दय्यान खान
गुरु और शिष्य के रिश्ते को यूं ही पवित्र नहीं कहा जाता. यह रिश्ता विश्वास, समर्पण और संघर्ष की बुनियाद पर टिका होता है. ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी इन दिनों देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है, जहां क्वाड्रपल पैरा तीरंदाज Payal Nag और उनके कोच Kuldeep Kumar Vedwan ने असंभव को संभव कर दिखाया है.
Payal Nag दुनिया की पहली क्वाड्रपल पैरा तीरंदाज मानी जाती हैं. बचपन में एक दर्दनाक बिजली हादसे में उन्होंने अपने दोनों हाथ और दोनों पैर गंवा दिए थे. लेकिन जिंदगी के इस अंधेरे मोड़ पर उनके गुरु कुलदीप कुमार ने उम्मीद की ऐसी लौ जलाई, जिसने उन्हें विश्व मंच तक पहुंचा दिया.
कुलदीप कुमार की ट्रेनिंग और मार्गदर्शन में पायल नाग ने कई बड़े पैरा तीरंदाजों को पछाड़ते हुए विश्व स्तर पर पहला स्थान हासिल किया. अप्रैल 2026 में बैंकॉक में आयोजित World Para Archery Series Final में पायल ने अपने आदर्श Sheetal Devi को हराकर नया इतिहास रच दिया.
इस उपलब्धि की सराहना देश के जाने-माने उद्योगपति Anand Mahindra ने भी की. उन्होंने सोशल मीडिया पर पायल की कहानी साझा करते हुए लिखा कि जब भी वे उदास महसूस करते हैं, तो पायल और शीतल जैसी खिलाड़ियों की तस्वीरें उन्हें साहस, दृढ़ता और सकारात्मक सोच का असली अर्थ याद दिलाती हैं.
आनंद महिंद्रा ने अपने पोस्ट में यह भी बताया कि पायल एक दिहाड़ी मजदूर की बेटी हैं. आठ साल की उम्र में हादसे ने उनका सब कुछ छीन लिया, लेकिन हौसला नहीं. कोच कुलदीप वेदवान ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया.
सोशल मीडिया पर यह कहानी वायरल होने के बाद पायल नाग लोगों के लिए प्रेरणा बन गई हैं. लाखों यूजर्स ने उनके जज्बे को सलाम किया. किसी ने उनके कोच को सच्चा गुरु बताया, तो किसी ने कहा कि यह कहानी साबित करती है कि सपनों की उड़ान के लिए शरीर नहीं, हौसला चाहिए.
पायल नाग और उनके गुरु की यह कहानी सिर्फ खेल की जीत नहीं, बल्कि इंसानी जज्बे, गुरु-शिष्य परंपरा और संघर्ष की ऐसी मिसाल है, जो हर किसी को प्रेरित करती है।
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