साउथ अफ्रीका में अवैध प्रवासियों के खिलाफ चल रहा विरोध प्रदर्शन अब गंभीर रूप ले चुका है। कुछ स्थानीय नागरिक समूहों ने बिना वैध दस्तावेज वाले विदेशियों को 30 जून तक देश छोड़ने की चेतावनी दी थी। डेडलाइन खत्म होने से पहले ही करीब 25 हजार प्रवासी देश छोड़कर अपने-अपने देशों को लौट चुके हैं। हालात को देखते हुए सरकार ने कई संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है। ताकि नागरिकों अवैध हिंसा का सामना ना करना पड़े।
हाल के दिनों में साउथ अफ्रीका में विदेशियों के खिलाफ हिंसा और धमकी की घटनाओं में तेजी आई है। इस दौरान मोजाम्बिक के दो और मलावी के एक नागरिक की हत्या कर दी गई। पुलिस ने सभी मामलों की जांच शुरू कर दी है।
सीमा प्रबंधन प्राधिकरण (BMA) के अनुसार, जून महीने में कम से कम 988 घानावासी और लगभग 600 नाइजीरियाई हवाई मार्ग से अपने देशों को लौटे हैं। वहीं 15 हजार से अधिक लोगों ने जमीनी रास्ते से जिम्बाब्वे, मलावी और मोजाम्बिक की सीमाएं पार की हैं।
BMA का कहना है कि हाल के सप्ताहों में कुल मिलाकर लगभग 25 हजार प्रवासी साउथ अफ्रीका छोड़कर अपने-अपने देश लौट चुके हैं। कई लोगों ने बताया कि उनके मकान मालिकों और नियोक्ताओं ने भी सुरक्षा कारणों से उन्हें देश छोड़ने की सलाह दी। उन्हें डर था कि हिंसक भीड़ या सरकारी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
हिंसा और बढ़ते तनाव को देखते हुए केन्या, युगांडा और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो समेत कई अफ्रीकी देशों ने अपने नागरिकों की स्वैच्छिक वापसी की व्यवस्था की है। वहीं हजारों विदेशी नागरिक डरबन, जोहान्सबर्ग और केप टाउन में बनाए गए अस्थायी राहत शिविरों में अपने घर लौटने का इंतजार कर रहे हैं।
30 जून की समय-सीमा को देखते हुए दक्षिण अफ्रीकी सरकार ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि अवैध प्रवासियों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई जारी है और सीमा सुरक्षा को और मजबूत किया जा रहा है। किसी भी प्रकार की हिंसा, लूटपाट या कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
आंदोलन क्यों भड़का?
विदेशी विरोधी इस अभियान का नेतृत्व कुछ छोटे राजनीतिक दलों और स्थानीय नागरिक संगठनों द्वारा किया जा रहा है। प्रदर्शन में शामिल कई लोग पारंपरिक ज़ुलु पोशाक पहनकर हाथों में लाठी और ढाल लेकर मार्च कर रहे हैं। उनका आरोप है कि अवैध प्रवासी स्थानीय लोगों की नौकरियां छीन रहे हैं और अपराध बढ़ा रहे हैं।
हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसके पीछे केवल अवैध प्रवास का मुद्दा नहीं है। उनका कहना है कि बढ़ती बेरोजगारी, आर्थिक संकट, अपराध और आगामी स्थानीय निकाय चुनावों की राजनीति ने इस आंदोलन को और उग्र बना दिया है। सोशल मीडिया पर भी विदेशियों के खिलाफ कई भ्रामक दावे फैलाए जा रहे हैं।
पिछले वर्ष बिना दस्तावेज वाले विदेशी नागरिकों को सरकारी अस्पतालों और क्लीनिकों में सेवाएं देने को लेकर विवाद शुरू हुआ था। इसके बाद अलग-अलग इलाकों में विरोध प्रदर्शन होने लगे। इस वर्ष कुछ संगठनों ने 30 जून तक देश छोड़ने की खुली चेतावनी दे दी, जिसके बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए।
विशेषज्ञों का कहना है कि साउथ अफ्रीका में लगभग 33 प्रतिशत बेरोजगारी, बढ़ते अपराध और संसाधनों पर दबाव ने जनता में असंतोष पैदा किया है। देश में करीब 30 लाख प्रवासी रहते हैं, जो कुल आबादी का लगभग 5.1 प्रतिशत हैं। इनमें अधिकांश दक्षिणी अफ्रीका के पड़ोसी देशों से आए हैं, जहां आर्थिक और राजनीतिक संकट लंबे समय से बना हुआ है।

दक्षिण अफ्रीका में अवैध प्रवासियों के खिलाफ प्रदर्शन, सड़कों पर उतरे हजारों लोग।Source : CNN WORLD.COM
