आजकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों और उनके परिवारों के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। देश के कई अस्पतालों में कीमोथेरेपी में इस्तेमाल होने वाली जरूरी दवाओं की कमी की खबरें सामने आ रही हैं। डॉक्टरों के अनुसार Cisplatin और Carboplatin जैसी दवाएं कई प्रकार के कैंसर के इलाज में अहम भूमिका निभाती हैं। इन दवाओं की कमी के कारण देशभर में मरीजों के इलाज पर असर पड़ रहा है और कई परिवार दवाओं की तलाश में मेडिकल स्टोरों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।

आखिर क्यों खास हैं ये दवाएं?

Cisplatin और Carboplatin प्लैटिनम आधारित कीमोथेरेपी दवाएं हैं, जिन्हें कैंसर के इलाज की रीढ़ माना जाता है। इनका उपयोग फेफड़े, सर्वाइकल, ओवेरियन, स्तन, मुंह और सिर-गर्दन समेत कई प्रकार के कैंसर के उपचार में किया जाता है। कई मरीजों के लिए ये दवाएं इलाज का मुख्य हिस्सा होती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा संकट के पीछे कच्चे माल (API) की कमी, बढ़ती उत्पादन लागत और वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाएं प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी तनाव और प्लैटिनम की कीमतों में बढ़ोतरी ने भी स्थिति को और गंभीर बना दिया है। अस्पतालों ने शुरुआत में पुराने स्टॉक से काम चलाया, लेकिन अब अधिकांश जगहों पर वह भी खत्म होने लगा है।

डॉक्टरों की बढ़ी चिंता

दवाओं की कमी से देश के बड़े अस्पतालों में चिंता का माहौल है। दिल्ली एम्स के सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. एमडी रे के अनुसार, इन दवाओं की अनुपलब्धता मरीजों के पूरे ट्रीटमेंट प्लान को प्रभावित कर सकती है। इससे इलाज की सफलता की संभावना कम हो सकती है और बीमारी दोबारा लौटने का खतरा बढ़ सकता है। वहीं सर गंगा राम अस्पताल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. श्याम गर्ग ने बताया कि स्थिति इतनी गंभीर है कि अस्पतालों में केवल एक-दो दिन का स्टॉक ही बचा है। कई जगह डॉक्टरों को मरीजों के कीमोथेरेपी शेड्यूल में बदलाव करना पड़ रहा है या वैकल्पिक उपचार तलाशने पड़ रहे हैं।

मरीजों और परिवारों के लिए जरूरी सलाह

विशेषज्ञों का कहना है कि मरीजों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्क रहना बेहद जरूरी है। जिन मरीजों का इलाज इन दवाओं से चल रहा है, उन्हें अपने डॉक्टर के नियमित संपर्क में रहना चाहिए और दवा की उपलब्धता की जानकारी लेते रहना चाहिए। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी परिस्थिति में मरीजों को बिना चिकित्सकीय सलाह के इलाज में बदलाव नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।