नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से जुड़े एक चुनावी विवाद की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में उस समय दिलचस्प स्थिति बन गई, जब वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल अपनी दलील रखते हुए तत्काल सुनवाई और निर्वाचन आयोग के आदेश पर रोक की मांग करने लगे। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सिब्बल को मामले पर तत्काल बहस आगे बढ़ाने से रोकते हुए कहा कि पहले इसे लिस्ट होने दिया जाए। CJI की इस टिप्पणी ने सुनवाई के दौरान सभी का ध्यान खींचा।
ममता बनर्जी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
सोमवार, 21 सितंबर को CJI जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका का उल्लेख किया गया। इस पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं। याचिका में तृणमूल कांग्रेस के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच विवाद के दौरान निर्वाचन आयोग द्वारा पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर लगाई गई रोक को चुनौती दी गई है।
ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल अदालत में पेश हुए। उन्होंने मामले में जल्द सुनवाई की मांग करते हुए निर्वाचन आयोग के उस निर्णय पर रोक लगाने का अनुरोध किया, जिसके तहत दोनों गुटों के नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है।
कपिल सिब्बल ने उठाया चुनाव प्रक्रिया का सवाल
सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि पार्टी से जुड़ी कार्यवाही निर्वाचन आयोग में जून महीने में शुरू हुई थी और जुलाई में उनकी ओर से जवाब भी दाखिल किया गया था। उनका कहना था कि इसके बाद चुनाव का नोटिफिकेशन जारी होने के दौरान निर्वाचन आयोग ने चुनाव चिह्न को फ्रीज करने का फैसला किया।
सिब्बल ने इस घटनाक्रम को लेकर अदालत के सामने सवाल उठाया और तत्काल सुनवाई की मांग की। उन्होंने तर्क दिया कि जब आयोग की कार्यवाही पहले से चल रही थी और जवाब भी दाखिल किया जा चुका था, तो चुनाव प्रक्रिया के बीच चुनाव चिह्न पर रोक लगाने का फैसला किस तरह लिया गया।
CJI सूर्यकांत ने सिब्बल को क्यों टोका?
कपिल सिब्बल की दलीलों के बीच CJI सूर्यकांत ने उन्हें मामले पर उस समय विस्तार से बहस नहीं करने को कहा। सुनवाई के दौरान CJI ने कहा, “ज्यादा मत बोलिए और इस मामले में अभी बहस न करें। वरना, दूसरी तरफ से भी बहस होगी। इसे पहले लिस्ट होने दीजिए।”
इसके बाद कपिल सिब्बल ने निर्वाचन आयोग की कार्रवाई पर अपनी आपत्ति जताते हुए कहा कि आयोग नए-नए रिकॉर्ड बना रहा है। इसके बाद CJI ने मामले को लिस्ट करने का आदेश दिया। इस तरह अदालत ने फिलहाल मामले को सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्देश दिया, जबकि विस्तृत बहस बाद में होने की स्थिति बनी।
ममता बनर्जी ने याचिका में किन्हें बनाया प्रतिवादी?
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में ममता बनर्जी ने निर्वाचन आयोग को प्रतिवादी बनाया है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी को भी याचिका में पक्षकार बनाया गया है। याचिका का मुख्य मुद्दा निर्वाचन आयोग द्वारा तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर लगाई गई रोक से जुड़ा है।
ममता बनर्जी की ओर से अदालत में यह आग्रह किया गया है कि चुनाव प्रक्रिया के बीच चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाए जाने के निर्णय पर तत्काल सुनवाई की जाए और आयोग के आदेश पर रोक लगाई जाए।
निर्वाचन आयोग ने कब फ्रीज किया था नाम और चुनाव चिह्न?
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों के बीच चल रहे विवाद से जुड़ी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निर्वाचन आयोग ने अंतिम निर्णय होने तक दोनों गुटों द्वारा ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम के इस्तेमाल पर रोक लगाने का फैसला किया था। इसके बाद दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए गए।
निर्वाचन आयोग ने यह कार्रवाई गुरुवार को जारी अपने अंतरिम आदेश के माध्यम से की थी। आयोग के अनुसार, दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले में निर्वाचन प्रतीक (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के प्रावधानों के तहत विस्तृत निर्णय किए जाने की आवश्यकता है।
चुनाव के बीच फैसला आने से बढ़ा विवाद
निर्वाचन आयोग की कार्रवाई ऐसे समय में हुई, जब पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। इसी वजह से ममता बनर्जी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई। कपिल सिब्बल ने अदालत में अपनी दलील के दौरान विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि आयोग की कार्यवाही पहले से चल रही थी और जुलाई में जवाब भी दाखिल किया जा चुका था।
उनका सवाल था कि चुनाव का नोटिफिकेशन जारी होने के बाद चुनाव चिह्न को फ्रीज करने का फैसला क्यों लिया गया। इसी मुद्दे पर उन्होंने अदालत से मामले की जल्द सुनवाई करने और निर्वाचन आयोग के आदेश पर रोक लगाने का अनुरोध किया।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने तत्काल विस्तृत बहस के बजाय पहले मामले को सूचीबद्ध करने पर जोर दिया। अदालत के निर्देश के बाद अब मामले की आगे की सुनवाई सूचीबद्ध प्रक्रिया के अनुसार होगी। ममता बनर्जी की याचिका में निर्वाचन आयोग के फैसले को चुनौती दी गई है और चुनाव चिह्न तथा पार्टी के नाम से जुड़े विवाद पर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई है।
फिलहाल इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि विवाद सीधे तौर पर तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से जुड़ा है। निर्वाचन आयोग ने अपने अंतरिम आदेश में अंतिम निर्णय से पहले दोनों गुटों के नाम के इस्तेमाल पर रोक लगाई है, जबकि ममता बनर्जी की ओर से इस कार्रवाई को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
