
नई दिल्ली, 24 अप्रैल। आम आदमी पार्टी से अलग होकर भाजपा में शामिल होने की घोषणा करने वाले राघव चड्ढा समेत सात राज्यसभा सांसदों की एंट्री पर तकनीकी अड़चन सामने आई है। राजनीतिक तौर पर भाजपा में जाने का दावा किया गया है, लेकिन संसदीय प्रक्रिया पूरी हुए बिना यह विलय औपचारिक रूप से पूरा नहीं माना जा रहा। इसी तकनीकी पेंच ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है।
राघव चड्ढा के साथ संदीप पाठक, अशोक कुमार मित्तल, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रमजीत सिंह साहनी और स्वाति मालीवाल ने आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में विलय का ऐलान किया। चड्ढा ने कहा कि राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई सांसदों ने संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत भाजपा में विलय का फैसला लिया है।
उन्होंने बताया कि सातों सांसदों के हस्ताक्षर वाला पत्र राज्यसभा सभापति को सौंपा गया है। चड्ढा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, “हम, राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई सांसद, भारतीय संविधान के प्रावधानों के तहत भारतीय जनता पार्टी में विलय कर रहे हैं।”
तकनीकी अड़चन क्या है
रिपोर्ट के मुताबिक सबसे बड़ा सवाल यह है कि भाजपा में शामिल होने की घोषणा के बावजूद इन सांसदों की औपचारिक एंट्री अभी अंतिम क्यों नहीं मानी जा रही। इसकी वजह यह बताई जा रही है कि राज्यसभा सभापति को पहले यह तय करना होगा कि यह मामला दलबदल है या वैध विलय। जब तक इस पर औपचारिक निर्णय नहीं हो जाता, तब तक प्रक्रिया अधूरी मानी जाएगी।
सात में सिर्फ तीन चेहरे क्यों दिखे
दिलचस्प बात यह रही कि भाजपा मुख्यालय में राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ही सार्वजनिक तौर पर नजर आए। बाकी चार सांसद—हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रमजीत सिंह साहनी और स्वाति मालीवाल—मौजूद नहीं थे।
सूत्रों के मुताबिक स्वाति मालीवाल पूर्वोत्तर में छुट्टी पर हैं, हरभजन सिंह आईपीएल प्रतिबद्धताओं के चलते व्यस्त हैं, राजिंदर गुप्ता विदेश में इलाज करा रहे हैं और विक्रमजीत सिंह साहनी स्वास्थ्य कारणों से सार्वजनिक कार्यक्रम में नहीं पहुंचे।
दो-तिहाई के गणित से बचाव
राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के कुल 10 सांसद थे। इनमें से सात सांसदों का एक साथ अलग होना दो-तिहाई संख्या पूरी करता है। यही आधार इन सांसदों के लिए दल-बदल कानून से राहत का दावा बना हुआ है। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार दो-तिहाई सदस्य यदि विलय का समर्थन करते हैं तो अयोग्यता से छूट मिल सकती है।
आप में अब कौन बचे
सात सांसदों के जाने के बाद आम आदमी पार्टी के पास अब केवल तीन राज्यसभा सांसद बचे हैं—संजय सिंह, एन.डी. गुप्ता और बलबीर सिंह सीचेवाल। पंजाब से अब सीचेवाल पार्टी के एकमात्र सांसद रह गए हैं।
राघव का नेतृत्व पर हमला
राघव चड्ढा ने पार्टी नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है। उन्होंने कहा कि पार्टी अब वैचारिक राजनीति के बजाय अलग दिशा में जा चुकी है और यही कारण है कि उन्होंने यह फैसला लिया।
सियासत में हलचल तेज
इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। भाजपा इसे अपनी बड़ी राजनीतिक बढ़त मान रही है, जबकि आम आदमी पार्टी ने इसे ‘ऑपरेशन लोटस’ करार देते हुए भाजपा पर खरीद-फरोख्त की राजनीति का आरोप लगाया है।
फिलहाल सबकी नजर राज्यसभा सभापति के फैसले पर टिकी है, क्योंकि तकनीकी मंजूरी के बाद ही यह तय होगा कि यह विलय औपचारिक रूप से मान्य माना जाएगा या इस पर संवैधानिक विवाद खड़ा होगा।

