पटना। बिहार में लगातार बारिश और प्रमुख नदियों के बढ़ते जलस्तर ने बाढ़ की स्थिति को गंभीर बना दिया है। बक्सर से लेकर पटना, समस्तीपुर और भागलपुर तक कई इलाकों में पानी फैलने से जनजीवन प्रभावित है। हालात की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बाढ़ प्रभावित जिलों में निगरानी व्यवस्था और मजबूत कर दी है। मुख्यमंत्री ने 13 मंत्रियों को उनके प्रभार वाले जिलों में बाढ़ की स्थिति पर नजर रखने की जिम्मेदारी सौंपी है। संबंधित प्रभारी सचिवों को भी उनके साथ लगाया गया है, ताकि राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी जमीन पर प्रभावी ढंग से हो सके।
मुख्यमंत्री ने खुद संभाली निगरानी की कमान
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी लगातार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का जायजा ले रहे हैं। गुरुवार को उन्होंने बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वे किया था। इसके बाद शनिवार को उन्होंने भागलपुर पहुंचकर जमीनी स्तर पर चल रहे राहत एवं बचाव कार्यों का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री के लगातार दूसरे दिन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के दौरे से सरकार की ओर से स्थिति की निगरानी को लेकर गंभीरता स्पष्ट होती है।
सरकार ने गंगा किनारे स्थित जिलों में राहत और बचाव अभियानों की सघन निगरानी के लिए प्रभारी मंत्रियों और प्रभारी सचिवों को जिम्मेदारी दी है। मुख्यमंत्री के निर्देश के अनुसार संबंधित मंत्री और सचिव अपने-अपने जिलों में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे तथा मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्यों की स्थिति देखेंगे।
पटना में गंगा के बढ़ते जलस्तर ने बढ़ाई चिंता
राजधानी पटना में गंगा नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर को लेकर प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना के शहरी क्षेत्र में गंगा के जलस्तर और तटबंधों की विशेष निगरानी के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही नदी के आसपास के इलाकों पर भी लगातार नजर रखने को कहा गया है।
पटना नगर निगम, जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया गया है। प्रशासन का विशेष ध्यान तटबंधों और उन क्षेत्रों पर है, जहां गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण बाढ़ का प्रभाव बढ़ सकता है।
गांधी घाट पर खतरे के निशान से 1.93 मीटर ऊपर गंगा
पटना के गांधी घाट के पास गंगा नदी का जलस्तर गंभीर स्थिति में पहुंच गया है। शनिवार सुबह 10 बजे गांधी घाट गेज साइट पर नदी का जलस्तर 50.53 मीटर दर्ज किया गया। यह 48.60 मीटर के खतरे के निशान से करीब 1.93 मीटर अधिक है। गंगा का जलस्तर अपने उच्चतम बाढ़ स्तर यानी एचएफएल (HFL) 50.52 मीटर के आसपास पहुंच गया है।
अधिकारियों ने नदी के जलस्तर में आगे भी बढ़ोतरी की आशंका को देखते हुए सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन को तटबंधों की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने को कहा गया है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों पर कंट्रोल कमांड सेंटर से नजर
बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने भी राज्य में बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की। शनिवार को वह पटना स्थित सिंचाई भवन में जल संसाधन विभाग के कंट्रोल कमांड सेंटर पहुंचे। यहां उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के विभिन्न संवेदनशील स्थलों की स्थिति की जानकारी ली।
समीक्षा के दौरान अधिकारियों को तटबंधों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए। संवेदनशील क्षेत्रों में किसी भी तरह की स्थिति सामने आने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
सरकार के अनुसार 10.28 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित
आपदा प्रबंधन विभाग ने शनिवार को बिहार में बाढ़ की स्थिति को लेकर आंकड़े जारी किए। विभाग के अनुसार राज्य के 11 जिलों के 50 प्रखंडों की 201 पंचायतों में कुल 10.28 लाख की आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य लगातार जारी हैं।
बाढ़ प्रभावित आबादी तक राहत पहुंचाने और प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक बचाव कार्यों की निगरानी के लिए प्रशासनिक स्तर पर सक्रियता बढ़ाई गई है। सरकार की ओर से संबंधित अधिकारियों को मौके पर रहकर स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
13 जिलों की निगरानी का जिम्मा प्रभारी मंत्रियों को
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद बाढ़ प्रभावित जिलों की निगरानी के लिए प्रभारी मंत्रियों को जिम्मेदारी दी गई है। उपलब्ध सूची में बक्सर, भोजपुर, पटना, सारण, वैशाली, बेगूसराय, समस्तीपुर, लखीसराय, खगड़िया, मुंगेर, भागलपुर और कटिहार जिलों के प्रभारी मंत्रियों के नाम दिए गए हैं।
बक्सर — नंद किशोर राम
भोजपुर — अरुण शंकर प्रसाद
पटना — विजय चौधरी
सारण — बिजेंद्र प्रसाद यादव
वैशाली — निशांत कुमार
बेगूसराय — रामकृपाल यादव
समस्तीपुर — दामोदर रावत
लखीसराय — सुनील कुमार
खगड़िया — मदन सहनी
मुंगेर — संजय पासवान
भागलपुर — नीतीश मिश्रा
कटिहार — प्रमोद चंद्रवंशी
बक्सर से भागलपुर तक कई इलाकों में बाढ़ का असर
बिहार में नदियों के उफान और लगातार बारिश के बीच बाढ़ का दायरा बढ़ता जा रहा है। गंगा किनारे बसे जिलों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। बक्सर, पटना, समस्तीपुर और भागलपुर समेत कई क्षेत्रों में बाढ़ का असर दिखाई दे रहा है। ऐसे में प्रभारी मंत्रियों और सचिवों की जिम्मेदारी केवल समीक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन्हें संबंधित जिलों में जाकर राहत एवं बचाव कार्यों की जमीनी स्थिति की निगरानी करनी है।
सरकार का फोकस तटबंधों की निगरानी, संवेदनशील स्थलों की स्थिति की समीक्षा और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जारी राहत एवं बचाव कार्यों पर है। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री स्तर पर लगातार समीक्षा किए जाने के साथ प्रशासनिक मशीनरी को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
पटना पर विशेष नजर, आगे बढ़ सकता है गंगा का जलस्तर
पटना में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर पहुंचने के बाद राजधानी क्षेत्र में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। गांधी घाट पर दर्ज 50.53 मीटर का जलस्तर एचएफएल 50.52 मीटर के करीब है। ऐसे में अधिकारियों को जलस्तर में संभावित बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए निगरानी व्यवस्था मजबूत रखने के निर्देश दिए गए हैं।
बिहार सरकार की ओर से बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर प्रभारी मंत्री और प्रभारी सचिव अपने संबंधित जिलों में पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी करेंगे, जबकि पटना में गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए नगर निगम, जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
