नई दिल्ली। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार छोटे कारोबारियों और सूक्ष्म उद्यमों को वित्तीय मदद उपलब्ध कराने के लिए कई योजनाएं चला रही है। इन्हीं में Micro Credit Card Scheme यानी ME-Card भी शामिल है। इस योजना के तहत पात्र माइक्रो एंटरप्राइजेज के लिए ₹5 लाख तक की सीमा वाला क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराया जा सकता है। इसका उद्देश्य छोटे कारोबारियों के लिए कार्यशील पूंजी तक पहुंच आसान बनाना और डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देना है।
₹5 लाख तक की क्रेडिट सीमा का प्रावधान
Micro Credit Card Scheme के तहत माइक्रो एंटरप्राइजेज को ₹5 लाख तक की पूर्व-स्वीकृत रिवॉल्विंग क्रेडिट लिमिट वाला कार्ड मिल सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर आवेदक को स्वतः ₹5 लाख की पूरी सीमा मिल जाएगी। कार्ड जारी करने और वास्तविक क्रेडिट सीमा तय करने का अंतिम फैसला संबंधित बैंक या ऋणदाता की क्रेडिट जांच और उसकी नीतियों के आधार पर होगा।
इस सुविधा की खास बात यह है कि यह सामान्य सावधि ऋण से अलग रिवॉल्विंग क्रेडिट की तरह काम करती है। कारोबारी स्वीकृत सीमा के भीतर अपनी जरूरत के अनुसार रकम का इस्तेमाल कर सकता है। भुगतान करने के बाद उपलब्ध क्रेडिट का दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।
कौन उठा सकता है इस योजना का लाभ
Micro Credit Card Scheme का लाभ लेने के लिए माइक्रो एंटरप्राइजेज का केंद्र सरकार के Udyam Portal पर पंजीकृत होना जरूरी है। यानी छोटे कारोबार से जुड़े ऐसे उद्यमों को पहले Udyam Portal पर अपना पंजीकरण कराना होगा। इसके बाद संबंधित बैंक या ऋणदाता अपने नियमों और क्रेडिट मूल्यांकन के आधार पर कार्ड जारी करने तथा सीमा तय करने का फैसला करेगा।
इसलिए केवल Udyam Portal पर पंजीकरण होने से ₹5 लाख की क्रेडिट सीमा की गारंटी नहीं मिलती। अंतिम मंजूरी बैंक या संबंधित ऋणदाता की जांच और पात्रता मानदंड पर निर्भर करेगी।
कारोबार की रोजमर्रा की जरूरतों में आएगा काम
यह कार्ड छोटे कारोबारियों की कार्यशील पूंजी संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकता है। उदाहरण के तौर पर कारोबारी इसका इस्तेमाल दुकान या कारोबारी इकाई के लिए कच्चा माल खरीदने, स्टॉक बढ़ाने और रोजमर्रा के कारोबारी खर्चों को पूरा करने के लिए कर सकते हैं।
कई छोटे कारोबारों में ऐसी स्थिति आती है जब बिक्री से पैसा आने में समय लगता है, लेकिन कच्चे माल या अन्य जरूरी खर्चों का भुगतान तत्काल करना पड़ता है। ऐसे समय में स्वीकृत रिवॉल्विंग क्रेडिट सीमा कारोबारी को अस्थायी नकदी जरूरत पूरी करने का विकल्प दे सकती है।
डिजिटल प्रक्रिया से आवेदन को आसान बनाने की कोशिश
इस योजना में कागजी कार्रवाई को कम करने और प्रक्रिया को तेज बनाने के लिए डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किया जाता है। इसके तहत UPI, Account Aggregator Framework और आसान Common Digital Application Form जैसी व्यवस्थाओं का उपयोग किया जाता है।
डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य कारोबारियों के लिए ऋण सुविधा तक पहुंच को सरल बनाना है। इससे वित्तीय जानकारी के इस्तेमाल और आवेदन प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाने की कोशिश की गई है।
शुरुआती आवेदकों के लिए जॉइनिंग फीस नहीं
योजना के तहत शुरुआती आवेदकों के लिए जॉइनिंग फीस नहीं रखी गई है। वहीं, वार्षिक शुल्क कार्ड की क्रेडिट सीमा का अधिकतम 1 प्रतिशत या ₹1,000, जो भी कम हो, तय किया गया है।
