
भरत तिवारी एनकाउंटर मामलाSource : Social media
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। मामले की जांच अभी भी जारी है और परिजन लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं। इसी बीच परिवार ने एक और बड़ी चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि पिछले कुछ दिनों से घर में कोई भी चैन की नींद नहीं सो पा रहा है। इसकी वजह सिर्फ बेटे की मौत का दुख नहीं, बल्कि प्रशासन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट लिखित जानकारी नहीं मिलना भी है। परिजनों का आरोप है कि अधिकारियों ने मौखिक रूप से एफआईआर वापस लेने की बात कही, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक आदेश नहीं दिया गया। यही वजह है कि परिवार लगातार डर और असमंजस में जी रहा है।
पूरी रात फोन का इंतजार करता रहा परिवार
भरत तिवारी के ममेरे भाई लव कुमार ने बताया कि गुरुवार रात परिवार की जगदीशपुर के नए एसडीपीओ पंकज मिश्रा से फोन पर बात हुई थी। बातचीत के दौरान एसडीपीओ ने कहा कि उन्होंने उसी दिन पदभार संभाला है और पूरे मामले की जानकारी लेने के बाद करीब 10 मिनट में दोबारा फोन करेंगे। अधिकारी के इस आश्वासन के बाद परिवार पूरी रात उनके फोन का इंतजार करता रहा, लेकिन देर रात तक कोई कॉल वापस नहीं आया। परिवार का कहना है कि वे लगातार उम्मीद लगाए बैठे रहे, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई जवाब नहीं मिला।
आखिर किस बात का सता रहा है परिवार को डर?
परिजनों का कहना है कि उनकी सबसे बड़ी चिंता अब भी उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर है। उनका कहना है कि पुलिस अधिकारियों ने कई बार मौखिक रूप से कहा कि परिवार का नाम केस से हटा दिया गया है, लेकिन अब तक इसका कोई लिखित आदेश नहीं दिया गया। परिवार का कहना है कि सिर्फ मौखिक भरोसे से उन्हें संतोष नहीं है। उन्हें डर है कि अगर भविष्य में कोई कानूनी परेशानी खड़ी हुई तो उनके पास यह साबित करने के लिए कोई आधिकारिक दस्तावेज नहीं होगा कि एफआईआर वापस ली गई है। इसी वजह से परिवार प्रशासन से साफ और लिखित आदेश जारी करने की मांग कर रहा है, ताकि उनके मन में बना डर और असमंजस खत्म हो सके।
परिवार ने कई बार किया संपर्क, फिर भी नहीं मिला कोई जवाब
भरत तिवारी के ममेरे भाई लव कुमार ने बताया कि अगले दिन सुबह उन्होंने नए एसडीपीओ पंकज मिश्रा से कई बार फोन पर बात करने की कोशिश की, लेकिन किसी भी कॉल का जवाब नहीं मिला। उनका कहना है कि अगर सच में परिवार के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस ले ली गई है, तो प्रशासन को इसकी लिखित जानकारी देने में देर नहीं करनी चाहिए। लेकिन अब तक कोई आधिकारिक दस्तावेज नहीं मिलने से परिवार की चिंता और बढ़ गई है।
लिखित आदेश नहीं मिलने से बना हुआ है संशय
परिजनों का कहना है कि सिर्फ मौखिक भरोसे से उन्हें संतोष नहीं है। उनका मानना है कि जब तक प्रशासन की ओर से लिखित आदेश नहीं मिलेगा, तब तक यह साफ नहीं होगा कि परिवार के खिलाफ दर्ज एफआईआर की कानूनी स्थिति क्या है। इसी अनिश्चितता की वजह से परिवार लगातार तनाव में है और उन्हें भविष्य में किसी कानूनी कार्रवाई का डर भी सता रहा है।
कानूनी जानकारों ने क्या कहा?
कानूनी जानकारों के अनुसार, किसी भी एफआईआर को वापस लेने, उसमें बदलाव करने या किसी का नाम हटाने की पूरी प्रक्रिया सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होती है। ऐसे मामलों में संबंधित आदेश की लिखित प्रति देना भी जरूरी होता है। उनका कहना है कि अगर प्रशासन ने कार्रवाई पूरी कर ली है, तो उसका दस्तावेज परिवार को उपलब्ध कराया जाना चाहिए, ताकि आगे किसी तरह का भ्रम या विवाद न रहे।
प्रशासन से सिर्फ एक मांग
भरत तिवारी का परिवार अब प्रशासन से सिर्फ एक ही मांग कर रहा है। उनका कहना है कि अगर एफआईआर वापस ली गई है तो उसका लिखित आदेश उन्हें दिया जाए। वहीं, अगर प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है, तो प्रशासन इसकी सही स्थिति सार्वजनिक करे। परिवार का कहना है कि उन्हें सिर्फ स्पष्ट और आधिकारिक जानकारी चाहिए, ताकि उनके मन में बना डर और असमंजस खत्म हो सके।
