शनिवार को बिहार की राजधानी पटना में कुछ देर के लिए ऐसा माहौल बन गया, मानो कोई बड़ा आतंकी हमला हो गया हो। पटना हाईकोर्ट परिसर अचानक गोलियों की आवाज, सायरन और कमांडोज की तेज गतिविधियों से गूंज उठा। वहां मौजूद लोग एक पल के लिए घबरा गए, क्योंकि खबर फैली कि राजगीर सम्मेलन में जा रहे वैज्ञानिकों की बस को आतंकियों ने हाईजैक कर लिया है और सभी वैज्ञानिकों को बंधक बना लिया गया है।आतंकियों ने कथित तौर पर सरकार के सामने अपनी मांगें रखीं और हालात बेहद तनावपूर्ण नजर आने लगे। लेकिन कुछ ही देर बाद बिहार पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) ने मोर्चा संभाला और पूरी कार्रवाई किसी फिल्मी ऑपरेशन की तरह अंजाम दी। कमांडोज ने आतंकियों को घेरकर मार गिराया और सभी बंधकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। हालांकि बाद में साफ हुआ कि यह कोई वास्तविक आतंकी घटना नहीं थी, बल्कि बिहार एटीएस द्वारा आयोजित एक हाई-लेवल मॉक ड्रिल थी, जिसका मकसद सुरक्षा एजेंसियों की तैयारी और प्रतिक्रिया क्षमता को परखना था।


कैसे शुरू हुआ पूरा ऑपरेशन?

मॉक ड्रिल की कहानी के मुताबिक वैज्ञानिकों का एक दल राजगीर में आयोजित एक महत्वपूर्ण सम्मेलन में शामिल होने जा रहा था। इसी दौरान आतंकियों ने उनकी बस को रोक लिया और बस में मौजूद वैज्ञानिकों को बंधक बना लिया। सूचना मिलते ही सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। एटीएस को अलर्ट किया गया और तुरंत विशेष टीमों को मौके पर भेजा गया।


कमांडोज ने संभाला मोर्चा

ऑपरेशन के दौरान एटीएस कमांडोज ने बेहद सुनियोजित रणनीति अपनाई। पहले इलाके की घेराबंदी की गई, फिर आतंकियों की लोकेशन ट्रैक की गई। इसके बाद स्नाइपर्स ने अपनी पोजिशन ली और असॉल्ट टीम को अंदर भेजा गया। कुछ ही मिनटों में आतंकियों को निष्क्रिय कर दिया गया और बस में फंसे सभी वैज्ञानिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस पूरे ऑपरेशन में यह दिखाने की कोशिश की गई कि अगर वास्तविक स्थिति बनती है तो सुरक्षा एजेंसियां किस तरह तेजी और सटीकता से काम करेंगी।


कई स्पेशल यूनिट्स ने लिया हिस्सा

एडीजी (ATS) पंकज दराद के मुताबिक इस मॉक ड्रिल में कई विशेष इकाइयों को शामिल किया गया था।

इनमें—

हिट टीम, असॉल्ट टीम, डिसेप्शन टीम, बम स्क्वायड, एंटी-सबोटाज टीम, स्नाइपर यूनिट, स्निफर डॉग स्क्वॉड शामिल रहे। इन सभी टीमों ने मिलकर यह दिखाया कि किसी भी बड़े खतरे से निपटने के लिए बहुस्तरीय रणनीति कितनी जरूरी होती है।


मुख्य न्यायाधीश भी रहे मौजूद

इस पूरे मॉक ड्रिल को पटना हाईकोर्ट परिसर में आयोजित किया गया, जहां पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय कुमार साहु समेत कई न्यायाधीश और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।

मुख्य न्यायाधीश ने एटीएस की इस कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के अभ्यास सुरक्षा एजेंसियों की तैयारी को मजबूत करते हैं और आम लोगों के भीतर सुरक्षा को लेकर विश्वास बढ़ाते हैं।


क्यों जरूरी थी यह मॉक ड्रिल?

पटना हाईकोर्ट जैसे संवेदनशील स्थान पर इस तरह का अभ्यास आयोजित करने का मकसद यह परखना था कि अगर कभी वास्तविक आतंकी खतरा सामने आए तो सुरक्षा एजेंसियां कितनी तेजी से प्रतिक्रिया देती हैं।

साथ ही यह संदेश भी दिया गया कि बिहार पुलिस और एटीएस किसी भी खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह मॉक ड्रिल भले ही एक अभ्यास थी, लेकिन इसने यह साफ कर दिया कि आपात स्थिति में सुरक्षा एजेंसियों की तैयारी कितनी अहम होती है।