मुंबई। रेलवे स्टेशन के VIP रूम में रखे सोफे में खटमल मिलने के मामले ने अब कानूनी रूप ले लिया है। महाराष्ट्र के नांदेड़ डिवीजन के छत्रपति संभाजी नगर रेलवे स्टेशन पर VIP रूम की व्यवस्था से नाराज जुडिशियल मजिस्ट्रेट (रेलवे) ने डिवीजनल रेलवे मैनेजर (DRM) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। मजिस्ट्रेट ने पूछा है कि उनके खिलाफ अदालत की अवमानना अधिनियम के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए।
पहले दिया गया था पेस्ट कंट्रोल का निर्देश
मामला उस समय सामने आया जब बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच में बैठने वाले दो जजों ने रेलवे स्टेशन के VIP रूम में खटमल देखे और इसकी शिकायत की। इसके बाद औरंगाबाद के जुडिशियल मजिस्ट्रेट (रेलवे) ने मई में DRM को पत्र लिखकर VIP रूम में पेस्ट कंट्रोल कराने का निर्देश दिया था।
अदालती निर्देश का उद्देश्य VIP रूम में मौजूद कीड़े-मकोड़ों की समस्या को खत्म करना था। हालांकि, बाद में की गई स्थिति की जांच में यह बात सामने आई कि समस्या पूरी तरह दूर नहीं हुई थी और सोफों को लेकर भी स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं हुआ।
सोफे नहीं बदले जाने पर जज ने जताई नाराजगी
पिछले सप्ताह DRM को भेजे गए पत्र में जुडिशियल मजिस्ट्रेट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि VIP रूम में रखे सोफे बदले नहीं गए हैं। पत्र में VIP रूम की मौजूदा स्थिति को लेकर नाराजगी जताई गई।
छत्रपति संभाजी नगर में बॉम्बे हाईकोर्ट की बेंच में बैठने वाले कई जज ट्रेन से यात्रा करते हैं और यात्रा के दौरान रेलवे स्टेशन के VIP रूम में इंतजार करते हैं। ऐसे में इस कमरे में रखे सोफों की स्थिति को लेकर उठी शिकायत को गंभीरता से लिया गया।
सोफे पर बैठने के बजाय कार में इंतजार कर रहे जज
जुडिशियल मजिस्ट्रेट की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया कि सोफों पर बैठना बेहद असहज और घिनौनी स्थिति है। पत्र के अनुसार, स्थिति ऐसी हो गई है कि जज VIP रूम में बैठने के बजाय अपनी कारों में इंतजार कर रहे हैं।
इससे यह भी स्पष्ट होता है कि पहले दिए गए पेस्ट कंट्रोल के निर्देश के बावजूद VIP रूम की व्यवस्था को लेकर समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई थी।
रेलवे की कार्रवाई पर भी उठे सवाल
मजिस्ट्रेट ने DRM को भेजे पत्र में यह भी उल्लेख किया कि रेलवे की ओर से पहले दिए गए पत्र पर न तो संतोषजनक कार्रवाई की गई और न ही उसका जवाब दिया गया। अदालत के निर्देश के बाद भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने को पत्र में गंभीरता से लिया गया है।
मजिस्ट्रेट के अनुसार, यह स्थिति जुडिशियल ऑफिसर के निर्देश के प्रति खुले तौर पर अनादर के रूप में देखी जा सकती है। पत्र में इसे अदालत की अवमानना के दायरे में आने वाला मामला बताया गया है।
DRM को 30 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश
मामले में जुडिशियल मजिस्ट्रेट (रेलवे) ने DRM से जवाब मांगा है कि उनके खिलाफ अदालत की अवमानना अधिनियम के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए। इसके साथ ही DRM को 30 सितंबर को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।
इस पेशी के दौरान रेलवे की ओर से यह स्पष्ट किया जाना है कि पहले दिए गए निर्देश पर क्या कार्रवाई की गई और VIP रूम में खटमल तथा सोफों से जुड़ी समस्या अब तक क्यों बनी हुई है।
VIP रूम की व्यवस्था बनी मामले का केंद्र
यह मामला केवल रेलवे स्टेशन के एक कमरे में रखे सोफे तक सीमित नहीं रहा है। VIP रूम का इस्तेमाल बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच में आने-जाने वाले जजों द्वारा किया जाता है। ऐसे में वहां साफ-सफाई और बैठने की व्यवस्था को लेकर सामने आई शिकायत ने रेलवे की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
पहले शिकायत मिलने के बाद पेस्ट कंट्रोल का निर्देश दिया गया था, लेकिन बाद की स्थिति को लेकर फिर से शिकायत सामने आने के बाद अब मामला DRM से जवाब मांगने तक पहुंच गया है।
अब 30 सितंबर की पेशी पर रहेगी नजर
फिलहाल मामले में जुडिशियल मजिस्ट्रेट ने DRM को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर जवाब देने का निर्देश दिया है। अदालत यह देखेगी कि पहले दिए गए निर्देश के बाद रेलवे की ओर से क्या कदम उठाए गए और VIP रूम में समस्या दूर करने के लिए क्या कार्रवाई की गई।
