तेहरान / वाशिंगटन। दुनिया भर की खुफिया एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के गलियारों को हिला देने वाली एक बेहद सनसनीखेज खबर सामने आई है। ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई को लेकर एक ऐसा हैरतअंगेज खुलासा हुआ है, जिसे पढ़कर हर कोई अचंभित रह जाएगा। अमेरिकी और इजरायली हमलों के बीच मौत को बार-बार मात देने वाले 56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई एक बार फिर सुर्खियों में छाए हुए हैं। आइए जानते हैं इस चौंकाने वाले घटनाक्रम के भीतर की पूरी और अंदरूनी कहानी।
अस्पताल के मलबे से जिंदा निकाले जाने की हैरान करने वाली दास्तान
ईरान की 'असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स' के वरिष्ठ सदस्य और प्रमुख धर्मगुरु मोहसिन हैदरी ने कतरी टीवी चैनल 'अल अरबी' को दिए एक विशेष इंटरव्यू में यह बड़ा और सनसनीखेज दावा किया है। उनके मुताबिक, 28 फरवरी 2026 को अयातुल्ला अली खामेनेई के तेहरान स्थित मुख्य परिसर पर हुए भीषण हमलों में मोजतबा गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
दुश्मन देशों को जैसे ही इस बात की भनक लगी कि मोजतबा गंभीर हालत में इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती हैं, तेहरान के तीन अलग-अलग अस्पतालों को चुन-चुनकर निशाना बनाया गया और उन पर ताबड़तोड़ बमबारी की गई। हालांकि, तमाम खतरों के बीच गनीमत यह रही कि मोजतबा को तीसरे अस्पताल के मलबे के नीचे से बिल्कुल सुरक्षित और जिंदा बाहर निकाल लिया गया। इस चमत्कारिक बचाव ने दुनिया भर के एक्सपर्ट्स को सकते में डाल दिया है।
रहस्य के साये में सुप्रीम लीडर: कहां गायब हैं मोजतबा खामेनेई?
इस बड़े और जानलेवा हमले के बाद से ही नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई पूरी तरह अंडरग्राउंड हो चुके हैं। वे किसी अज्ञात, बेहद सुरक्षित और गुप्त ठिकाने पर चले गए हैं।
इस घटना के बाद से न तो उन्हें सार्वजनिक तौर पर कभी देखा गया है और न ही उनका कोई आधिकारिक ऑडियो या वीडियो संदेश दुनिया के सामने आया है। उनकी इस रहस्यमयी गुमशुदगी और लंबी खामोशी ने वैश्विक राजनीति में तरह-तरह की अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है।
गुप्त कमरा, कागज़ की पर्चियां और बेहद गोपनीय मतदान का ड्रामा
यह पूरी सत्ता हस्तांतरण प्रक्रिया बेहद खतरनाक और तनावपूर्ण माहौल में पूरी की गई। असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स का मुख्य सचिवालय खुद अमेरिकी और इजरायली हवाई हमलों का सीधा शिकार बन चुका था। इस विध्वंसकारी हमले में 8 लोग मारे गए थे और नए सुप्रीम लीडर से जुड़ी कई महत्वपूर्ण व गोपनीय फाइलें जलकर पूरी तरह खाक हो गई थीं।
इन तमाम बाधाओं और हमलों के साये के बीच, असेंबली के सदस्यों को बिना किसी पूर्व सूचना के एक गुप्त कमरे में तलब किया गया। सुरक्षा के कड़े पहरे के बीच सदस्यों ने आधुनिक उपकरणों का उपयोग करने के बजाय साधारण कागज़ की पर्चियों पर अपने हाथ से वोट लिखकर ईरान के नए नेतृत्व का चुनाव किया।
अब आगे क्या होगा?
मोजतबा खामेनेई पर हुए इन लगातार हमलों और उनके चमत्कारिक बचाव ने ईरान के राजनीतिक भविष्य को एक बेहद अनिश्चित और खतरनाक मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। क्या मोजतबा जल्द ही सार्वजनिक मंच पर वापसी करेंगे या ईरान की सत्ता आने वाले दिनों में इसी तरह गुप्त साये से ही संचालित होती रहेगी? पूरी दुनिया की निगाहें अब तेहरान के अगले और बड़े कदम पर टिकी हुई हैं।
