मध्य प्रदेश के जबलपुर ज़िले में गुरुवार शाम हुई एक दर्दनाक घटना ने पूरे प्रदेश को हिला दिया है। बरगी डैम में 20 साल से चल रहा एक पर्यटक क्रूज़ अचानक तेज़ तूफ़ान में डूबने से कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई, जबकि 22 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है।अधिकारियों के अनुसार आठ से ज़्यादा लोग अब भी लापता हैं और रातभर बचाव अभियान जारी है।

यह हादसा न सिर्फ कई परिवारों की खुशियां छीन ले गया, बल्कि प्रशासन और पर्यटन विभाग की लापरवाही पर भी गंभीर सवाल खड़े कर गया क्या इतने पुराने क्रूज़ को बिना पुख़्ता सुरक्षा इंतजामों के रोज़ चलाना ठीक था? क्या मौसम चेतावनी को समय रहते लागू किया गया?


तेज़ तूफ़ान के बीच हादसा

सीएसपी बरगी अंजुल अयंक मिश्रा ने बताया कि हादसा अचानक आए तेज़ आंधी-तूफ़ान में हुआ।यह घटना 30 अप्रैल की शाम करीब साढ़े पांच बजे खमरिया टापू के पास हुई, जब मध्य प्रदेश पर्यटन का करीब 20 साल पुराना क्रूज़ डैम में डूब गया।

एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना और प्रशासन की टीमों ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।


लाइफ़ जैकेट देने का मौका नहीं मिला क्रूज़ पायलट

क्रूज़ के पायलट महेश ने दावा किया कि वह 10 साल से प्रशिक्षित और लाइसेंसधारी पायलट हैं।

उन्होंने कहा सभी सुरक्षा इंतज़ाम थे, लेकिन तूफ़ान इतनी तेजी से आया कि यात्रियों को लाइफ़ जैकेट पहनने का मौका नहीं मिला।कई प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि पानी में अचानक ऊंची लहरें उठने लगीं और क्रूज़ कुछ ही मिनटों में आधा डूब गया।


पूरा परिवार सैर पर था, कई सदस्य लापता

हादसे के समय क्रूज़ पर जबलपुर आयुध निर्माणी खमरिया फैक्ट्री के कर्मचारी कामराज आर्य अपने करीब 15 परिजनों के साथ मौजूद थे।

कामराज और उनके एक बेटे को बचा लिया गया, लेकिन उनके परिवार के कई सदस्य अब भी लापता हैं।

स्थानीय विधायक नीरज सिंह ने बताया कि यह क्रूज़ वर्षों से संचालित हो रहा था और हादसे के कारणों पर जांच के बाद ही कुछ स्पष्ट होगा।


हमें लाइफ़ जैकेट पहले नहीं दी गई बचकर निकली संगीता कोरी

दिल्ली से घूमने आई संगीता कोरी ने कहा हम खुशी मना रहे थे। किसी ने भी क्रूज़ में चढ़ते समय लाइफ़ जैकेट नहीं दी।जब पानी भरने लगा, तभी जल्दबाज़ी में जैकेट बांटी गईं और छीना-झपटी शुरू हो गई।उन्होंने आगे कहा सुरक्षा इंतजाम बेहद कम थे

बच्चों के टिकट नहीं बनाए गए

40–45 लोग क्रूज़ पर सवार थे

स्थानीय लोगों की चेतावनी को पायलट ने नजरअंदाज किया

संगीता ने आरोप लगाया कि गांव वाले इशारा कर रहे थे कि दिशा बदल लो, लेकिन चालक ने सुना ही नहीं। अगर समय रहते दिशा बदल देते तो शायद बच जाते।उन्होंने बताया कि यात्री खुद स्टोर रूम तोड़कर लाइफ़ जैकेट निकाल रहे थे।


स्थानीय मजदूरों ने सबसे पहले बचाव शुरू किया

घटनास्थल के पास काम कर रहे मजदूरों की टोली ने सबसे पहले लोगों को बचाया।सागर गुप्ता ने बताया

हम 10–12 लोग थे। तूफ़ान के बीच पानी में कूदकर 14 लोगों को निकाला और चार महिलाओं के शव भी बाहर लाए।श्याम और अरविंद यादव सहित कई मजदूरों ने कहा कि लहरें इतनी ऊंची थीं कि पानी में उतरना बेहद मुश्किल था


रेस्क्यू ऑपरेशन रातभर जारी

बारिश और अंधेरे के कारण बचाव कार्य में रुकावटें आईं, लेकिन बड़ी टॉर्च और उपकरणों की मदद से तलाश जारी रही।टीमों ने गैस कटर की मदद से क्रूज़ को काटकर एक व्यक्ति को जीवित बाहर निकाला, जो तीन घंटे तक अंदर फंसा रहा।

क्रूज़ को रस्सियों और जेसीबी की मदद से बाहर निकालने की कोशिश हो रही है।प्रशासन ने कहा है कि लापता लोगों की तलाश तब तक जारी रहेगी जब तक अंतिम व्यक्ति नहीं मिल जाता।