खुशबू खातून 

पटना।

बिहार की राजनीति में एक अहम फैसले के तहत अब राज्य के मंत्रियों और विधायकों को दो-दो सरकारी आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। इस प्रस्ताव को मंगलवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दे दी गई है। सरकार के इस निर्णय से सत्ताधारी दल के साथ-साथ विपक्ष के विधायकों को भी लाभ मिलेगा।

कैबिनेट के फैसले के अनुसार, मंत्रियों को भवन निर्माण विभाग की ओर से पहले से आवंटित सरकारी आवास के अतिरिक्त एक और आवास उपलब्ध कराया जाएगा। यह दूसरा आवास उनके विधानसभा क्षेत्र अथवा राजधानी पटना में दिया जा सकता है। इसके लिए मंत्रियों को निर्धारित किराया एवं अतिरिक्त राशि का भुगतान करना होगा।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि विधानसभा और विधान परिषद के वे वरिष्ठ सदस्य, जो मंत्री नहीं हैं, उन्हें भी दो-दो सरकारी आवास दिए जा सकेंगे। भवन निर्माण विभाग ने इसके लिए कुल 15 आवासों को चिह्नित किया है। इन आवासों का आवंटन नियमों एवं शर्तों के तहत किया जाएगा।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, मंत्रियों और विधायकों को अक्सर अपने क्षेत्र और राजधानी के बीच आवाजाही करनी पड़ती है, जिससे उन्हें आवास की समस्या का सामना करना पड़ता था। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह फैसला लिया है, ताकि जनप्रतिनिधियों को प्रशासनिक और जनसेवा के कार्यों में सुविधा मिल सके।

हालांकि, इस निर्णय को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। विपक्षी दलों ने इसे जनता के पैसे का दुरुपयोग बताया है, जबकि सरकार का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह नियमों के तहत और कार्य की आवश्यकता को देखते हुए लिया गया है।

अब देखना यह होगा कि इस फैसले पर जनता और राजनीतिक दलों की क्या प्रतिक्रिया सामने आती है और यह निर्णय भविष्य में किस तरह से लागू किया जाता है।