
भभुआ| भभुआ नगर परिषद की राजनीति में बुधवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब राज्य निर्वाचन आयोग ने सभापति विकास कुमार तिवारी उर्फ बबलू तिवारी को अयोग्य घोषित करते हुए उनके पद को रिक्त कर दिया। आयोग ने तथ्यों को छिपाने और गलत हलफनामा देने के मामले में यह कार्रवाई की है। साथ ही जिलाधिकारी कैमूर को निर्देश दिया गया है कि उनके विरुद्ध विधिक कार्रवाई कर चार सप्ताह के भीतर आयोग को रिपोर्ट सौंपें।
मामला पूर्व सभापति जैनेंद्र कुमार आर्य की शिकायत के बाद शुरू हुआ था। उन्होंने वर्ष 2025 में राज्य निर्वाचन आयोग में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि विकास कुमार तिवारी ने नामांकन के दौरान अपनी संतानों से जुड़ी जानकारी छिपाई। शिकायत में कहा गया कि 4 अप्रैल 2008 के बाद उनकी दो से अधिक जीवित संतानें हैं, जो स्थानीय निकाय चुनाव की पात्रता नियमों का उल्लंघन है।
सुनवाई के दौरान जिलाधिकारी कैमूर की जांच रिपोर्ट में सामने आया कि विकास कुमार तिवारी की चार संतानें हैं, जिनमें से तीन की जन्मतिथि 4 अप्रैल 2008 के बाद की पाई गई। स्कूल अभिलेखों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आयोग ने माना कि सभापति ने गलत शपथ पत्र देकर चुनाव लड़ा और निर्वाचित हुए।
राज्य निर्वाचन आयोग ने इस आधार पर उन्हें अयोग्य करार देते हुए पद से मुक्त कर दिया और भभुआ नगर परिषद के सभापति का पद रिक्त घोषित कर दिया। साथ ही जिलाधिकारी को उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई करने का निर्देश भी जारी किया गया है।
इस फैसले के बाद भभुआ की राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। पूरे शहर में इस निर्णय को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है और इसे स्थानीय निकाय राजनीति में एक बड़े घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
