
गोरखपुर में पंचर बनाने वाले राज प्रजापति के बारे में कई लोगों ने बताया (Photo ITG)
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां दिनभर सड़क किनारे कार और ट्रकों का पंचर बनाकर परिवार का गुजारा करने वाला युवक अचानक सरकारी रिकॉर्ड में करोड़ों रुपये के कारोबार वाली कंपनी का मालिक निकला। यह मामला तब सामने आया जब केंद्रीय जीएसटी (CGST) विभाग का समन उसके घर पहुंचा। समन में दर्ज जानकारी देखकर राज प्रजापति और उनका परिवार हैरान रह गया। सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक उनके नाम पर एक ऐसी कंपनी पंजीकृत थी, जिसका कारोबार करीब 100 करोड़ रुपये बताया गया और जिस पर लगभग 28 करोड़ रुपये की जीएसटी देनदारी दर्ज थी। राज का दावा है कि उन्होंने कभी कोई कंपनी नहीं बनाई और उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर यह पूरा फर्जीवाड़ा किया गया।
100 करोड़ के कारोबार वाली कंपनी का मालिक निकला पंचर बनाने वाला युवक
यह मामला गोरखपुर के रामपुर बुजुर्ग गांव निवासी राज प्रजापति का है। राज पेशे से पंचर बनाने का काम करते हैं और इसी से अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। गांव के लोग उन्हें एक मेहनती और साधारण युवक के रूप में जानते हैं। लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में उनके नाम पर मेसर्स गड़जेट्रीक टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी दर्ज मिली।
राज के मुताबिक कुछ दिन पहले उन्हें केंद्रीय जीएसटी विभाग की ओर से समन मिला। समन में जिस कंपनी का नाम और कारोबार का विवरण दर्ज था, उसे देखकर वह हैरान रह गए। जांच में सामने आया कि कंपनी का लगभग 100 करोड़ रुपये का टर्नओवर दिखाया गया है और उस पर करीब 28 करोड़ रुपये की जीएसटी देनदारी भी दर्ज है। राज का कहना है कि उन्होंने न कभी कोई कंपनी खोली और न ही उन्हें इस बात की जानकारी थी कि उनके नाम से कोई फर्म या बैंक खाता संचालित हो रहा है। समन मिलने के बाद परिवार और गांव के लोग भी हैरान रह गए कि आखिर पंचर बनाने वाला युवक करोड़ों के कारोबार का मालिक कैसे बन गया।
जांच टीम गांव पहुंची तो खुली फर्जीवाड़े की परतें
मामले की जांच के दौरान वाराणसी से केंद्रीय जीएसटी विभाग की टीम गोरखपुर पहुंची। अधिकारियों ने दस्तावेजों में दर्ज पते का सत्यापन किया और सीधे राज प्रजापति के गांव पहुंचे। वहां पहुंचकर टीम ने देखा कि जिस व्यक्ति को रिकॉर्ड में करोड़ों की कंपनी का मालिक बताया गया है, वह वास्तव में सड़क किनारे पंचर बनाने का काम करता है। उसके परिवार की आर्थिक स्थिति भी बेहद साधारण है।
अधिकारियों ने राज से पूरे मामले में लंबी पूछताछ की और यह समझने की कोशिश की कि आखिर उनके नाम और दस्तावेजों का इस्तेमाल कैसे किया गया। शुरुआती जांच में दस्तावेजों के दुरुपयोग की आशंका सामने आई।
बहन की शादी के लिए मांगी थी मदद, उसी का उठाया गया फायदा
राज प्रजापति का कहना है कि इस पूरे मामले की शुरुआत वर्ष 2024 में हुई, जब परिवार बहन की शादी के कारण आर्थिक संकट से गुजर रहा था। उसी दौरान गांव के एक परिचित व्यक्ति ने बैंक से लोन दिलाने और आर्थिक मदद कराने का भरोसा दिया। राज के मुताबिक उस व्यक्ति ने आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज अपने पास रख लिए। उस समय उन्हें यह अंदाजा भी नहीं था कि इन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल उनके नाम पर फर्जी कंपनी बनाने में किया जाएगा।
राज का आरोप है कि आरोपी ने सिर्फ दस्तावेज ही नहीं लिए, बल्कि कई कागजों पर उनके हस्ताक्षर भी करवाए। इतना ही नहीं, दो बार उनका वीडियो भी रिकॉर्ड किया गया। उन्हें बताया गया कि यह सब बैंक लोन की प्रक्रिया का हिस्सा है। आर्थिक मजबूरी के चलते उन्होंने ज्यादा सवाल नहीं किए। अब उन्हें शक है कि इन्हीं दस्तावेजों, हस्ताक्षरों और वीडियो का इस्तेमाल कर उनके नाम पर कंपनी बनाई गई।
फर्जी कंपनी, बैंक खाता और 100 करोड़ का कारोबार; अब पुलिस और CGST कर रहे जांच
राज की शिकायत के अनुसार उनके दस्तावेजों के आधार पर मेसर्स गड़जेट्रीक टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी पंजीकृत कराई गई। इसके बाद कंपनी के नाम पर बैंक खाता भी खोला गया और उसी के जरिए भारी कारोबार दिखाया गया। जांच में सामने आया कि कंपनी के रिकॉर्ड में करीब 100 करोड़ रुपये का टर्नओवर दर्ज किया गया। बाद में कंपनी को बंद भी कर दिया गया, जिसके बाद मामला केंद्रीय जीएसटी विभाग की नजर में आया।
फरवरी 2026 में सीजीएसटी विभाग ने कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच शुरू की। कारोबार और टैक्स देनदारी के बड़े आंकड़ों को देखते हुए अधिकारियों ने दस्तावेजों का सत्यापन किया। मार्च 2026 में जांच टीम गोरखपुर पहुंची और वास्तविक स्थिति सामने आने लगी। इसके बाद 27 मई 2026 को राज प्रजापति के नाम आधिकारिक समन जारी किया गया और उन्हें वाराणसी स्थित सीजीएसटी कार्यालय में उपस्थित होने के लिए कहा गया।
समन मिलने के बाद राज और उनका परिवार घबरा गया। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि करोड़ों रुपये के कथित कारोबार और टैक्स मामले में उनका नाम कैसे जुड़ गया। इसके बाद उन्होंने स्थानीय पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और आरोप लगाया कि उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उन्हें एक बड़े आर्थिक अपराध में फंसा दिया गया।
गोरखपुर पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है। सीओ कैंट आभा सिंह के मुताबिक प्रथम दृष्टया दस्तावेजों के दुरुपयोग और धोखाधड़ी के आरोप सामने आए हैं। शिकायत में गांव के ही एक व्यक्ति पर आधार कार्ड, पैन कार्ड और हस्ताक्षर लेकर फर्जी कंपनी बनाने का आरोप लगाया गया है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कंपनी का वास्तविक संचालन किसने किया, बैंक खातों का इस्तेमाल किसने किया और करोड़ों रुपये के कथित कारोबार से आखिर किसे फायदा पहुंचा।
