erer | Source: ereनई दिल्ली। जंतर-मंतर छात्र आंदोलन के बाद राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके को अब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के एक प्रमुख सहयोगी दल से राजनीति में आने का खुला आमंत्रण मिला है। केंद्रीय मंत्री एवं रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामदास आठवले ने सार्वजनिक रूप से दीपके से अपनी पार्टी में शामिल होने की अपील की है। हालांकि, अभिजीत दीपके की ओर से इस प्रस्ताव पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

आठवले बोले— आंबेडकर का सपना पूरा करने साथ आएं

केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कहा कि यदि अभिजीत दीपके सामाजिक परिवर्तन और डॉ. भीमराव आंबेडकर के सपनों को साकार करने के लिए गंभीर हैं, तो उन्हें रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) का हिस्सा बनना चाहिए। उनके अनुसार दीपके जैसे युवाओं के जुड़ने से समाज और संगठन दोनों को नई ऊर्जा मिलेगी।

आठवले का यह बयान ऐसे समय आया है जब सीजेपी लगातार यह कहती रही है कि उसका मुख्य उद्देश्य सामाजिक मुद्दों पर जनजागरण करना है, न कि तत्काल चुनावी राजनीति में उतरना।

क्या राजनीति में आएंगे अभिजीत दीपके?

हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी से बातचीत के दौरान अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया था कि फिलहाल उनकी प्राथमिकता राजनीति नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत की समस्याओं का समाधान केवल नई राजनीतिक पार्टी बनाना नहीं है।

हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि देश के अधिकांश लोग उनसे राजनीति में आने की अपेक्षा करेंगे, तो वह भविष्य में इस पर गंभीरता से विचार कर सकते हैं। चुनाव लड़ने की संभावना को भी उन्होंने पूरी तरह खारिज नहीं किया, बल्कि उसे जनता की इच्छा से जोड़ दिया।

सीजेपी ने क्यों टाला राजनीतिक दल बनने का फैसला?

अगस्त के पहले सप्ताह में सीजेपी ने अपनी राष्ट्रीय कार्यसमिति का गठन किया था। इसके बाद संगठन के प्रवक्ता सौरभ दास ने घोषणा की थी कि फिलहाल कॉकरोच जनता पार्टी को राजनीतिक दल में परिवर्तित नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि देश में पहले से अनेक राजनीतिक दल मौजूद हैं और एक नया दल जोड़ने के बजाय संगठन अपनी पूरी ताकत जमीनी आंदोलनों, जनजागरण और सार्वजनिक मुद्दों पर लगाएगा। उनका मानना है कि वास्तविक परिवर्तन समाज के बीच काम करने से आएगा, केवल चुनाव लड़ने से नहीं।

‘स्कूल ठीक करो’ अभियान से शुरू हुई नई मुहिम

राजनीतिक चर्चाओं के बीच अभिजीत दीपके ने महाराष्ट्र के हिंगोली जिले स्थित अपने पैतृक गांव से “स्कूल ठीक करो” अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान का उद्देश्य सरकारी विद्यालयों की बुनियादी सुविधाओं का सर्वेक्षण करना और उनकी वास्तविक स्थिति देश के सामने लाना है।

दीपके ने आरोप लगाया कि कई सरकारी स्कूलों में आज भी पीने का पानी, पर्याप्त बेंच, सुरक्षित भवन और टूटी खिड़कियों जैसी मूलभूत समस्याएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि सबसे अधिक नुकसान गरीब परिवारों के बच्चों को उठाना पड़ रहा है, जबकि शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है।

देशभर के स्कूलों का तैयार होगा डाटा

अभियान के तहत सीजेपी एक विस्तृत सूची तैयार करेगी, जिसमें प्रत्येक सरकारी विद्यालय की बुनियादी सुविधाओं का रिकॉर्ड दर्ज किया जाएगा। संगठन महाराष्ट्र के साथ-साथ अन्य राज्यों के स्कूलों से भी आंकड़े एकत्र कर उनका संकलन करेगा।

दीपके ने बताया कि अगले चरण में वह महाराष्ट्र के विभिन्न तालुकों के सरकारी विद्यालयों का दौरा करेंगे, जबकि संगठन ने राजस्थान के सरकारी स्कूलों में भी इसी तरह का निरीक्षण अभियान चलाने की घोषणा की है। उनका कहना है कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर जनभागीदारी से ही व्यवस्था में स्थायी सुधार संभव होगा।

छात्र आंदोलन से राष्ट्रीय पहचान तक का सफर

जून और जुलाई में जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन की अगुवाई करने के बाद अभिजीत दीपके और सीजेपी राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन गए थे। आंदोलन के दौरान युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी, लेकिन इसके बावजूद संगठन ने बार-बार स्पष्ट किया है कि उसका वर्तमान लक्ष्य सामाजिक बदलाव है, न कि सत्ता की राजनीति। अब एनडीए की ओर से मिला यह खुला न्योता भविष्य की राजनीति को लेकर नई चर्चाओं को जरूर जन्म दे रहा है।