जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से जुड़े अवमानना मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए सौरभ दास। | Source: Chrome

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से जुड़े अवमानना मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए सौरभ दास।Source : Chrome

दिल्ली हाई कोर्ट में चल रहे अवमानना मामले के बीच सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता और पत्रकार सौरभ दास ने अपने खिलाफ लगाए गए दावों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा पर की गई अपनी टिप्पणियों को उन्होंने न तो हटाया है और न ही बदला है। दास का आरोप है कि अदालत के सामने गलत जानकारी पेश की गई है।

'मैंने कोई पोस्ट डिलीट नहीं की'

सौरभ दास ने स्पष्ट कहा कि उन्होंने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से जुड़ी अपनी कोई भी टिप्पणी सोशल मीडिया से नहीं हटाई। उनका कहना है कि उनकी रिपोर्टिंग सूचना के अधिकार (RTI) से प्राप्त दस्तावेज़ों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तथ्यों पर आधारित थी।

अदालत को गुमराह करने का लगाया आरोप

दास ने उस दावे पर आपत्ति जताई जिसमें कहा गया था कि उन्होंने अपनी पोस्ट हटा दी है। उन्होंने इसे गलत बताते हुए कहा कि अदालत के समक्ष तथ्यात्मक रूप से गलत जानकारी रखी गई है। उनके मुताबिक, उनकी ओर से कोई सामग्री डिलीट नहीं की गई।

हाई कोर्ट ने जवाब दाखिल करने के लिए दिया समय

मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह समेत अन्य पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया। अदालत ने रजिस्ट्री को भी संबंधित दस्तावेज़ उपलब्ध कराने का निर्देश दिया, ताकि सभी पक्ष अपना जवाब तैयार कर सकें।

सौरभ दास और गोपाल राय को भी मिला समय

इसी मामले में सौरभ दास और आम आदमी पार्टी के नेता गोपाल राय को भी चार सप्ताह के भीतर अपना पक्ष अदालत में दाखिल करने की अनुमति दी गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सोशल मीडिया पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ चलाए गए कथित अभियान में इनकी भूमिका रही।

अगली सुनवाई सितंबर में

यह मामला जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा द्वारा शुरू की गई आपराधिक अवमानना कार्यवाही से जुड़ा है। अदालत अब सभी पक्षों के जवाब मिलने के बाद मामले की आगे सुनवाई करेगी। अगली सुनवाई 21 सितंबर को निर्धारित की गई है।