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बिहार में मानसून धीरे धीरे रफ्तार पकड़ रहा है।वहीं कई जिलों में लोगों को अब भी उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। इस दौरान मौसम विभाग ने रविवार को राज्य के 20 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। विभाग का कहना है कि इन इलाकों में दिनभर मौसम बदल सकता है। कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है। इसके साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने और वज्रपात की भी उम्मीद है।

मौसम विभाग के अनुसार, इन प्रभावित जिलों में गरज चमक के साथ मध्यम से तेज बारिश हो सकती है। साथ ही करीब 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने की अपील की है। खासकर खुले मैदान, पेड़ के नीचे और बिजली के खंभों के पास जाने से बचने की सलाह दी गई है।

इन जिलों में रहेगा सबसे ज्यादा असर

आज इन जिलों में बारिश और तेज हवा का अलर्ट जारी किया गया है, उनमें पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण, सीतामढ़ी, बक्सर, भोजपुर, कैमूर, रोहतास, पटना, अरवल, जहानाबाद, औरंगाबाद, नवादा, गया, नालंदा, बेगूसराय, शेखपुरा और लखीसराय शामिल हैं। इन जिलों में कई जगह गरज चमक के साथ बारिश हो सकती है। कुछ इलाकों में तेज हवा चलने और आकाशीय बिजली गिरने की भी संभावना है। वहीं राज्य के बाकी जिलों में मौसम सामान्य रहने का अनुमान है।

पटना में कैसा रहेगा मौसम?

बिहार की राजधानी पटना में अगले 4 दिनों तक आसमान में बादलों का डेरा बना रहेगा। इस दौरान शहर के अलग-अलग इलाकों में बीच बीच में तेज हवाओं के साथ बारिश या गरज चमक के साथ बूंदाबांदी हो सकती है। पटना में अगले कुछ दिनों तक अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच बने रहने की उम्मीद है।

मौसम विभाग के मुताबिक अगले 48 घंटों में राज्य के कुछ हिस्सों में तापमान 1 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। लेकिन इसके बाद मानसून के और मजबूत होने की उम्मीद है। अगर मौसम का यही सिस्टम बना रहा तो आने वाले दिनों में बिहार के ज्यादातर जिलों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है।

किसानों के लिए जरूरी सलाह

हाल के दिनों में हुई वर्षा से खेतों में पर्याप्त नमी उपलब्ध हो गई है। ऐसे में किसानों को इस नमी का लाभ उठाकर धान की अगात किस्मों की बुआई शुरू करने की सलाह दी गई है। बुआई का उपयुक्त समय 10 से 15 जुलाई तक बताया गया है। बीजजनित रोगों से बचाव के लिए बुआई से पहले बीजों का फफूंदनाशी दवा से उपचार करने की सलाह दी गई है। साथ ही 10–15 दिन पुरानी धान की नर्सरी में समय पर निराई-गुड़ाई कर खरपतवार नियंत्रण सुनिश्चित करने को कहा गया है। जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा है, वे मध्यम अवधि वाली धान की रोपाई भी शुरू कर सकते हैं। साथ ही नर्सरी में समय पर निराई गुड़ाई और खरपतवार की सफाई करते रहने की सलाह दी गई है।