रहा है कि पार्टी उन्हें जल्द ही कोई अहम संगठनात्मक या राजनीतिक दायित्व सौंप सकती है। हालांकि अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व को करना है, लेकिन उनके हालिया बयान और सक्रिय तेवर यह संकेत जरूर देते हैं कि धर्मेंद्र प्रधान की राजनीतिक पारी अभी खत्म नहीं हुई है।
पार्टी ने जताया पूरा भरोसा
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी बीजेपी नेतृत्व ने उन्हें अकेला नहीं छोड़ा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उनसे मिलने उनके आवास पहुंचे। वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने शिक्षा क्षेत्र में उनके योगदान और सुधारों की सराहना की। पार्टी नेताओं का कहना है कि प्रधान का इस्तीफा उनकी राजनीतिक कमजोरी का नहीं, बल्कि जवाबदेही, त्याग और राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने का बड़ा उदाहरण है।
ओडिशा की राजनीति पर भी रहेगी नजर
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का असर ओडिशा बीजेपी के अंदरूनी समीकरणों पर भी देखने को मिल सकता है। जुएल ओराम के अलावा वह राज्य से दूसरे केंद्रीय कैबिनेट मंत्री थे। ओडिशा बीजेपी में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस्तीफे के बावजूद राज्य में उनका प्रभाव कम नहीं होगा। वर्ष 2014 से ओडिशा में बीजेपी के विस्तार और 2024 विधानसभा चुनाव में मिली सफलता में उनकी अहम भूमिका रही है। राज्य के 78 बीजेपी विधायकों में से अधिकांश और ओडिशा मंत्रिमंडल के करीब 40 प्रतिशत मंत्रियों को उनका करीबी माना जाता है।
सीएम और राष्ट्रीय अध्यक्ष की भी चर्चा
धर्मेंद्र प्रधान का नाम कभी ओडिशा के मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल था, लेकिन पार्टी ने यह जिम्मेदारी मोहन माझी को सौंपी। इसके बाद बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए भी उनके नाम की चर्चा हुई, हालांकि यह जिम्मेदारी नितिन नवीन को मिली। अब शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे के बाद उनकी अगली भूमिका को लेकर फिर से चर्चाएं तेज हो गई हैं।
संगठन में मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि धर्मेंद्र प्रधान को जल्द ही पार्टी संगठन में कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। इसके अलावा आगामी पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में भी उन्हें अहम चुनावी जिम्मेदारी मिल सकती है। उनके समर्थकों का मानना है कि उन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए पद छोड़ा है और इस फैसले से उनकी सार्वजनिक छवि तथा उनके संसदीय क्षेत्र संबलपुर में राजनीतिक स्वीकार्यता और मजबूत होगी।
