सम्राट चौधरी से मुलाकात के बाद उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के एक विधायक ने बिहार में लागू शराबबंदी कानून को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा कि अब राज्य में इसकी कोई खास जरूरत नहीं रह गई है। विधायक ने कहा कि जब से शराबबंदी लागू हुई है, तब से अवैध शराब का कारोबार लगातार बढ़ा है और इसके कारण कई बार जहरीली शराब से मौत की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे यह साफ होता है कि कानून अपने उद्देश्य में पूरी तरह सफल नहीं हो पाया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस कानून के कारण आम लोगों और गरीब तबके को ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जबकि असली कारोबार करने वाले लोग बच निकलते हैं, जिससे भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा मिला है। विधायक ने सरकार से मांग की कि इस नीति की गंभीरता से समीक्षा की जाए और ज़मीनी हकीकत को ध्यान में रखते हुए कोई नया और व्यावहारिक फैसला लिया जाए। इस बयान के सामने आने के बाद बिहार की राजनीति में शराबबंदी को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है, जहां एक तरफ कुछ नेता और सामाजिक संगठन इसे महिलाओं और समाज के हित में जरूरी बताते हैं, वहीं दूसरी ओर कई राजनीतिक दल और नेता इसे असफल नीति करार देते हुए इसे खत्म करने या इसमें बड़े बदलाव की मांग कर रहे हैं, जिससे आने वाले समय में यह मुद्दा और गरमा सकता है।