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बिहार की राजनीति से एक दुखद खबर सामने आई है। कैमूर जिले के रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक रहे अंबिका यादव का बुधवार को निधन हो गया। वे पिछले करीब छह महीनों से ब्रेन हैमरेज के बाद गंभीर रूप से बीमार चल रहे थे और वाराणसी स्थित ट्रॉमा सेंटर में उनका इलाज चल रहा था। उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही कैमूर समेत पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
अंबिका यादव रामगढ़ की राजनीति का एक बड़ा चेहरा माने जाते थे। राजद के टिकट पर दो बार विधायक रहने के बाद उन्होंने बसपा का दामन थामा था। लंबे समय तक क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय रहे अंबिका यादव के निधन को कैमूर की राजनीति के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है।
राजद के टिकट पर दो बार बने विधायक, क्षेत्र में बनाई अलग पहचान
अंबिका यादव बिहार की राजनीति में रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र का एक चर्चित नाम रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2009 के उपचुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के टिकट पर जीत दर्ज कर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया था। इसके बाद 2010 के बिहार विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने अपनी सीट बरकरार रखी और 2015 तक विधायक रहे। अपने कार्यकाल के दौरान वे सड़क, सिंचाई, बिजली और किसानों से जुड़े मुद्दों को विधानसभा में उठाने के लिए जाने जाते थे। क्षेत्र में उनकी पकड़ इतनी मजबूत मानी जाती थी कि वे लगातार स्थानीय राजनीति के केंद्र में बने रहे और समर्थकों के बीच लोकप्रिय जनप्रतिनिधि की छवि कायम रखी।
2020 चुनाव से पहले बदली पार्टी, BSP में शामिल होकर लड़ा चुनाव
वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव से पहले अंबिका यादव ने अपने राजनीतिक जीवन का बड़ा फैसला लेते हुए राजद का साथ छोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (BSP) का दामन थामा और रामगढ़ विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतरे। चुनाव में उन्होंने मजबूत प्रदर्शन किया और मुकाबले को बेहद रोचक बना दिया, हालांकि जीत उनके हाथ नहीं लग सकी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी बदलने के बावजूद उनके व्यक्तिगत जनाधार में खास कमी नहीं आई थी। यही वजह रही कि चुनाव हारने के बाद भी वे क्षेत्रीय राजनीति में प्रभावशाली चेहरा बने रहे।
निधन से समर्थकों में शोक, राजनीतिक गलियारों में भी संवेदना
परिजनों के अनुसार अंबिका यादव पिछले कुछ समय से गंभीर रूप से बीमार थे। स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए वाराणसी स्थित ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान ही उनका निधन हो गया। जैसे ही यह खबर कैमूर पहुंची, उनके आवास पर समर्थकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक नेताओं का पहुंचना शुरू हो गया। विभिन्न दलों के नेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए इसे क्षेत्रीय राजनीति की बड़ी क्षति बताया। अंबिका यादव का राजनीतिक सफर कई उतार-चढ़ावों से भरा रहा, लेकिन उन्होंने हर दौर में अपनी अलग पहचान बनाए रखी। उनके निधन के साथ रामगढ़ की राजनीति का एक प्रभावशाली अध्याय हमेशा के लिए समाप्त हो गया।
