ere | Source: erपटना: बिहार में विकास योजनाओं को निर्धारित समय में पूरा कराने और सरकारी राशि का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए सम्राट चौधरी सरकार ने निगरानी और समीक्षा को तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत चल रहे कार्यों की प्रगति का आकलन करने के लिए राज्यभर से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। सरकार के इस कदम को लंबित योजनाओं को गति देने और विकास कार्यों में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ाने पर सरकार का फोकस

मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत विधायकों और विधान पार्षदों की अनुशंसा पर विभिन्न क्षेत्रों में सड़क, भवन, सामुदायिक सुविधाओं और अन्य जरूरी विकास कार्य कराए जाते हैं। सरकार चाहती है कि स्वीकृत योजनाओं का लाभ लोगों तक समय पर पहुंचे। इसी उद्देश्य से योजना एवं विकास विभाग ने राज्यभर में योजनाओं की वर्तमान स्थिति की जानकारी मांगी है।

सरकार की ओर से की जा रही यह समीक्षा केवल लंबित कार्यों की जानकारी जुटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य उन योजनाओं की पहचान करना भी है, जिन्हें प्रशासनिक या अन्य कारणों से अपेक्षित गति नहीं मिल पाई है।

71.40 फीसदी राशि का हो चुका है उपयोग

योजना एवं विकास विभाग के अनुसार, जनवरी 2026 तक 17वीं विधानसभा के कार्यकाल के दौरान विधायकों और विधान पार्षदों द्वारा अनुशंसित विकास कार्यों के लिए उपलब्ध राशि का करीब 71.40 प्रतिशत हिस्सा खर्च किया जा चुका था। वहीं लगभग 20 प्रतिशत स्वीकृत योजनाएं अलग-अलग चरणों में क्रियान्वयन की प्रक्रिया में थीं।

यह आंकड़ा बताता है कि बड़ी संख्या में योजनाओं पर काम आगे बढ़ चुका है। अब सरकार का जोर शेष कार्यों को भी तेजी से पूरा कराने और स्वीकृत योजनाओं का समयबद्ध लाभ जनता तक पहुंचाने पर है।

पुरानी योजनाओं को भी पूरा कराने की तैयारी

सरकार ने लंबे समय से लंबित योजनाओं को भी समीक्षा के दायरे में लिया है। विभागीय जानकारी के अनुसार, कुछ क्षेत्रों में कई वर्ष पहले स्वीकृत कार्य अभी पूरे नहीं हो पाए हैं। ऐसे मामलों की रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार संबंधित स्तर पर अड़चनों की पहचान कर उन्हें दूर करने की दिशा में कार्रवाई कर सकती है।

मार्च 2023 की नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में भी योजना के क्रियान्वयन से संबंधित कुछ कमियां सामने आई थीं। सरकार द्वारा अब विस्तृत समीक्षा कराना इसी तरह की समस्याओं को दूर करने और सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।

विकास के लिए बढ़ाया गया था वार्षिक आवंटन

वित्तीय वर्ष 2023-24 से प्रत्येक विधायक के लिए वार्षिक आवंटन बढ़ाकर 4 करोड़ रुपये किए जाने की व्यवस्था की गई थी। इसका उद्देश्य विधायकों के क्षेत्रों में स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकास कार्यों को अधिक संसाधन उपलब्ध कराना था।

बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों में कुल 318 सदस्य हैं, जिनमें 243 विधायक और 75 विधान पार्षद शामिल हैं। इस आधार पर हर साल करीब 1272 करोड़ रुपये की योजनाओं की अनुशंसा की जा सकती है। सरकार का प्रयास है कि इस राशि से स्वीकृत योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका वास्तविक लाभ आम लोगों को मिले।

पटना से पूर्णिया और मुंगेर तक विकास योजनाओं पर नजर

मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत पटना, गया, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, भागलपुर, पूर्णिया, छपरा, सीवान, सासाराम, बेतिया, सीतामढ़ी, मधुबनी, समस्तीपुर, बेगूसराय, नवादा, औरंगाबाद, बांका, सहरसा, खगड़िया, मुंगेर, जमुई और लखीसराय समेत कई प्रमुख शहरी क्षेत्र शामिल हैं।

इन क्षेत्रों से मांगी जा रही रिपोर्ट के जरिए सरकार यह जानना चाहती है कि कौन-सी योजनाएं पूरी हो चुकी हैं, किन पर काम चल रहा है और किन योजनाओं को तेजी से पूरा करने की जरूरत है। इससे योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन व्यवस्था को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।

जनता तक विकास का लाभ पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता

सम्राट चौधरी सरकार की ओर से योजनाओं की समीक्षा का मुख्य उद्देश्य विकास कार्यों को गति देना और जनता के लिए स्वीकृत धनराशि का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है। राज्यभर से रिपोर्ट मिलने के बाद योजनाओं की स्थिति का आकलन कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

सरकार का यह कदम इस बात का संकेत है कि विकास योजनाओं की केवल घोषणा ही नहीं, बल्कि उनके धरातल पर प्रभावी क्रियान्वयन और समयबद्ध निगरानी पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।