आज के समय में फिटनेस केवल अच्छी सेहत तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह एक लाइफस्टाइल और सोशल मीडिया ट्रेंड का हिस्सा बन चुकी है। सिक्स-पैक एब्स, तेजी से वजन घटाने की चुनौतियां, मैराथन ट्रेनिंग और सख्त डाइट प्लान्स लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। हालांकि नियमित एक्सरसाइज शरीर के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि जब फिटनेस जुनून का रूप ले लेती है, तब इसका असर शरीर के कई महत्वपूर्ण कार्यों पर पड़ सकता है, जिनमें प्रजनन क्षमता भी शामिल है।
रिप्रोडक्टिव सिस्टम पर क्यों पड़ता है असर?
विशेषज्ञों के अनुसार, हमारा शरीर बेहद समझदारी से काम करता है। जब उसे महसूस होता है कि शरीर पर जरूरत से ज्यादा शारीरिक दबाव पड़ रहा है या ऊर्जा की कमी हो रही है, तो वह सबसे पहले उन प्रक्रियाओं को धीमा करना शुरू कर देता है जो जीवित रहने के लिए तुरंत जरूरी नहीं हैं। ऐसे में रिप्रोडक्टिव सिस्टम सबसे पहले प्रभावित होने वाले हिस्सों में शामिल हो सकता है।
सही तरीके से किए गए एक्सरसाइज के क्या हैं फायदे?
डॉ. क्षितिज मुर्दिया ने TOI को बताया कि नियमित और संतुलित व्यायाम कई तरह से फायदेमंद होता है। इससे मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है, हार्मोन संतुलित रहते हैं और संपूर्ण स्वास्थ्य में सुधार आता है। खासतौर पर मोटापा, डायबिटीज और अन्य लाइफस्टाइल समस्याओं से जूझ रहे लोगों में मध्यम स्तर का व्यायाम प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
कब शुरू होती है समस्या?
समस्या तब शुरू होती है जब लोग जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज, सख्त डाइटिंग और कठिन फिटनेस लक्ष्यों का पीछा करने लगते हैं। डॉ. क्षितिज मुर्दिया के अनुसार, अत्यधिक व्यायाम और पर्याप्त आराम की कमी शरीर को लगातार तनाव की स्थिति में बनाए रखती है। लंबे समय तक ऐसा होने पर हार्मोनल संतुलन बिगड़ सकता है और प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है।
महिलाओं में क्या होता है असर?
अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) से जुड़े शोधों के अनुसार, अत्यधिक व्यायाम और कम ऊर्जा उपलब्धता महिलाओं में प्रजनन हार्मोन और मासिक धर्म चक्र को प्रभावित कर सकती है। जब शरीर को पर्याप्त कैलोरी नहीं मिलती, तो मस्तिष्क इसे संसाधनों की कमी का संकेत मानता है। इसके बाद वह प्रजनन से जुड़े हार्मोनों का उत्पादन कम कर सकता है।
महिलाओं में इसका पहला संकेत अनियमित पीरियड्स या पीरियड्स का पूरी तरह बंद हो जाना हो सकता है। कई महिलाएं इसे फिटनेस की उपलब्धि समझ लेती हैं, जबकि यह शरीर की ओर से दिया गया एक चेतावनी संकेत हो सकता है। डॉ. क्षितिज मुर्दिया के अनुसार, ऐसी स्थिति में शरीर गर्भधारण के लिए खुद को तैयार नहीं मानता और ओव्यूलेशन की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
पुरुषों में क्या होती है दिक्कत?
यह समस्या केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है। पुरुषों में भी जरूरत से ज्यादा व्यायाम टेस्टोस्टेरोन के स्तर को कम कर सकता है। इसके अलावा ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन बढ़ने से स्पर्म की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, जिससे प्रजनन क्षमता कमजोर पड़ सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि फिटनेस और फर्टिलिटी एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। जरूरी यह है कि एक्सरसाइज संतुलित हो, पर्याप्त पोषण लिया जाए, भरपूर नींद ली जाए और शरीर को रिकवरी के लिए पर्याप्त समय दिया जाए।
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