हालांकि, कार्ड लेने से पहले आवेदक को संबंधित बैंक या ऋणदाता की ओर से लागू शुल्क और अन्य शर्तों की जानकारी जरूर देखनी चाहिए। वास्तविक सुविधा और शर्तें संबंधित कार्ड जारी करने वाली संस्था की नीतियों के अनुसार लागू होंगी।
ब्याज दर RBI के नियमों के अनुसार
इस सुविधा के तहत ब्याज दरें भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की गाइडलाइंस के अनुसार तय की जाती हैं। योजना से जुड़े विवरण में सालाना ब्याज दरों को प्रतिस्पर्धी बताया गया है। क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने वाले कारोबारी को इस्तेमाल की गई राशि और लागू शर्तों के अनुसार भुगतान करना होगा।
इसलिए ₹5 लाख की सीमा को सीधे ₹5 लाख का मुफ्त पैसा समझना सही नहीं है। यह एक क्रेडिट सुविधा है, जिसका इस्तेमाल स्वीकृत सीमा के भीतर किया जाता है और संबंधित शर्तों के अनुसार भुगतान करना होता है।
बजट 2025-26 में हुआ था ऐलान
Micro Credit Card Scheme से जुड़ी घोषणा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2025 को पेश किए गए केंद्रीय बजट 2025-26 में की थी। उस समय उन्होंने बताया था कि Udyam Portal पर पंजीकृत माइक्रो एंटरप्राइजेज के लिए ₹5 लाख तक की सीमा वाले कस्टमाइज्ड क्रेडिट कार्ड जारी किए जाएंगे।
सरकार ने पहले साल में ऐसे 10 लाख क्रेडिट कार्ड जारी करने का लक्ष्य रखा था। योजना का उद्देश्य सूक्ष्म उद्यमों को कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने के साथ-साथ डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देना था।
MSME की परिभाषा में भी हुआ बड़ा बदलाव
केंद्र सरकार ने MSME यानी सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की परिभाषा से जुड़ी निवेश और कारोबार सीमा में भी बदलाव किया है। माइक्रो एंटरप्राइजेज के लिए निवेश की सीमा ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹2.5 करोड़ और कारोबार यानी टर्नओवर की सीमा ₹5 करोड़ से बढ़ाकर ₹10 करोड़ कर दी गई है।
लघु उद्यमों के लिए निवेश की सीमा ₹25 करोड़ और टर्नओवर की सीमा ₹100 करोड़ की गई है। वहीं, मध्यम उद्यमों के लिए निवेश की सीमा ₹125 करोड़ और टर्नओवर की सीमा ₹500 करोड़ निर्धारित की गई है।
छोटे कारोबारियों के लिए क्यों अहम है यह सुविधा
छोटे कारोबारियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती अक्सर कारोबार चलाने के लिए लगातार उपलब्ध नकदी की होती है। कच्चा माल खरीदने, स्टॉक बनाए रखने और रोजमर्रा के खर्चों के लिए समय-समय पर पूंजी की जरूरत पड़ती है। ऐसे में रिवॉल्विंग क्रेडिट की सुविधा जरूरत के अनुसार धन का इस्तेमाल करने का विकल्प देती है।
ME-Card इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई सुविधा है। हालांकि, कार्ड की वास्तविक क्रेडिट सीमा, मंजूरी और लागू शर्तों का निर्धारण संबंधित बैंक या ऋणदाता की क्रेडिट जांच के बाद ही होगा।
आवेदन से पहले इन बातों को समझना जरूरी
माइक्रो एंटरप्राइजेज के लिए इस सुविधा का लाभ लेने से पहले Udyam Portal पर पंजीकरण और संबंधित बैंक या ऋणदाता की पात्रता शर्तों को समझना जरूरी है। ₹5 लाख तक की सीमा अधिकतम निर्धारित सीमा है, न कि प्रत्येक आवेदक के लिए निश्चित राशि। बैंक की क्रेडिट जांच के आधार पर वास्तविक सीमा अलग हो सकती है।
इस तरह यह योजना छोटे कारोबारियों के लिए कार्यशील पूंजी की जरूरत को पूरा करने और डिजिटल माध्यम से क्रेडिट सुविधा तक पहुंच बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रावधान है। साथ ही, इसका लाभ लेने वाले कारोबारियों को ब्याज, शुल्क, भुगतान और अन्य नियमों को समझकर ही क्रेडिट सुविधा का इस्तेमाल करना चाहिए।
