
CJP फंडिंग विवाद पर अभिजीत दीपके की प्रतिक्रिया।Source : Chrome
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और उसके संस्थापक अभिजीत दीपके को लेकर दायर एक RTI शिकायत के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। गुजरात के सूरत के एक आरटीआई कार्यकर्ता ने संगठन की फंडिंग और अभिजीत दीपके के परिवार की आर्थिक स्थिति की जांच की मांग की है। इस पर CJP ने जवाब देते हुए अपनी फंडिंग को पारदर्शी बताया और प्रधानमंत्री राहत कोष (PM CARES Fund) को लेकर भी सवाल उठाए।
RTI शिकायत के बाद बढ़ा विवाद
सूरत के एक आरटीआई कार्यकर्ता ने चुनाव आयोग और संबंधित एजेंसियों से मांग की है कि कॉकरोच जनता पार्टी की फंडिंग और उसके संगठनात्मक ढांचे की जांच कराई जाए। शिकायत में यह भी कहा गया कि यदि संगठन को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता मिलने की बात कही जा रही है, तो इसकी वैधानिक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
अभिजीत दीपके ने दी पढ़ाई और फंडिंग पर सफाई
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिजीत दीपके ने कहा कि उनकी विदेश में उच्च शिक्षा बोस्टन यूनिवर्सिटी से मिली छात्रवृत्ति और शिक्षा ऋण की मदद से पूरी हुई थी। उन्होंने बताया कि लिया गया एजुकेशन लोन अब पूरी तरह चुकाया जा चुका है। साथ ही उन्होंने कहा कि CJP की गतिविधियां क्राउडफंडिंग के जरिए संचालित होती हैं और संगठन अपनी फंडिंग प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी रखने का दावा करता है।
PM CARES फंड को लेकर CJP का पलटवार
विवाद के बीच CJP की प्रवक्ता वैष्णवी गौड़ ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री राहत कोष (PM CARES Fund) का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यदि निजी व्यक्तियों के खर्च की जांच की मांग की जा रही है, तो PM CARES Fund की पारदर्शिता पर भी सवाल पूछे जाने चाहिए। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई।
RTI कार्यकर्ता ने क्या उठाए सवाल?
आरटीआई कार्यकर्ता का कहना है कि कॉकरोच जनता पार्टी अभी तक एक पंजीकृत राजनीतिक दल नहीं है, लेकिन वह राजनीतिक गतिविधियां संचालित कर रही है। उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की है कि संगठन की कानूनी स्थिति, फंडिंग के स्रोत और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के तहत उसकी पात्रता की जांच की जाए।
जांच की मांग के बीच बढ़ी राजनीतिक बहस
इस पूरे घटनाक्रम के बाद CJP की फंडिंग, संगठन की वैधानिक स्थिति और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। एक तरफ जांच की मांग की जा रही है, तो दूसरी ओर संगठन खुद को पारदर्शी बताते हुए सरकार से जुड़े फंडों की भी जांच की बात कर रहा है। अब सभी की नजर इस मामले में संबंधित एजेंसियों और चुनाव आयोग की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
