erere | Source: erereनई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके का एक भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। अमेरिका के मीडिया संस्थान न्यूयॉर्क टाइम्स की एक वीडियो डॉक्यूमेंट्री में दीपके अपने भारत लौटने के अनुभव को बताते हुए भावुक हो गए। परिवार को लेकर अपनी चिंता साझा करते-करते उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े और वह कैमरे के सामने ही रोने लगे।

भारत लौटने से पहले मन में था गिरफ्तारी का डर

न्यूयॉर्क टाइम्स की ओर से जारी वीडियो में अभिजीत दीपके ने कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े अपने आंदोलन और उसके बाद भारत लौटने के फैसले के बारे में विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि अमेरिका में रहते हुए सोशल मीडिया पर उन्हें भारत से जुड़ी एक खबर और टिप्पणी के बारे में जानकारी मिली थी। इसके बाद उन्होंने मजाकिया अंदाज में कॉकरोच जनता पार्टी नाम से एक सोशल मीडिया खाता बनाया था।

दीपके के मुताबिक, शुरुआत में उन्हें अंदाजा नहीं था कि यह नाम और उससे जुड़ी गतिविधियां इतनी तेजी से लोगों का ध्यान आकर्षित करेंगी। देखते ही देखते उनके अभियान को बड़ी संख्या में लोगों का समर्थन मिलने लगा। इसके बाद उन्होंने अमेरिका से भारत लौटकर आंदोलन में प्रत्यक्ष रूप से शामिल होने का निर्णय लिया।

हिमालय दिखाई दिया तो मन में आया- शायद फिर खुला आसमान न देख पाऊं

वीडियो में अभिजीत दीपके ने भारत लौटने के दौरान का वह क्षण भी साझा किया, जिसने उन्हें भीतर तक विचलित कर दिया था। उन्होंने बताया कि जब विमान भारत के करीब पहुंचा और उन्हें हिमालय दिखाई दिया, तब उनके मन में कई तरह के विचार आने लगे।

उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें लगा कि शायद यह आखिरी मौका है जब वह खुले आसमान को देख रहे हैं। भारत पहुंचने के बाद जेल जाने की आशंका उनके मन में थी और इस वजह से परिवार को लेकर उनकी चिंता और बढ़ गई थी।

परिवार का जिक्र करते ही दीपके भावुक हो गए। कुछ क्षणों के लिए वह बोल नहीं पाए और कैमरे के सामने उनकी आंखों से आंसू बहने लगे। उन्होंने आंसू पोंछकर खुद को संभालने की कोशिश की।

मां को बताया कि भारत जा रहा हूं तो रो पड़ी थीं

अभिजीत दीपके ने अपने भारत लौटने के फैसले से जुड़े परिवार के अनुभव का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने अपनी मां को भारत लौटने की बात बताई तो वह फूट-फूटकर रोने लगी थीं।

दीपके के अनुसार, उनकी मां को इस बात की चिंता थी कि भारत लौटने के बाद उनके साथ क्या होगा। इसके बावजूद उन्होंने परिवार को समझाया कि जोखिम होने के बावजूद भारत लौटना जरूरी है। उनका कहना था कि वह यह दिखाना चाहते थे कि वह देश की सुरक्षा के लिए कोई खतरा नहीं हैं।

दो महीनों में करोड़ों लोगों तक पहुंचने का दावा

वीडियो में दीपके ने अपने आंदोलन से मिले अनुभवों को भी साझा किया। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से उन्हें दो महत्वपूर्ण बातें सीखने को मिलीं। पहली सीख के तौर पर उन्होंने सही समय और परिस्थितियों को महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा कि अमेरिका में रहते हुए भी उन्होंने सोशल मीडिया पर सामने आई घटनाओं पर तुरंत प्रतिक्रिया दी। दीपके ने दावा किया कि उनके सोशल मीडिया खातों से जुड़े लोगों की संख्या करीब 2.6 करोड़ तक पहुंच गई और यह बदलाव लगभग दो महीने के भीतर हुआ।

जोखिम उठाने को बताया दूसरी बड़ी सीख

अभिजीत दीपके ने कहा कि उनके लिए दूसरी महत्वपूर्ण सीख साहस और जोखिम उठाने से जुड़ी रही। उनके मुताबिक, कई बार किसी ऐसे कदम की जरूरत होती है जिसे उठाने के लिए दूसरे लोग तैयार नहीं होते।

उन्होंने भारत लौटने के फैसले को भी इसी सोच से जोड़ते हुए कहा कि वह वापस इसलिए आए ताकि लोगों के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकें और यह साबित कर सकें कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा नहीं हैं।

वीडियो सामने आने के बाद फिर चर्चा में दीपके

न्यूयॉर्क टाइम्स की डॉक्यूमेंट्री में अभिजीत दीपके के इस भावुक क्षण का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा तेज हो गई है। आंदोलन, भारत लौटने के फैसले, परिवार की चिंता और जेल जाने की आशंका से जुड़े उनके बयानों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है।

वीडियो में दीपके ने अपने अभियान की शुरुआत से लेकर भारत लौटने तक के अनुभवों को अपने नजरिए से सामने रखा है। खास तौर पर हिमालय को देखकर मन में उठे विचार और मां के रोने का जिक्र करते हुए उनका भावुक होना इस पूरे वीडियो का सबसे संवेदनशील हिस्सा बनकर सामने आया है।