erer | Source: ereनई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के अन्य विपक्षी नेताओं से मुलाकात करने से इनकार कर दिया है। विपक्षी नेताओं ने विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के लिए सीजेआई से समय मांगा था। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने ईमेल के माध्यम से जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि जिन विषयों पर चर्चा का प्रस्ताव रखा गया है, वे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन हैं। ऐसे मामलों पर अलग से बैठक करना उचित नहीं होगा।

SIR पर चर्चा की मांग, सीजेआई ने बताई मुलाकात से दूरी की वजह

राहुल गांधी की ओर से मुख्य न्यायाधीश से मिलने का प्रस्ताव ऐसे समय में आया है, जब SIR प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल लगातार अपनी आपत्तियां उठा रहे हैं। विपक्षी नेताओं का उद्देश्य इस मुद्दे पर अपनी चिंताओं से सीजेआई को अवगत कराना और ज्ञापन सौंपना था। लेकिन जस्टिस सूर्यकांत ने प्रस्तावित मुलाकात के लिए समय देने से इनकार कर दिया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश ने अपने जवाब में इस बात पर जोर दिया कि सुप्रीम कोर्ट में पहले से लंबित मामलों पर इस तरह की बैठक के माध्यम से चर्चा करना उचित नहीं होगा। न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता और संस्थागत मर्यादा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने विपक्षी नेताओं के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया।

मल्लिकार्जुन खरगे ने दी थी मुलाकात के लिए समय मांगने की जानकारी

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बताया था कि विपक्षी दलों ने मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत से मिलने के लिए समय मांगा है। विपक्ष SIR प्रक्रिया को लेकर अपनी मांगों और आपत्तियों को शीर्ष अदालत के मुख्य न्यायाधीश के सामने रखना चाहता था। इसी बीच कांग्रेस और INDIA गठबंधन के अन्य दलों ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने की घोषणा की थी। विपक्ष की योजना मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपकर SIR प्रक्रिया वापस लेने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाने की थी। हालांकि, सीजेआई की ओर से मुलाकात से इनकार किए जाने के बाद इस कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक घटनाक्रम में नया मोड़ आ गया है।

CJI ने संवैधानिक व्यवस्था का किया उल्लेख, न्यायिक रास्ता खुला

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने अपने जवाब में संवैधानिक व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट कार्यपालिका के प्रशासनिक कामकाज में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। उनके जवाब का आशय यह था कि प्रशासनिक विषयों पर अदालत की भूमिका संवैधानिक सीमाओं के अनुरूप ही निर्धारित होती है। हालांकि, सीजेआई ने विपक्षी नेताओं के लिए न्यायिक रास्ता खुला होने की बात भी कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि विपक्षी नेता किसी मुद्दे को अदालत के सामने उठाना चाहते हैं, तो वे न्यायिक प्रक्रिया के तहत याचिका दायर कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में संबंधित मामलों पर अदालत में सुनवाई की जा सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, SIR प्रक्रिया से जुड़े मामलों की सुनवाई मंगलवार को निर्धारित थी। ऐसे में विपक्षी नेताओं के पास अपनी मांगों को न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से अदालत के सामने रखने का विकल्प मौजूद है। इस रुख से स्पष्ट होता है कि मुख्य न्यायाधीश ने व्यक्तिगत या अलग बैठक के बजाय कानूनी प्रक्रिया के तहत मामले उठाने का रास्ता बताया है।

राष्ट्रपति भवन तक मार्च के बाद अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी

SIR के मुद्दे पर विपक्षी दलों की सक्रियता पिछले कुछ दिनों से लगातार बढ़ी हुई है। शुक्रवार को राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी गठबंधन के नेताओं ने मार्च निकाला था। यह मार्च राष्ट्रपति भवन के सामने तक पहुंचा था। इसके बाद विपक्ष के 10 नेताओं ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा था। ज्ञापन के जरिए विपक्ष ने SIR प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां रखी थीं। इसके बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने और मुख्य न्यायाधीश को भी ज्ञापन सौंपने की बात कही थी। विपक्ष की योजना राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने की तरह ही शीर्ष अदालत के समक्ष भी अपनी मांगों को रखने की थी। अब सीजेआई की ओर से मुलाकात के अनुरोध को ठुकराए जाने के बाद विपक्ष की आगे की रणनीति पर सबकी नजरें टिकी हैं। हालांकि, मुलाकात के लिए समय नहीं मिलने का अर्थ यह नहीं है कि विपक्ष न्यायिक प्रक्रिया के तहत SIR से जुड़े मुद्दे अदालत में नहीं उठा सकता। मुख्य न्यायाधीश ने स्वयं याचिका दायर करने के विकल्प का उल्लेख किया है।

SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर विपक्ष की मांगें

विपक्षी दल SIR प्रक्रिया को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई है। कांग्रेस सहित INDIA गठबंधन के नेता इस मुद्दे को लेकर लगातार अपनी राजनीतिक गतिविधियां तेज कर रहे हैं। विपक्ष का प्रस्तावित मार्च इसी अभियान का हिस्सा था। इसके जरिए नेता अपनी मांगों को शीर्ष अदालत तक पहुंचाना चाहते थे। दूसरी ओर, सीजेआई ने यह स्पष्ट किया है कि अदालत के समक्ष विचाराधीन विषयों पर अलग से बैठक करना उचित नहीं होगा और संबंधित पक्ष न्यायिक प्रक्रिया का सहारा ले सकते हैं।

सीजेआई के जवाब के बाद कांग्रेस की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार

मुख्य न्यायाधीश की ओर से मुलाकात से इनकार किए जाने के बाद अब तक राहुल गांधी या कांग्रेस पार्टी की ओर से इस घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई थी। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विपक्षी दल अपने प्रस्तावित मार्च और ज्ञापन सौंपने के कार्यक्रम को लेकर क्या रुख अपनाते हैं। फिलहाल, इस घटनाक्रम ने SIR को लेकर जारी राजनीतिक बहस को एक नया मोड़ दे दिया है। एक ओर विपक्ष इस प्रक्रिया को लेकर अपनी मांगें उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर सीजेआई ने विचाराधीन मामलों पर चर्चा के लिए अलग बैठक करने से इनकार करते हुए न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ने का विकल्प दिया है।