गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। इस समय मां और बच्चे दोनों की सेहत के लिए सही पोषण बेहद जरूरी माना जाता है। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि प्रेग्नेंसी में खून की कमी (एनीमिया) और जरूरी विटामिन्स की कमी तेजी से बढ़ती समस्या बनती जा रही है। समय रहते इसका पता न चलने पर यह मां और गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कई महिलाएं शुरुआती लक्षणों को सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, जो बाद में बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है।

क्यों खतरनाक है खून और विटामिन की कमी?

डॉक्टरों के अनुसार, प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर को सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा आयरन, फोलिक एसिड, कैल्शियम और विटामिन्स की जरूरत होती है। अगर शरीर में इन पोषक तत्वों की कमी हो जाए, तो महिला को कमजोरी, चक्कर आना, थकान और सांस फूलने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गंभीर मामलों में समय से पहले डिलीवरी, बच्चे का कम वजन और मां की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है।

इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर गर्भवती महिला को लगातार थकान, सिर चकराना, शरीर में कमजोरी, चेहरा पीला पड़ना, सांस लेने में दिक्कत, बाल झड़ना या दिल की धड़कन तेज महसूस हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। कई बार विटामिन B12 और विटामिन D की कमी से भी शरीर में दर्द, कमजोरी और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

कैसे करें बचाव?

एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि प्रेग्नेंसी के दौरान हरी सब्जियां, फल, दालें, दूध, अंडे और आयरन से भरपूर चीजों का सेवन करना चाहिए। समय-समय पर ब्लड टेस्ट कराना भी जरूरी है, ताकि शरीर में किसी पोषक तत्व की कमी का पता लगाया जा सके। डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी सप्लीमेंट लेने से बचना चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भावस्था में छोटी सी लापरवाही भी मां और बच्चे दोनों की सेहत पर भारी पड़ सकती है। ऐसे में सही खानपान, नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह का पालन करना बेहद जरूरी है।

Disclaimer: यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से दी गई है। इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प न मानें। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या लक्षण दिखाई देने पर तुरंत योग्य डॉक्टर या विशेषज्ञ से संपर्क करें।