गुवाहाटी। असम में लगातार हो रही भारी बारिश और बाढ़ ने कई इलाकों की जिंदगी पूरी तरह बदल दी है। नदियों का जलस्तर बढ़ने से गांवों में पानी भर गया है, सड़कें टूट गई हैं और हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा है। सबसे ज्यादा चिंता उस गांव को लेकर है, जहां बाढ़ और उससे जुड़ी घटनाओं में अब तक 48 लोगों की मौत हो चुकी है। स्थानीय लोग अब इस गांव को दर्द और त्रासदी की पहचान के रूप में याद कर रहे हैं।
प्रशासन के अनुसार, लगातार बारिश के कारण कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। तेज बहाव की वजह से कई घर बह गए, खेत जलमग्न हो गए और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हुई है। कई परिवारों ने अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में शरण ली है।
राहत और बचाव कार्य में राज्य प्रशासन के साथ राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और स्थानीय प्रशासन की टीमें लगातार जुटी हुई हैं। नावों की मदद से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है, जबकि राहत शिविरों में भोजन, पीने का पानी और दवाइयों की व्यवस्था की गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस बार की बाढ़ पहले के मुकाबले ज्यादा विनाशकारी साबित हुई है। कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया, जबकि बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका पर भी संकट आ गया है। किसानों की फसलें पानी में डूब गई हैं और पशुधन को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी कुछ इलाकों में बारिश जारी रहने की संभावना जताई है। इसे देखते हुए प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है। बचाव दल संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि असम हर साल बाढ़ की समस्या से जूझता है, लेकिन बदलते मौसम और लगातार हो रही भारी बारिश के कारण स्थिति और गंभीर होती जा रही है। ऐसे में दीर्घकालिक बाढ़ प्रबंधन, नदी तटों की सुरक्षा और बेहतर जल निकासी व्यवस्था पर तेजी से काम करने की जरूरत है।
फिलहाल राहत और बचाव अभियान जारी है। प्रशासन प्रभावित परिवारों तक हर संभव सहायता पहुंचाने का दावा कर रहा है। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक सूचनाओं का ही पालन करें।
