नुवाकोट (नेपाल)। नेपाल के नुवाकोट जिले के बिदुर नगरपालिका-10 स्थित बेत्रावती इलाके में भीषण बाढ़ के बाद एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। यहां करीब 10 दिनों से मलबे में दबी 60 वर्षीय चंडिका श्रेष्ठा को बचाव दल ने जिंदा बाहर निकाल लिया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि परिवार ने उनकी मौत मानकर आठवें दिन अंतिम धार्मिक रस्में तक शुरू कर दी थीं। लेकिन 11वें दिन मलबे के बीच से आई हल्की रोने की आवाज ने बचाव दल को उनकी मौजूदगी का संकेत दिया और इसके बाद उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
बाढ़ ने तबाह कर दिया था पूरा इलाका
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। इस आपदा में 1200 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है, जबकि तीन हजार से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इसी भीषण आपदा के दौरान 26 अगस्त को चंडिका श्रेष्ठा अपने परिवार के चार अन्य सदस्यों के साथ लापता हो गई थीं। भोटेकोशी नदी के इलाके में अचानक आई बाढ़ ने कई बस्तियों और घरों को अपनी चपेट में ले लिया था।
आठवें दिन परिवार ने मान ली थी मौत
बाढ़ के बाद कई दिनों तक चंडिका श्रेष्ठा का कोई पता नहीं चला। परिवार और रिश्तेदारों ने उनकी काफी तलाश की, लेकिन जब कोई जानकारी नहीं मिली तो उनके जीवित होने की उम्मीद लगभग खत्म हो गई। आठवें दिन परिवार ने उनकी मृत्यु के बाद की जाने वाली धार्मिक रस्में भी शुरू कर दी थीं। परिजनों ने उनके शरीर के प्रतीक के तौर पर कुश घास से एक पुतला बनाया और धार्मिक परंपरा के अनुसार रस्में निभानी शुरू कर दीं।
परिवार को जरा भी अंदाजा नहीं था कि चंडिका उसी इलाके में मलबे के भीतर फंसी हुई हैं और जिंदगी के लिए संघर्ष कर रही हैं।
मलबे से आई हल्की रोने की आवाज
चंडिका के जिंदा होने का पता बेहद असामान्य तरीके से चला। जानकारी के मुताबिक, नेपाल पुलिस की एक टीम बेत्रावती इलाके में सड़क निर्माण के काम के लिए पहुंची थी। इसी दौरान जवानों को मलबे में दबे एक घर के आसपास से हल्की रोने की आवाज सुनाई दी।
आवाज सुनते ही पुलिस टीम ने तुरंत उस स्थान पर मलबा और कीचड़ हटाना शुरू किया। बचावकर्मियों ने खिड़की तोड़कर घर के अंदर प्रवेश किया और काफी प्रयास के बाद चंडिका तक पहुंचने में कामयाब रहे। इसके बाद उन्हें मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला गया।
बाढ़ का बहाव घर को करीब 100 मीटर तक खिसका ले गया
रेस्क्यू टीम के मुताबिक, बाढ़ का बहाव इतना तेज था कि उसने पूरे घर को करीब 100 मीटर ऊपर की ओर खिसका दिया था। चार मंजिला मकान की साढ़े तीन मंजिलें पूरी तरह कीचड़ और मलबे में दब गई थीं। केवल ऊपरी मंजिल का कुछ हिस्सा ही बाहर दिखाई दे रहा था।
इसी मलबे के भीतर चंडिका कई दिनों से फंसी हुई थीं। उन्हें बाहर निकालने के बाद इलाज के लिए काठमांडू के बीरेंद्र अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका उपचार शुरू किया गया।
अस्पताल पहुंचकर परिवार को हुआ यकीन
चंडिका के रिश्तेदार रमेश मान श्रेष्ठा ने बताया कि बाढ़ के 11वें दिन परिवार को सूचना मिली कि एक बुजुर्ग महिला को मलबे से जिंदा बचाया गया है। खबर मिलते ही परिवार के लोग अस्पताल पहुंचे। वहां उन्हें पता चला कि बचाई गई महिला चंडिका ही हैं।
जिस महिला को परिवार मृत मान चुका था और जिसके नाम पर धार्मिक रस्में शुरू कर दी गई थीं, उसे जीवित देखकर परिवार के लोग हैरान रह गए।
चंडिका के परिवार के तीन लोग अब भी लापता
बाढ़ के दौरान चंडिका के जीजा ईश्वरी लाल श्रेष्ठा भी उसी घर में मौजूद थे। वह किसी तरह सुरक्षित बाहर निकल आए। हालांकि, उनकी पत्नी सुषमा, जो चंडिका की बहन हैं, और उनकी चाची का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। परिवार अभी भी तीनों के सुरक्षित मिलने की उम्मीद लगाए हुए है।
ईश्वरी लाल ने बताया कि बाढ़ की चेतावनी मिलने के बाद उन्होंने अपनी पत्नी को जगाया था। हालांकि, उनकी पत्नी ने सुबह की प्रार्थना पूरी करने के लिए कुछ देर रुकने का फैसला किया। इसी दौरान ईश्वरी लाल अपनी दुकान पर ग्राहकों से जुड़े काम में व्यस्त हो गए।
आंखों के सामने ढह गया घर
ईश्वरी लाल के मुताबिक, कुछ ही देर बाद उन्होंने अपनी आंखों के सामने बाढ़ के तेज पानी में घर को ढहते हुए देखा। घटना इतनी भयावह थी कि वह कुछ समय के लिए बेहोश हो गए। जब उन्हें कुछ मिनट बाद होश आया तो वहां घर का लगभग कोई हिस्सा दिखाई नहीं दे रहा था।
इसके बाद परिवार के सदस्यों की तलाश शुरू हुई, लेकिन चंडिका समेत कई लोगों की कोई जानकारी नहीं मिली। लंबे समय तक कोई सुराग नहीं मिलने के कारण परिवार ने चंडिका को मृत मान लिया था। हालांकि, मलबे के भीतर से आई एक आवाज ने उनकी पूरी कहानी बदल दी।
दो दिनों में चार लोगों का जिंदा रेस्क्यू
चंडिका श्रेष्ठा के जिंदा बचाए जाने से एक दिन पहले शुक्रवार को अपर त्रिशूली 3ए परियोजना की एक सुरंग से दो मजदूरों को भी सुरक्षित बाहर निकाला गया था। दोनों मजदूर करीब 170 मीटर नीचे सुरंग में फंसे हुए थे। बचाए गए मजदूरों की पहचान संजय शाह और कबीर महारजन के रूप में हुई।
नेपाल में भीषण बाढ़ के बीच लगातार जिंदा लोगों के मिलने से राहत और बचाव अभियानों को लेकर उम्मीद बढ़ी है। नुवाकोट के बिदुर नगरपालिका-10 के बेत्रावती में चंडिका श्रेष्ठा का मलबे से जिंदा निकलना इस आपदा की सबसे हैरान करने वाली घटनाओं में शामिल हो गया है। जिस महिला के परिवार ने अंतिम रस्में शुरू कर दी थीं, उसी महिला का कई दिनों बाद मलबे से जीवित मिलना सभी के लिए चौंकाने वाला रहा।
