इलाहाबाद हाईकोर्ट में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म खान के बेटे अब्दुल्लाह आज़म खान से जुड़े कथित दो पैन कार्ड मामले ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति और न्यायिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। बुधवार को हुई अहम सुनवाई में अदालत ने न सिर्फ मामले की गंभीरता को स्वीकार किया बल्कि कई पक्षकारों को नोटिस जारी कर तीन हफ्तों के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश भी दिया। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब यह केस पहले से ही हाई-प्रोफाइल राजनीतिक और कानूनी बहस का हिस्सा बना हुआ है।अब्दुल्लाह आजम दो पैन कार्ड केस हाईकोर्ट सुनवाई अपडेट | फोटो: NDTV

अब्दुल्लाह आजम दो पैन कार्ड केस हाईकोर्ट सुनवाई अपडेट | फोटो: NDTV

हाईकोर्ट की सख्ती, सरकार और नेताओं को नोटिस

जस्टिस समित गोपाल की सिंगल बेंच में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया कि इस मामले में सभी पक्षों की भूमिका की विस्तृत जांच जरूरी है। इसी के तहत उत्तर प्रदेश सरकार, रामपुर से भाजपा विधायक आकाश सक्सेना, तत्कालीन इंस्पेक्टर ऋषि पाल सिंह और नवाब काजिम अली खान उर्फ नावेद मियां को नोटिस जारी किया गया। अदालत ने सभी पक्षकारों को तीन हफ्तों का समय देते हुए विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है। यह आदेश इस बात का संकेत है कि मामला अब गंभीर न्यायिक जांच के चरण में पहुंच चुका है।

दो पैन कार्ड केस और अब्दुल्लाह आज़म की कानूनी लड़ाई

अब्दुल्लाह आज़म खान की ओर से दाखिल याचिका में रामपुर ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई सात साल की सजा को चुनौती दी गई है। याचिका में सजा पर रोक लगाने, दोषसिद्धि को निलंबित करने और तत्काल जमानत देने की मांग की गई है। यह पूरा मामला कथित दो पैन कार्ड विवाद से जुड़ा है, जिसने राजनीतिक माहौल को पहले ही गर्म कर दिया है। बचाव पक्ष का कहना है कि ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड पहले ही हाईकोर्ट में मंगाए जा चुके हैं, इसलिए अब मामले की विस्तृत समीक्षा जरूरी है।

जुड़े मामलों के साथ सुनवाई का विस्तार

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी निर्देश दिया कि प्रतिवादियों के जवाब के बाद एक सप्ताह के भीतर प्रत्युत्तर (रिजॉइंडर एफिडेविट) दाखिल किया जाए। इसके साथ ही अदालत ने आदेश दिया कि इस याचिका को आज़म खान से जुड़े अन्य लंबित मामलों के साथ जोड़ा जाए। इससे साफ संकेत मिलता है कि अदालत पूरे प्रकरण को एक बड़े कानूनी ढांचे के रूप में देख रही है।

ट्रायल रिकॉर्ड और आगे की कानूनी दिशा

सुनवाई में यह तथ्य भी सामने आया कि ट्रायल कोर्ट का रिकॉर्ड पहले ही 9 जून के आदेश के तहत हाईकोर्ट द्वारा तलब किया जा चुका है। अदालत ने माना कि रिकॉर्ड पहले से उपलब्ध है, इसलिए इस स्तर पर कोई अतिरिक्त आदेश देने की आवश्यकता नहीं है। अब यह मामला दस्तावेजी साक्ष्यों और कानूनी दलीलों के आधार पर आगे बढ़ रहा है, और आने वाले हफ्तों में यह तय होगा कि अब्दुल्लाह आज़म खान को राहत मिलती है या नहीं।