नई दिल्ली। रूस में एक महिला की संदिग्ध मौत के बाद न्यूमोनिक प्लेग की आशंका ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। हालांकि रूस या विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अभी तक प्लेग संक्रमण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन मामले को लेकर स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्क हैं। भारत सरकार ने भी रूस में रह रहे अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर स्थिति पर नजर बनाए रखने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने की तैयारी की बात कही है।
एक महिला की मौत और अचानक क्यों बढ़ गई प्लेग की चिंता?
साइबेरिया में काम करने वाली डारया शिपिलोवा नाम की युवती की 2 अक्टूबर को मौत के बाद संभावित न्यूमोनिक प्लेग को लेकर सवाल उठने लगे। आशंका जताई जा रही है कि वह प्लेग पर शोध करने वाली प्रयोगशाला में काम करने के दौरान किसी खतरनाक बैक्टीरिया के संपर्क में आई हों। हालांकि अभी तक इस आशंका की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
रूस की स्वास्थ्य एजेंसी रोस्पोट्रेबनादजोर के अनुसार, व्यापक जांच में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है जिससे यह साबित हो कि महिला की बीमारी उन रोगजनकों से जुड़ी थी, जिन पर वह साइबेरिया और सुदूर पूर्व के इरकुत्स्क एंटी-प्लेग अनुसंधान संस्थान में काम करती थीं।
रूस में रह रहे 70 हजार भारतीयों को लेकर भारत ने क्या कहा?
पूरे घटनाक्रम के बीच भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि रूस में रहने वाले भारतीय नागरिकों की किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए देश तैयार है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि रूस में 30 हजार से अधिक भारतीय छात्र हैं, जबकि वहां रहने वाले भारतीय नागरिकों की कुल संख्या करीब 70 हजार है।
उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए सरकार हरसंभव कदम उठाएगी। भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि रूस में प्लेग की वास्तविक स्थिति के बारे में वहां के संबंधित अधिकारी ही अधिक सटीक जानकारी दे सकते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन भी हुआ सतर्क, रूस से मांगी गई अतिरिक्त जानकारी
विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इस मामले पर नजर रख रहा है। डब्ल्यूएचओ की अधिकारी मारिया वान केरखोव ने कहा कि संगठन के पास अभी महिला की मौत के वास्तविक कारण की पूरी जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि रूस से मामले से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी मांगी गई है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार रूस ने महिला की मौत को निमोनिया से जोड़ा है। लेकिन संदिग्ध परिस्थितियों को देखते हुए मामले की आगे जांच जरूरी मानी जा रही है। संबंधित प्रयोगशाला लंबे समय से प्लेग जैसे संक्रमणों पर शोध करती रही है, इसलिए इस घटना ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।
200 लोगों को निगरानी में रखने से क्यों गहराया मामला?
महिला के संपर्क में आए करीब 200 लोगों को एहतियात के तौर पर चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। क्षेत्र के कम से कम पांच अस्पतालों को भी सतर्क रखा गया है। रिपोर्टों के अनुसार संपर्क में आए लोगों को अलग रखकर निगरानी की जा रही है।
हालांकि किसी व्यक्ति को निगरानी या अलग रखने का फैसला अपने आप में प्लेग संक्रमण की पुष्टि नहीं करता। यह संभावित संक्रमण की स्थिति में एहतियाती व्यवस्था के तौर पर उठाया गया कदम हो सकता है।
अमेरिका भी कर रहा निगरानी, ट्रंप-पुतिन की बातचीत में उठ सकता है मुद्दा
रूस में सामने आए इस संदिग्ध मामले पर अमेरिका भी नजर रख रहा है। अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र यानी सीडीसी संभावित न्यूमोनिक प्लेग से जुड़ी जानकारी की निगरानी कर रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा है कि उनकी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत होने वाली है। इस बातचीत में इस मामले पर चर्चा होने की संभावना है। अमेरिकी अधिकारी भी घटना से जुड़ी अधिक जानकारी जुटा रहे हैं।
क्या भारत में रहने वाले लोगों को घबराने की जरूरत है?
फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि रूस में प्लेग फैलने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए केवल एक संदिग्ध मौत और कुछ लोगों को निगरानी में रखे जाने के आधार पर बड़े पैमाने पर संक्रमण की स्थिति मान लेना जल्दबाजी होगी।
भारत सरकार ने भी अभी किसी विशेष प्रतिबंध या आपात कदम की घोषणा नहीं की है। सरकार का मुख्य ध्यान रूस में रह रहे भारतीय नागरिकों की स्थिति पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर उन्हें सहायता उपलब्ध कराने पर है। आने वाले दिनों में रूस और विश्व स्वास्थ्य संगठन की जांच से ही स्पष्ट होगा कि यह वास्तव में प्लेग का मामला है या किसी अन्य संक्रमण से जुड़ी घटना।
