नई दिल्ली : डिजिटल पेमेंट करने वाले करोड़ों भारतीयों के लिए एक बहुत बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। क्या अब आपको हर एक ऑनलाइन ट्रांजैक्शन पर जेब ढीली करनी पड़ेगी? भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले पर सीधा दखल देते हुए केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को कड़ा नोटिस थमा दिया है। आइए जानते हैं इस पूरे विवाद और नए नियमों की अंदर की सच्चाई।क्या है पूरा मामला और नया MDR फ्रेमवर्क?


केंद्र सरकार के नए फ्रेमवर्क के अनुसार, सामान्य पर्सन टू मर्चेंट (P2M) UPI ट्रांजैक्शन पर 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने का प्रावधान किया गया है। इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार, RBI और NPCI को नोटिस भेजकर चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। हालांकि, अदालत ने फिलहाल इस फैसले पर किसी भी तरह की अंतरिम रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है।


कोर्ट में क्या बोले जज और सरकार के वकील?

इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ कर रही है। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह माना कि यह मामला कानून से ज्यादा तकनीकी पेचीदगियों से जुड़ा हुआ है। वहीं, सरकार की तरफ से पक्ष रखते हुए यह स्पष्ट किया गया कि नए नियमों के दायरे में आने वाले पेमेंट गेटवे के लगभग 96 प्रतिशत ट्रांजैक्शन पूरी तरह से शुल्क मुक्त रहेंगे, यानी आम जनता पर इसका सीधा बोझ नहीं पड़ेगा।


याचिका में लगाए गए गंभीर आरोप

अधिवक्ता अंजन दत्ता द्वारा दायर की गई इस जनहित याचिका में सरकार के इस कदम को सीधे तौर पर चुनौती दी गई है। याचिका में यह तर्क दिया गया है कि बिना किसी पर्याप्त वैधानिक सुरक्षा उपाय, पारदर्शिता और सार्वजनिक परामर्श के यह शुल्क थोपा गया है। इसके अलावा, भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की संशोधित धारा 10ए की संवैधानिक वैधता को भी कटघरे में खड़ा किया गया है, जिसके तहत कार्यपालिका को बिना स्पष्ट दिशानिर्देश के यह अधिकार मिलता है।


किस ट्रांजैक्शन पर कितना लगेगा चार्ज?

आगामी 15 अक्टूबर से लागू होने वाले इस नए फ्रेमवर्क के तहत अलग-अलग सेक्टर के हिसाब से एमडीआर (MDR) तय किया गया है:

  • सामान्य मर्चेंट पेमेंट: 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा भुगतानों पर 0.4% MDR लगेगा।
  • बड़ी रकम वाले ट्रांजैक्शन: 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है।
  • आवश्यक सेवाएं: रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि आदान जैसे कम मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर केवल 5 रुपये का तय MDR लगेगा।
  • म्यूचुअल फंड और शेयर ब्रोकर: प्रतिभूतियों और डीलर के जरिए होने वाले भुगतानों पर 0.02 प्रतिशत MDR लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी।


क्या आम जनता के लिए P2P ट्रांसफर रहेगा फ्री?

राहत की बात यह है कि पर्सन-टू-पर्सन (P2P) यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को भेजे जाने वाले पैसों पर रकम की परवाह किए बिना पूरी तरह से शून्य शुल्क (Zero Fee) जारी रहेगा। आंकड़े बताते हैं कि यह कुल यूपीआई लेनदेन की मात्रा का 37 प्रतिशत और मूल्य का 70 प्रतिशत हिस्सा है। सरकार का यह भी कहना है कि MDR से इकट्ठा होने वाली कुल राशि का बंटवारा बैंकों और संबंधित संस्थाओं के बीच तय प्रतिशत के हिसाब से किया जाएगा।