हर साल लाखों लोग हार्ट और डायबिटीज जैसी बीमारियों की जांच कराते हैं, लेकिन एक ऐसी बीमारी है जो बिना शोर मचाए शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंग को नुकसान पहुंचाती रहती है। शुरुआत में न दर्द होता है, न कोई बड़ा लक्षण दिखता है, इसलिए ज्यादातर लोग इसे सामान्य रिपोर्ट समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन हाल के शोध बताते हैं कि भारत में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है और अब इसे एक 'साइलेंट एपिडेमिक' माना जा रहा है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि समय रहते जीवनशैली में बदलाव नहीं किया गया तो यही फैटी लिवर आगे चलकर फाइब्रोसिस, सिरोसिस और यहां तक कि लिवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
भारत में क्यों तेजी से बढ़ रहे हैं फैटी लिवर के मामले?
एक बड़े मेटा-एनालिसिस के अनुसार भारत में लगभग 38.6% वयस्क किसी न किसी स्तर पर फैटी लिवर से प्रभावित हैं। यानी हर तीन में से एक भारतीय इस बीमारी की चपेट में हो सकता है। वहीं मोटापा, डायबिटीज और मेटाबॉलिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों में इसका खतरा 50% से भी अधिक पाया गया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि शहरी इलाकों में बढ़ती निष्क्रिय जीवनशैली और अनहेल्दी खानपान इसके प्रमुख कारण हैं।
क्या वजन घटाने से ठीक हो सकता है फैटी लिवर?
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बीमारी शुरुआती चरण में पकड़ में आ जाए तो इसे काफी हद तक नियंत्रित और कई मामलों में उल्टा भी किया जा सकता है। शोध में पाया गया है कि शरीर के कुल वजन का लगभग 5 प्रतिशत कम करने से लिवर में जमा अतिरिक्त वसा घटने लगती है। वहीं 7 से 10 प्रतिशत वजन कम करने पर लिवर की सूजन और शुरुआती फाइब्रोसिस में भी सुधार देखा गया है। डॉक्टरों का कहना है कि इसके लिए क्रैश डाइट अपनाने के बजाय संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना ज्यादा प्रभावी होता है। लिवर में खुद को रिपेयर करने की क्षमता होती है, लेकिन यह तभी संभव है जब नुकसान बहुत ज्यादा न हुआ हो।
एक बदलाव जो बचा सकता है लिवर और जिंदगी दोनों
विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती चरण में फैटी लिवर को काफी हद तक ठीक किया जा सकता है। कई अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में पाया गया है कि शरीर के कुल वजन का सिर्फ 5 प्रतिशत कम करने से लिवर में जमा अतिरिक्त फैट घटने लगता है। वहीं 7 से 10 प्रतिशत वजन कम करने पर लिवर की सूजन और शुरुआती फाइब्रोसिस में भी सुधार देखा गया है। इसके लिए क्रैश डाइट की बजाय संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना जरूरी है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि मोटापा, डायबिटीज या हाई कोलेस्ट्रॉल से जूझ रहे लोगों को समय-समय पर लिवर की जांच करानी चाहिए। क्योंकि फैटी लिवर जितना खामोश है, उसके परिणाम उतने ही गंभीर हो सकते हैं।
